स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें (How To Think Like Steve Jobs): सफलता को जीतना सिखाती है ये किताब

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STEVE JOBS KI TARAH KAISE SOCHEIN book summary
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स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें (How To Think Like Steve Jobs) book summary, जो हम आपको यहां बताने जा रहे हैं, यह आपको सिखाएगी कि अपनी जिंदगी के हर दिन को आप किस तरह से पूर्णता के साथ जी सकते हैं।

स्टीव जॉब्स कोई यूं ही नहीं बन जाता। स्टीव जॉब्स बनने के लिए अपनी जिंदगी में किस तरह से सोचना पड़ता है और किस तरीके से आगे बढ़ना पड़ता है, यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आपको डेनियल स्मिथ द्वारा लिखी गई किताब ‘स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें’ एक बार जरूर पढ़नी चाहिए। यह वह किताब है, जो न केवल स्टीव जॉब्स की जिंदगी के बारे में बताते हुए आगे बढ़ती है, बल्कि साथ में यह किताब यह भी बताती है कि स्टीव जॉब्स ने किस रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी में सफलता पाई। इसके अलावा इस किताब में आपको यह सीखने के लिए भी मिलता है कि आप भी किस तरह से एक बेहतर बिजनेसमैन और एक बेहतर कर्मचारी बन सकते हैं।

स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें book summary अब जब आप पढ़ने जा रहे हैं, तो आपको सबसे पहले यह जान लेना चाहिए कि स्टीव जॉब्स आखिर थें कौन। इसमें कोई शक नहीं कि स्टीव जॉब्स किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, मगर फिर भी हम आपको बता दें कि वे एक प्रख्यात अमेरिकी बिजनेसमैन और अविष्कारक रहे थे, जो कि एप्पल इंक के न केवल संस्थापक थे, बल्कि वे इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रहे थे। इसके अलावा भी स्टीव जॉब्स ने वाल्ट डिजनी कंपनी के निदेशक मंडल में सदस्य की जिम्मेवारी, पिक्सर एनीमेशन स्टूडियोज में मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेवारी और फिल्म टॉय स्टोरी में कार्यकारी निर्माता की जिम्मेवारियों का भी निर्वहन किया था।

कुल मिलाकर अपनी 56 साल की छोटी-सी जिंदगी में भी स्टीव जॉब्स बड़े मुकाम तक पहुंच गए। ऐसे में यह जानना बहुत ही जरूरी हो जाता है कि आखिर स्टीव जॉब्स किस तरह से सोचते थे कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतनी बड़ी कामयाबी अर्जित कर ली।

सिर्फ अपनी रुचि के मुताबिक ही चुनें काम

किताब How to think like Steve Jobs by Daniel Smith, जिसे कि हिंदी में मंजुला पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है, इस किताब में आपको एक बहुत बड़ा संदेश यह मिलता है कि आपका समय बहुत कीमती है और किसी भी सूरत में किसी और के कहने पर या किसी की बातों में आकर आपको इसे बिल्कुल भी बर्बाद नहीं करना चाहिए। किताब में बताया गया है कि स्टीव जॉब्स ने किस तरीके से उसी क्षेत्र में काम करने को चुना, जिसमें उनकी रुचि थी।

लोगों ने उन्हें बहुत कुछ बताया, कई तरह के रास्ते दिखाए, उन्हें बहुत से सुझाव दिए, फिर भी स्टीव जॉब्स ने आखिरकार वही किया, जिसमें उनकी रुचि थी और जिसमें वे सबसे उत्तम कर सकते थे। उसका नतीजा पूरी दुनिया ने देखा। इसलिए हमें भी सिर्फ उसी काम के साथ आगे बढ़ना चाहिए, जो हमारी रुचि का है और जिसमें हम अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकते हैं।

सोच जितनी बड़ी, कामयाबी उतनी ही विशाल

डेनियल स्मिथ द्वारा लिखी गई किताब स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें एक और महत्वपूर्ण चीज यह सिखाती है कि अपनी सोच को आपको हमेशा बड़ा रखना चाहिए। स्टीव जॉब्स ने कभी भी छोटी सोच नहीं रखी। उन्होंने कभी भी कोई छोटा लक्ष्य अपनी जिंदगी में निर्धारित किया ही नहीं। उन्होंने हमेशा बड़ी चीजों के बारे में सोचा। उन्होंने अपने लक्ष्य को हमेशा ऊंचा रखा। इसी का नतीजा रहा कि वे अपने कॅरियर में लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए।

जिस ऊंचाई पर पहुंचने का सपना उन्होंने अपनी जिंदगी में देखा था, उस ऊंचाई तक उन्होंने पहुंच कर भी दिखाया। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने भी यही कहा था कि सपने आपको हमेशा बड़े देखने चाहिए। कुल मिलाकर यह किताब यह बताती है कि जब आप बड़े सपने देखते हैं, तो उसे पाने के लिए आप उतनी ही ज्यादा मेहनत भी करते हैं, जिससे आपको विशाल कामयाबी भी हाथ लगती है।

टीम ऐसी बनाएं, जो सिर्फ जीतना जानती हो

How to Think Like Steve Jobs book summary जब आप पढ़ रहे हैं, तो आपको यह भी जान लेना चाहिए कि स्टीव जॉब्स यूं ही इतने बड़े बिजनेसमैन नहीं बने थे। एक सफल बिजनेसमैन हमेशा एक सफल टीम बनाकर काम करता है। स्टीव जॉब्स ने भी यही किया। उन्होंने अपनी टीम में वैसे लोगों को भी नहीं रखा, जिनमें आगे बढ़ने की ललक तो थी, पर उनमें इसकी क्षमता नहीं थी। स्टीव जॉब्स ने अपनी टीम में वैसे लोगों को भी शामिल नहीं किया, जो आगे बढ़ने में सक्षम तो थे, लेकिन उनके अंदर आगे बढ़ने की आकांक्षा ही नहीं थी।

स्टीव जॉब्स ने हमेशा ऐसे लोगों को अपनी टीम में रखा, जो आगे भी बढ़ना चाहते थे और जिनमें इसके लिए भरपूर योग्यता भी थी। तब जाकर उन्होंने अपनी जिंदगी में अपने लक्ष्य को हासिल किया। इसलिए एक बिजनेसमैन के रूप में यदि आप भी अपने लिए एक सफल कॅरियर बनाना चाहते हैं, तो आपको स्टीव जॉब्स की इस सोच का हमेशा अनुसरण करना चाहिए।

अनुभव बिना आगे बढ़ने का मार्ग कहां?

स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें book summary बताते वक्त हम आपको एक और बड़ी ही महत्वपूर्ण चीज बता रहे हैं, जिसे स्टीव जॉब्स ने हमेशा अपनी जिंदगी में शामिल करके रखा था। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए अनुभव से बड़ी चीज कोई भी नहीं होती। स्टीव जॉब्स ने भी अपनी जिंदगी में अनुभवों को वरीयता दी। एक-एक अनुभव से सीखते हुए और इन अनुभवों को आपस में जोड़ते हुए हुए रास्ता बनाकर अपनी जिंदगी में वे आगे बढ़े थे।

ये अनुभव हमें न केवल अपने आप से, बल्कि हमारे परिवार के लोगों से, हमारे दोस्तों से, हमारे समाज से और हमारे देश से भी मिल सकता है। इसलिए अनुभव जहां से भी मिले, उसे अपने जीवन में सहेजते हुए और उससे प्रेरणा लेते हुए हमें अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए।

सिर्फ उत्पाद नहीं, अपने विचारों को भी सीखें बेचना

स्टीव जॉब्स यदि अपनी जिंदगी में एक कामयाब बिजनेसमैन बने, तो ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं हुआ कि उन्होंने केवल अपने उत्पादों को बेचने में सफलता हासिल की, बल्कि स्टीव जॉब्स ने लोगों को अपने विचार भी बेचे। उन्होंने अपने सपनों को बेचा। स्टीव जॉब्स ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को बेचा। इन सभी चीजों को बेचकर ही वे एक बिजनेस टाइकून बन सके।

इसलिए एक बिजनेसमैन के तौर पर कामयाब कॅरियर बनाने की इच्छा यदि आप रखते हैं, तो आपको यह जान लेना चाहिए कि जब तक आप अपने विचार, अपने सपने, अपनी महत्वाकांक्षाओं को नहीं बेच पाते हैं, तब तक अपने उत्पादों को सफल तरीके से बेच पाना आपके लिए मुमकिन नहीं है।

चलते-चलते

स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें book summary को पढ़कर आपको इस बात का अंदाजा जरूर हो गया होगा कि स्टीव जॉब्स किस तरह से सोचते थे और अपनी सोच को आधार बनाकर किस तरीके से उन्होंने अपनी जिंदगी के मायने साबित करके दिखाए। स्टीव जॉब्स की यह खासियत रही कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी रुकना नहीं सीखा। स्टीव जॉब्स ने कभी किसी भी चीज के साथ समझौता करना नहीं सीखा। स्टीव जॉब्स ने हमेशा अपनी जिंदगी में केवल उसी काम में हाथ लगाया, जिससे उन्हें सबसे ज्यादा प्रेम था। साथ ही स्टीव जॉब्स छोटी-मोटी नाकामयाबियों से डरे नहीं, बल्कि उन असफलताओं की सीढियां बनाकर उन पर चलते हुए सफलता की दहलीज तक पहुंच गए। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि कोई भी यूं ही स्टीव जॉब्स नहीं बन जाता। इसके लिए स्टीव जॉब्स की तरह सोचना और उसके मुताबिक काम करना भी जरूरी है।

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