क्या है एक पहल अभियान ? | What is Ek Pahal Campaign?

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Ek Pahal Campaign
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देश वर्तमान में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, इसी मौके पर लोगों को न्याय के करीब लाने के लिए न्याय आपके द्वार’ मूल मंत्र के साथ न्याय मंत्रालय ने नालसा के साथ मिलकर एक व्यापक राष्ट्रव्यापी कानूनी जागरूकता अभियान शुरू किया है। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक ट्वीट के माध्यम से यह जानकारी देशवासियों के साथ साझा की है। इस अभियान को एक पहल कैंपेन Ek Pahal Campaign नाम दिया गया है जिसके तहत 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर के मध्य सम्पूर्ण भारतवर्ष में यह अभियान चलाया जायेगा। जिसमे टेली-लॉ के माध्यम से हाशिए के समुदायों को कानूनी सहायता से मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। आइये जानते है- एक पहल कैंपेन Ek Pahal Campaign के बारे में विस्तार से।

क्या है ‘एक पहल’ अभियान ? | What is Ek Pahal Campaign?

  • 17 सितंबर 2021 को कानून और न्याय मंत्रालय और नालसा द्वारा लोगों में देशव्यापी संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से कानूनी जागरूकता पैदा करने के लिए एक अखिल भारतीय विशेष अभियान शुरू किया गया है।
  • एक पहल कैंपेन (Ek Pahal Campaign) को देश भर की 50 हजार ग्रामपंचायतों में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है।
  • नालसा और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सभी नागरिकों विशेषकर जरूरतमंद और गरीब लोगों को निकट, वहनीय और त्वरित न्याय प्रदान करके कानूनी सहायता वितरण और नागरिकों के कानूनी सशक्तिकरण का एक मजबूत ढांचा तैयार करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
  • इस अभियान के तहत 185 मोबाइल वैन और अन्य वाहनों को एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम पर बनी फिल्में और वृत्तचित्र प्रदर्शित करने के लिए तैनात किया गया है।
  • इस दौरान 672 जिलों में विधिक सहायता को लेकर ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं तथा 37,000 पैनल वकीलों और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स की मदद से आम नागरिकों को प्री-लिटिगेशन/कानूनी सलाह देने के लिए 4100 लीगल एड क्लीनिकों की व्यवस्था की गयी है।
  • न्याय विभाग और नालसा का यह संयुक्त प्रयास समावेशी शासन को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है; यह बेजुबानों को आवाज देना के पथ पर सबका साथ, सबका विकास और सबका न्याय’  मंत्र से प्रेरित है।

‘एक पहल’ अभियान का उद्देश्य | Objectives of Ek Pahal Campaign

एक पहल अभियान का मुख्य उद्देश्य कानूनी सहायता को मुख्य धारा में लाना और प्रत्येक नागरिक तक न्याय की पहुंच को सुलभ बनाना है। साथ में इस अभियान के तहत लोगों को टेली-लॉ इनिशिएटिव के तहत पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

टेली लॉ क्या है? | What is Tele Law?

  • कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा टेली-लॉ इनिशिएटिव को साल 2017 में शुरू किया गया था। इस सेवा का उद्देश्य जरूरतमंदों, विशेष रूप से हाशिए पर और वंचितों तक पहुंचना है। सेवा ग्राम पंचायत स्तर पर स्थित सामान्य सेवा केंद्रों या सीएससी के माध्यम से प्रदान की जाती है।
  • टेली कानून पैनल के सदस्यों द्वारा लाभार्थियों को पूर्व-मुकदमा सलाह या परामर्श प्रदान करता है। टेली-लॉ का तात्पर्य, कानूनी जानकारी और सलाह देने के लिए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने से है।
  • न्याय विभाग ने सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के माध्यम से हाशिए के समुदायों को कानूनी सहायता को मुख्यधारा में लाने के लिए नालसा और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड के साथ भागीदारी की है।
  • टेली लॉ द्वारा प्रभावी वकीलों के माध्यम से देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 633 जिलों में 50,000 ग्राम पंचायतों में 51,434 सामान्य सेवा केंद्रों को कवर करने वाले लाभार्थियों को पूर्व-मुकदमे संबंधी सलाह/परामर्श प्रदान किया जायेगा।

भारत में न्याय की स्थिति | Status of Justice in India

  • भारत की न्याय प्रणाली विश्व की प्राचीन न्याय प्रणालियों में से एक है। इसे अंगेजों की न्याय व्यवस्था से अपनाया गया है।
  • भारत में शासन के तीन अंगों में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका में से न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक कहा जाता है।
  • देश की न्यायपालिका सर्वोच्च न्यायालय , उच्च न्यायालय, ज़िला अदालत , निचली अदालत, ट्रिब्यूनल, फास्ट ट्रैक कोर्ट, लोक अदालत आदि के द्वारा निर्मित है।
  • देश में एक सर्वोच्च न्यायालय, 25 उच्च न्यायालय, 672  ज़िला अदालत, 17 ट्रिब्यूनल, 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट तथा पंद्रह लाख से ऊपर लोक अदालतें हैं।
  • सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत के सर्वोच्च न्यायालय में 58,700 तथा उच्च न्यायालयों में करीब 44 लाख और ज़िला एवं सत्र न्यायालय तथा अधीनस्थ न्यायालयों में लगभग तीन करोड़ मुकदमे लंबित हैं।
  • ऊपर दिए गए आंकड़ें सचमुच में हैरान करने वाले हैं , किन्तु यही वास्तविकता है। भारत में बढ़ते भ्रष्टाचार, अपराध, असंतोष के कारण दिन-प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ते ही जा रही है।
  • भारत में 10 लाख लोगों पर न्यायाधीशों की संख्या 18 है, जिसे विधि आयोग की सिफारिश के बाद प्रति 10 लाख जनसंख्या पर तकरीबन 50 किया जाना है।
  • भारत के न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी, मूलभूत सुविधाओं की कमी, मामलें निपटान का समय निश्चित न होना आदि अनेक समस्यायें न्याय में देरी के मुख्य कारण है।
  • न्यायालयों में लम्बे अवकाश से न्याय में देरी, न्याय व्यवस्था में आधुनिक तकनीक की कमी, न्याय विभागों में आपसी संचार का धीमा होना, अधिवक्ताओं के कारण विलम्ब आदि इसके अन्य कारण है।

राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण : NALSA

  • भारत में राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (National Legal Services Authority (NALSA)) का गठन 9 नवम्बर 1995 को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत किया गया था।
  • इसका उद्देश्य पात्र उम्मीदवारों को मुफ्त कानूनी सेवायें प्रदान करना और मामलों के त्वरित समाधान के लिए लोक अदालतों का आयोजन करना है।
  • नालसा का मुख्यालय नयी दिल्ली में स्थित है तथा इसका धेय वाक्य सब के लिए न्याय है।
  • नालसा देश भर में कानूनी सहायता कार्यक्रम और योजनाएँ लागू करने के लिये राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को दिशा-निर्देश ज़ारी करता है।
  • नालसा द्वारा मुफ्त में सलाह के पात्र महिलाएं और बच्चे, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य, औद्योगिक श्रमिक, बड़ी आपदाओं, हिंसा, बाढ़, सूखे, भूकंप और औद्योगिक आपदाओं के शिकार लोग, विकलांग व्यक्ति, हिरासरत में रखे गए लोग, ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपए से अधिक नहीं है, बेगार या अवैध मानव व्यापार के शिकार आदि है।
  • नालसा देश के विभिन्न हिस्सों में कानूनी सेवा कार्यक्रमों से जुड़ी बैठकें, सेमिनार और कार्यशालाएँ भी आयोजित करता है।
  • राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा गूगल प्ले स्टोर पर नालसा मोबाइल एप लांच किया गया है। आम जनता इस एप के माध्यम से कानूनी सहायताओं के लिए आवेदन तथा नि:शुल्क सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकती हैं।

चलते चलते

दोस्तों, हम खुद किस्मत है की हम डिजिटल भारत के निर्माण के गवाह बन रहें है। जब भारत 1947 में आजाद हुआ था तो उसने खुद को अन्य देशों के साथ मुख्यधारा में जोड़ने के लिए बहुत सारे तकनीकी बदलाव किये होंगे, हम आज उन बदलावों को महसूस कर सकते है। क्योकि आज हम भी उसी तकनीकी बदलाव से गुजर रहें है। देश में डिजिटल भारत की मुहीम के तहत अनेक डिजिटली तकनीकी बदलाव हो रहे है, एक पहल कैंपेन Ek Pahal Campaign भी इसी मुहीम का एक हिस्सा है। भारत सहित विश्व के कई देशों में यह समय डिजिटल क्रांति का समय है। भारत में डिजिटल क्रांति की शुरुआत कब हुई और कैसे हुई इस विषय पर हम अपने आने वाले लेखों में बात करेंगे। आपको हमारा आज का लेख कैसा लगा हमें जरूर बताएं। इसी आशा के साथ की आपको हमारा आज का यह लेख पसंद आया होगा,हम यह लेख यही समाप्त करते है, जय हिन्द!

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