जानते हैं टोक्यो पैरालिम्पिक्स में गोल्ड दिलाने वाली अवनी लेखरा के बारे में

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Avni Lekhra
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टोक्यो ओलम्पिक 2020 के सफर का अंत नीरज चोपड़ा ने स्वर्णिम बना दिया था। उसी लौ को कायम रखते अवनी लेखारा ने टोक्यो पैरालम्पिक में 10 मीटर एयर रायफल में देश को गोल्ड दिला दिया है। इसी के साथ अवनी लेखारा भारतीय ओलम्पिक+पैरालम्पिक इतिहास में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गयी हैं। आपको बता दे अवनी ने फाइनल राउंड की शुरुआत 7वी पोज़िशन के साथ तथा अंत गोल्ड पोडियम फिनिश के साथ किया है। आज के इस लेख में हम अवनी लेखारा से जुड़ी हर जानकारी को आप तक पहुंचा रहे हैं। तो चलिए दोस्तों “जानते हैं टोक्यो पैरालिम्पिक्स में गोल्ड दिलाने वाली अवनी लेखरा के बारे” में विस्तार से।

कौन है अवनी लेखारा ?

  • अवनी लेखरा भारत को टोक्यो पैरालम्पिक खेलों में 10 मीटर एयर राइफल में पदक जिताने वाली गोल्डन गर्ल हैं।
  • अवनी का जन्म 8 नवम्बर 2001 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रवीण कुमार लेखरा तथा माता का नाम श्वेता जेवरिया है।
  • बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल अवनी के जीवन में साल 2012 में एक नया मोड़ आया जब वो एक सड़क हादसे के दौरान स्पाइनल कॉर्ड इंजरीज का शिकार हो गयी।
  • अवनी इस स्पाइनल कॉर्ड इंजरीज के कारण अपनी कमर से नीचे के हिस्से में किसी भी प्रकार की कोई भी हलचल महसूस नहीं कर सकती हैं।
  • साल 2012 के बाद अवनी ने अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और साथ में साल 2015 से शूटिंग का प्रशिक्षण लेना भी प्रारभ किया।
  • अवनी को संगीत सुनना, फिल्में और टेलीविजन देखना, खाना बनाना और पकाना, अपने परिवार के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।
  • वर्तमान समय मे अवनी ने अपनी ग्रेजुएशन पूर्ण कर ली है तथा वे एलएलबी की छात्रा हैं।
  • अवनी ने साल 2017 में शूटिंग वर्ल्ड कप, दुबई मे शूटिंग मे अपना अंतराष्ट्रीय पदार्पण किया था।
  • अवनी ने सुभाष राणा, जेपी नौटियाल एवं चंदन सिंह आदि के मार्गदर्शन मे प्रशिक्षण लिया है। वर्तमान मे पैरालम्पिक टोक्यो मे उनकी कोच Suma Shirur हैं।

पिता के प्रोत्साहन पर शूटिंग में बनाया करियर

  • एक पिता की भूमिका में प्रवीण कुमार लेखरा जी को देखना और अपने आत्मबल से अपने दुखों से ऊपर उठकर नयी राहों की तलाश करना सचमुच में एक प्रेरणादायी पहल है।
  • अवनी के पिता प्रवीण जी ने अपनी बेटी को एक नयी हिम्मत दी और उसे आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाया। शूटिंग के प्रति अवनी की रूचि विकसित करने के पीछे भी उनके पिता प्रवीण कुमार लेखरा जी का बहुत बड़ा हाथ है।
  • साल 2015 में अवनी ने जगतपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, जयपुर में शूटिंग के प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। प्रारम्भ मे अवनी शूटिंग और तीरंदाजी दोनों का अभ्यास करती थी।
  • आगे चलकर अवनी को शूटिंग मे ज्यादा आनंद आने लगा था  जिसके तहत उन्होंने फाइनली शूटिंग को करियर के रूप मे चुना और इसी मे आगे की राहें तय की।

अभिनव बिंद्रा से प्रेरित होकर जीता गोल्ड

  • महज 11 साल की आयु में इस तरह के दर्दनाक हादसे से गुजरने के बाद अवनी के सामने केवल पढ़ाई करके अपने जीवन को आगे बढ़ाने का ही विकल्प था।
  • पिता के प्रोत्साहन पर शूटिंग मे करियर प्रारम्भ किया और साथ मे पढ़ाई भी जारी रखी। । इसी बीच पिता प्रकाश लेखारा जी शूटिंग मे गोलमेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा किताब ‘A Shot at History’ अवनी के लिए ले आये।
  • अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा किताब ‘A Shot at History’ को पढ़ने के बाद अवनी को एक उत्प्रेरक मिल गया। अवनी ने अभिनव बिंद्रा को आदर्श मानकर आगे के करियर की राहें तय की।
  • अवनी आज जिस मुकाम पर है उसके लिए वो अभिनव बिंद्रा को भी श्रेय देती हैं, उनकी प्रेरणा से यह सब संभव हो पाया है। अवनी अपनी इस सफलता मे भारत की तमाम जनता का भी आभार व्यक्त करती हैं और उनके प्यार और आशीवार्द को नमन करती है।

Covid 19 के कारण प्रभावित हुई थी अवनी की फिजियोथेरेपी

  • Covid-19 के कारण पूरा विश्व प्रभावित रहा है। इसके कारण ओलम्पिक और पैरालम्पिक दोनों खेल एक साल की देरी से आयोजित हुए हैं।
  • Covid-19 प्रतिबंधों के कारण अवनी लेखारा की शूटिंग प्रशिक्षण और व्यक्तिगत फिजियोथेरेपी बहुत प्रभावित रही थी।
  • अवनी को “रीढ़ की हड्डी की विकलांगता के कारण कमर के नीचे कोई हलचल महसूस नहीं होती है” इनकी फिजियोथेरेपी के लिए ट्रेनर जयपुर सिटी के बाहर से आता था। किन्तु Covid 19 प्रतिबंधों के कारण वो नहीं आ सकता था , जिससे अवनी की पैरों की कसरत मे उनके माता-पिता ने सहायता की थी।
  • अवनी के कोच शिरूर के अनुसार, Covid 19 प्रतिबंधों के दौरान अवनी ने फ़ोन कॉल्स तथा ज़ूम कॉल्स के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण जारी रखा था। वो नियमित तौर पर कोच एवं अन्य प्रशिक्षकों के संपर्क मे रहती थी।

अभी भी जारी है अवनी का पैरालम्पिक सफर

  • अवनी की वर्तमान मे शूटिंग मे वैश्विक रैंक 5 है, उन्होंने विश्व की पहली वरीयता प्राप्त कैंपियन यूक्रेन की इरिना शेटनिक को पछाड़कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।
  • अवनी लेखारा का पैरालम्पिक सफर अभी जारी है, उन्होंने अभी मिश्रित एयर राइफल प्रोन, महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन और मिश्रित 50 मीटर राइफल प्रोन मे प्रतिभाग करना है।

अवनी लेखरा की उपलब्धियां

  • अवनी लेखारा भारत के ओलम्पिक+ पैरालम्पिक इतिहास में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गयी हैं।
  • अवनी ने 10 एयर रायफल शूटिंग स्पर्धा में 6 पॉइट के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया है।
  • 2019 में उन्हें भारत में गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा मोस्ट प्रॉमिसिंग पैरालंपिक एथलीट नामित किया गया था

क्या होते हैं पैरालम्पिक खेल

  • पैरालम्पिक खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शारीरिक एवं मानसिक रूप से विकलांग(40-45%) लोगों के लिए खेलों की प्रतियोगिता है। पैरालम्पिक खेलों का वर्तमान मे टोक्यो जापान मे आयोजन किया जा रहा है।
  • प्रथम पैरालम्पिक खेलों का आयोजन साल 1960 को रोम मे किया गया था। जिसमे 23 देशों के 400 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया था।
  • शारीरिक एवं मानसिक रूप से विकलांग लोगों के लिए खेल की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध मे घायल सैनिकों के रिहेबिलेशन प्रोग्राम के तहत डॉ गुडविंग गुट्टमान ने की थी।
  • वर्तमान मे टोक्यो पैरालम्पिक खेलों मे 163 देशों के 4,537 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। वर्तमान पैरालम्पिक खेलों मे भारत ने अभी तक ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 2 गोल्ड मेडल सहित 10 मेडल जीत लिए हैं।

चलते चलते

पैरालम्पिक खेलों मे अभी तक अवनी लेखारा(शूटिंग)और सुमित अंतिल (भालाफेंक) ने भारत को गोल्ड मेडल दिलाया है। देवेंद्र झाझरिआ(भालाफेंक), योगेश कठूनिया(डिस्कस थ्रो), निषाद कुमार(हाई जम्प), भाविना पटेल (टेबल टेनिस) तथा मरीयप्पन थंगावेलू (हाई जम्प) ने भारत को सिल्वर मेडल दिलाया है। सुंदर सिंह गुर्जर (भालाफेंक), सिंघराज अधाना (शूटिंग) तथा शरद कुमार(हाई जम्प) ने देश को ब्रॉन्ज़ मेडल दिलाया है। पैरालम्पिक खेल अभी भी जारी हैं, हमारे अन्य प्रतिभावान खिलाड़ी इसमें प्रतिभाग कर रहे हैं , हम उन्हें उनकी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनायें देते हैं तथा देश को और अधिक मेडल दिलाने की उम्मीद करते हैं। इसी के साथ हम आज का यह लेख यहीं समाप्त करते है। जय हिन्द !

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