ओलंपिक मेडल जीतने वाली भारतीय महिलाएं

1028
Olympic Medal Winners

कुछ समय पहले तक विश्व के किसी भी कोने में खेलों में पुरुषों का आधिपत्य रहा था। लेकिन अंधेरे की परते चीर कर विश्व भर में महिलाओं ने खेलों में मेडल जीतकर अपना लोहा मनवा ही लिया। भारत की महिलाएं भी इस काम में पीछे नहीं रहीं और खेलों के कुम्भ माने जाने वाले ओलंपिक में मेडल जीत कर दिखा दिया। 1924 के वर्ष जब भारत की ओर से दो महिलाओं ने ओलंपिक में भाग लिया से लेकर 2016 तक के वर्षों में भारत की पाँच सुंदरियों ने ओलंपिक के विभिन्न पदकों पर अपना कब्जा किया है।

कर्णम मल्लेश्वरी:

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम की कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 के सिडनी ओलंपिक में पहली बार वेट लिफ्टिंग में कांस्य मेडल जीतकर भारतीय महिलाओं की उपस्थिती दर्ज कर दी थी। 240 किलो के वर्ग में ओलंपिक पदक जीतने वाली करम पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं थीं। हालांकि वो इस खेल में गोल्ड मेडल जीतना चाहतीं थीं लेकिन किसी कारण से ऐसा हो न सका। लौह महिला के नाम से प्रसिद्ध मल्लेश्वरी ने 2004 एथेंस ओलंपिक में हिस्सा लेने के बाद खेलों से रिटायरमेंट ले ली है। 12 वर्ष की छोटी उम्र से ही भारोत्तोलन का अभ्यास करने वाली करणं को अर्जुन पुरस्कार के साथ ही खेल रत्न पुरस्कार और पद्म श्री मिल चुका है।

साइना नेहवाल:

बैडमिंटन की नंबर एक खिलाड़ी साइना नेहवाल का खेल का सफर कोई आसान नहीं था। फिर भी सभी मुश्किलों को पार करते हुए 2012 के ओलंपिक में बैडमिंटन में कांस्य पदक जीतकर साइना ने भारत को गौरव प्रदान किया था। इससे पहले 2008 में बीजिंग ओलंपिक्स में साइना भारत की ओर से ओलंपिक के क्वाटर फाइनल में प्रवेश करने वाली अकेली भारतीय खिलाड़ी थीं। बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला साइना ने लगातार ओलंपिक के अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। इसी के साथ साइना अकेली वो खिलाड़ी हैं जो एक महीने में तीन बार शीर्ष वरीयता की सीढ़ी चड़ चुकीं हैं।

इसी के चलते 2015 में उन्होनें बैडमिंटन की नंबर एक खिलाड़ी का खिताब भी अपने नाम कर लिया।

मैरी कॉम:

विवाह और बच्चे किसी नारी के लिए बढ़ा नहीं होते, इस बात को मैरी कॉम से सिद्ध कर दिया है। 2012 के बीजिंग ओलंपिक में पदक जीतकर अपने विभिन्न पदकों को जीतने की कड़ी को जारी रखा। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतकर मैरी कॉम “सुपर मॉम” का खिताब भी जीत चुकीं हैं। 2000 वर्ष में अपना बोक्सिंग का कैरियर शुरू करने वाली मैरी ने पाँच बार ओलंपिक पदक जीतकर विश्व चैंपियन का खिताब भी हासिल किया है। यहीं नहीं मैरी कॉम अकेली ऐसी महिला मुक्केबाज़ हैं जिन्होनें अपनी सभी 6 विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीता है।

साक्षी मलिक:

हरियाणा के छोटे से जिले रोहतक की साक्षी मलिक ने कुश्ती में अपनी जगह बनाते हुए रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर महिला शक्ति का लोहा मनवा लिया। 2004 में जब 12 वर्ष की कच्ची उम्र में उन्होनें कुश्ती सीखने के लिए अखाड़ा जॉइन किया तब उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा था। लेकिन 2010 में ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर उन्होनें सभी विरोधियों का मुंह बंद कर दिया। इसके ठीक चार वर्ष बाद साक्षी ने सीनियर लेवल की अंतर्राष्ट्रीय रेस्लिंग प्रतियोगिता जीत कर स्वर्ण पदक भी जीत लिया।

पी वी सिंधु:

2016 के रियो ओलंपिक में बैडमिंटन में रजत पदक जीतकर पीवी सिंधु ने न केवल अपने परिवार को बल्कि देश को भी चौंका दिया था। 21 वर्ष की सिंधु सबसे कम उम्र की भारतीय ओलंपिक पदक जीतने वाली महिला बन गई थीं। अपनी पिता को कोच बनाने वाली सिंधु ने 2013 में पहली भारतीय महिला के रूप में वर्ल्ड चैम्पियनशिप भी जीती थी। उन्हें अपने खेल के योगदान के लिए पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

इन महिला खिलाड़ियों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी लिंग, आय स्तर और इलाके के मोहताज नहीं होते हैं। मैरी कॉम ने विवाह और बच्चों के जन्म के बाद भी अपने शौक को खत्म नहीं किया उसी प्रकार रोहतक जैसे छोटे इलाके की साक्षी ने पुरुषों के वर्चस्व वाली कुश्ती में अपना नाम कमा लिया।

Leave a Reply !!

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.