क्या है इंटीग्रिटी पैक्ट और क्यों है यह चर्चा में?

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इंटीग्रिटी पैक्ट

इंटीग्रिटी पैक्ट पिछले कुछ समय से चर्चा में बना हुआ है। दरअसल सरकारी संगठनों में जो खरीद गतिविधियां होती हैं, उनमें कई बार भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में इस पर लगाम कसने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की तरफ से हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सरकारी संगठनों में अब जो भी खरीद होगी, उसके लिए जो इंटीग्रिटी पैक्ट है, इसे अपनाने के लिए मौजूद मानक संचालन प्रक्रिया में केंद्रीय सतर्कता आयोग की तरफ से संशोधन कर दिया गया है।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • इंटीग्रिटी पैक्ट (Integrity Pact) है क्या?
  • इंटीग्रिटी एक्सटर्नल मॉनिटर्स (Integrity External Monitors- IEMs) को समझें
  • संशोधित प्रावधान एक नजर में
  • संशोधन से पहले क्या थी व्यवस्था?
  • बतौर IEM नियुक्ति के लिए प्रावधान

इंटीग्रिटी पैक्ट (Integrity Pact) है क्या?

  • इंटीग्रिटी पैक्ट (Integrity Pact) को एक सावधानी बरतने वाली चीज कहा जा सकता है। जैसे कि सरकारी संगठनों से जुड़ी किसी चीज की जब बिक्री होती है तो ऐसे में विक्रेता, बोली लगाने वालों और खरीदने वालों के बीच एक तरह का समझौता किया जाता है, जिसके बारे में एक परिकल्पना इंटीग्रिटी पैक्ट के जरिए ही पेश की जाती है।
  • इसमें अनुबंध से जुड़ी किसी भी चीज पर भ्रष्टाचार का छाया नहीं पड़े, इसके लिए दोनों पक्षों को प्रतिबद्ध इसमें बनाया जाता है।
  • आसान शब्दों में कहें तो यह जो पैक्ट या फिर समझौता होता है, यह सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए किया जाता है।यही नहीं, यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देने का काम करता है।

इंटीग्रिटी पैक्ट से जुड़ीं महत्वपूर्ण बातें

  • जो मानक संचालन प्रक्रिया वर्ष 2017 के जनवरी में जारी की गई थी, केंद्रीय सतर्कता आयोग के नए आदेश के मुताबिक इसमें संशोधन किया गया है।
  • इंटीग्रिटी एक्सटर्नल मॉनिटर्स (Integrity External Monitors- IEMs) सभी सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों में मौजूद होता है। इसी में दरअसल सीवीसी ने बदलाव कर दिया है। अब इसके कार्यकाल को अधिकतम 3 वर्षों के लिए सीवीसी द्वारा सीमित कर दिया गया है।

इंटीग्रिटी एक्सटर्नल मॉनिटर्स (Integrity External Monitors- IEMs) को समझें

  • किसी भी खरीद-बिक्री के दौरान जो दस्तावेज आते हैं, उनकी स्वतंत्र तरीके से और बिना किसी भेदभाव के एकदम निष्पक्ष होकर इंटीग्रिटी एक्सटर्नल मॉनिटर्स द्वारा ही समीक्षा की जाती है।
  • इसमें यह भी देखा जाता है कि जो समझौता बिक्री और खरीद के लिए हुआ है, उसमें जो दोनों पार्टियां मौजूद हैं, उनके द्वारा अपनी जिम्मेदारियां सही तरीके से निभाई भी गई हैं या नहीं।
  • भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत कई तरह के प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। इंटीग्रिटी एक्सटर्नल मॉनिटर्स इसी के अंतर्गत इन सारी चीजों की जांच करता है। उसे यदि यह दिखता है कि समझौते के दौरान गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं तो ऐसे में उस संगठन का जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है उसे या फिर सीधे मुख्य सतर्कता अधिकारी के साथ सीवीसी को इसके बारे में IEMs अपनी रिपोर्ट को प्रस्तुत कर देता है।

संशोधित प्रावधान एक नजर में

  • इसमें एक बड़ा बदलाव यह किया गया है कि सरकार या फिर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के जो अधिकारी हैं, केवल उन्हीं के लिए अब IEMs का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इनमें वैसे अधिकारी शामिल हैं, जो सचिव स्तर के रहे हैं और जो केंद्र सरकार के पदों पर भी काम कर चुके हैं। जिनका वेतनमान भी समान है, वैसे अधिकारी भी इसके अंतर्गत आ जाएंगे।
  • इसमें यह प्रावधान भी किया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पद पर जो अधिकारी नियुक्त किए जा सकेंगे, उनमें सेवानिवृत्त अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों, बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों में अनुसूची ए कंपनियों के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी स्तर के अधिकारी के अलावा अतिरिक्त सचिव स्तर के एवं इसके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे।
  • किसी संगठन में मुख्य सतर्कता अधिकारी के तौर पर काम कर चुके व्यक्ति की भी नियुक्ति इसमें की जा सकेगी। इसके अलावा जनरल के समकक्ष रैंक से सशस्त्र बलों के जो अधिकारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उनकी भी नियुक्ति की जा सकती है।
  • साथ ही ऐसे लोगों को भी प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें किसी अन्य क्षेत्र में काम करने का अनुभव रहा हो।

संशोधन से पहले क्या थी व्यवस्था?

  • पूर्व के प्रावधान से तात्पर्य वर्ष 2017 में जारी किए गए आदेश से है। इसमें बताया गया था कि अनुसूची ए कंपनियों के साथ बीमा कंपनियों, पीएसबी, वित्तीय संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में बोर्ड स्तर के अधिकारी के पदों पर नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव स्तर पर काम कर चुके या फिर इससे भी ऊपर के स्तर या समकक्ष वेतनमान पर सेवा देकर रिटायर हुए कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सकेगी।
  • इतना ही नहीं लेफ्टिनेंट जनरल या फिर इससे वरिष्ठ पद से जो सशस्त्र बलों के अधिकारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उनकी भी नियुक्ति किए जाने का प्रावधान पहले मौजूद था।

बतौर IEM नियुक्ति के लिए प्रावधान

  • अभी जो नया प्रावधान आया है, उसमें जो भी मंत्रालय, संगठन या फिर विभाग होंगे, वहां मुख्य सतर्कता अधिकारी की IEM के रूप में नियुक्ति के लिए उन लोगों का एक पैनल बनाकर आगे बढ़ाना होगा, जो इसके लिए उनके मुताबिक पूरी तरह से उपयुक्त हैं।
  • वहीं यदि पिछले आदेश यानी कि 2017 की बात की जाए, तो सीवीसी जो पैनल तैयार करते थे, उसमें पूर्व से ही नियुक्त अधिकारियों को सम्मिलित किया जा सकता था। यही नहीं, वे उनके मुताबिक उपयुक्त लोगों के नाम का प्रस्ताव भी पेश कर सकते थे।
  • पहले यह प्रावधान हुआ करता था कि IEM का प्रारंभिक कार्यकाल 3 वर्षों का रहेगा और 2 वर्ष के इसके दूसरे कार्यकाल को इसके लिए उस स्थिति में बढ़ाया जा सकता था, जब मुख्य सतर्कता अधिकारी का अनुरोध संबंधित संगठन से प्राप्त हो।
  • नए प्रावधान में यह पूरी तरीके से स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी संगठन में IEM की नियुक्ति केवल 3 वर्षों की अवधि के लिए ही होगी।

निष्कर्ष

इंटीग्रिटी पैक्ट को लेकर जो मानक संचालन प्रक्रिया में केंद्रीय सतर्कता आयोग की तरफ से संशोधन किए गए हैं, यदि सही तरीके से इन पर अमल किया जाए, तो ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र में खरीद-बिक्री को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा, जिससे कि सरकारी धन के दुरुपयोग पर अंकुश लगाया जाना संभव होगा। बचाई गई राशि से विकास कार्यों को गति देने में सरकार को मदद मिलेगी।

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