आयुष आहार पायलट प्रोजेक्ट क्या है?

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केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सितम्बर 2021 में अपने एक बयान में देश के युवाओं में जंक फ़ूड की लत को कम करने के लिए आयुष आहार को बढ़ावा देने की बात की थी। उनके बयान के आधार पर आयुष मंत्रालय ने आयुष आहार की तरफ एक कदम बढ़ाते हुए , एक नयी पहल की शुरुआत की है।  इस पहल को ‘आयुष आहार पायलट प्रोजेक्ट’ कहा जा रहा है। जिसके तहत 4 जनवरी 2022 को  आयुष भवन की कैंटीन में आयुष भोजन के परोसने की शुरुआत की गयी है। आज के इस लेख में हम आपको ‘आयुष आहार पायलट प्रोजेक्ट’ से जुडी तमाम जानकारी देने जा रहे हैं। तो चलिए शुरू करते है आज का यह लेख। 

क्या है आयुष आहार पायलट प्रोजेक्ट?

आयुष आहार पायलट प्रोजेक्ट को आयुष मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली स्थित आयुष भवन कैंटीन में लॉन्च किया गया है। इस योजना का  उद्देश्य पौष्टिक आहार के माध्यम से स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देना है। इस आयुष आहार में  जिसमें कोकम पेय, गाजर का हलवा, भजनी वड़ा और सब्जी पोहा शामिल हैं। ये सभी आयुष आहार लोगों के बीच मशहूर होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक, पोषण से भरपूर और सुपाच्य भी हैं।

जल्द ही आयुष मंत्रालय के इस प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली के निरीक्षण हेतु केंद्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल आयुष भवन कैंटीन का निरीक्षण करने वाले हैं।

आयुष मंत्रालय इसे अभी एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित कर रहा है , इसकी सफलता के बाद मंत्रालय का इसे अपने सम्बद्ध 500 से अधिक कॉलेज और 3000 अस्पताल में शुरू करेगा।

क्यों चलाया जा रहा है आयुष आहार प्रोजेक्ट?

जनसामान्य में स्वच्छ, स्वास्थ्य वर्धक और सुपाच्य आयुष भोजन की आदतों का प्रचार एवं प्रसार करने लिए आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष आहार प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। आयुर्वेद के अनुसार, भोजन में हमेशा प्राकृतिक रूप से सुलभ शाकाहारी खाद्य पदार्थों का उपयोग करना चाहिए। आहार की मात्रा न हो अधिक होनी चाहिए और न ही कम होनी चाहिए।  हमेशा भूख से कम भोजन ही ग्रहण करना चाहिए ,ऐसा करने से पचने आसान तथा शरीर को भरपूर प्राप्त होता है।

चूँकि आयुष आहार प्रोजेक्ट आयुष मंत्रालय के अंतगर्त आयुर्वेद, होम्योपैथिक, नेचुरोपैथी आदि द्वारा सुझाये गए आहार का समर्थन करता है। अतः वह अपने इस प्रोजेक्ट के माध्यम से लोगों तक आयुष मान्यता प्राप्त आहार की जागरूकता बढ़ा रहा है। आयुर्वेद कहता है कि भोजन को अत्यधिक पकाने से परहेज करे, ऐसा करने से भोजन के पोषक तत्त्व बरक़रार रहते हैं तथा इसका पोषण शरीर को उचित मात्रा में मिल पाता है। इसी के साथ पीने में हमेशा गुनगुने पानी का उपयोग करे, अत्यधिक ठन्डे पानी के पेय उपयोग से बचे, पानी हमेशा घूंट -घूंट करके पीये तथा भोजन के आधे घंटे पहले और बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए। 

आयुष क्या है?

AYUSH यानि “आयुर्वेदिक, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी” भारत सरकार का एक विभाग है, जो आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। AYUSH में A -आयुर्वेद , Y- योग और नेचुरोपैथी, U- यूनानी , S -सिद्ध तथा H -होम्योपैथी को संदर्भित करता है।

आयुष को  पहले भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी (ISM & H) विभाग के नाम से जाना जाता था। साल 2003 में इसे एक नया विभाग बना दिया गया और AYUSH विभाग नाम दिया गया था।

आयुष आहार किसे कहते हैं?

स्वस्थ और सक्रिय जीवन के लिए मनुष्य को उचित एवं पर्याप्त पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। शरीर की आहार संबंधी आवश्यकताओं के तहत पोषक तत्वों की प्राप्ति के लिए अच्छा पोषण या उचित आहार सेवन महत्वपूर्ण है। ऐसा आहार तो 100%  प्राकृतिक रूप से उपलब्ध खाद्य पदार्थों से निर्मित होता है, आयुष आहार कहलाता है। इस प्रकार का आहार किसी भी प्रकार के प्राकृतिक एक्टिव फ़ूड एडिटिव से मुक्त होते हैं। साबुत अनाज, बाजरा, वनस्पति तेल, घी, मेवा, तिलहन और शर्करा, दलहन, मेवा, तिलहन, दुग्ध और दुग्ध उत्पाद, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी सब्जियां, फल आदि सब आयुष आहार में सम्मिलित खाद्य पदार्थ हैं। 

आयुष चिकित्सा पद्धति क्या होती है?

आयुष (AYUSH) का अभिप्राय आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी से है ये सब तो हम जान ही चुके हैं। अतः अब बात करते हैं, आयुष चिकित्सा पद्धति के विषय में, आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी , यूनानी, सिद्ध एवं होम्‍योपैथी को आधार मानकर की जाने वाली चिकित्सा को आयुष चिकित्सा पद्धति कहते हैं।

आयुर्वेद के विषय में हम जानते ही हैं, यह हमारे प्रमुख वेदों में से एक है। आयुर्वेद में प्राकृतिक रूप से प्राप्त औषधियों से चिकित्सा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि आयुर्वेद चिकित्सा से रोग जड़ से समाप्त हो जाता है , लेकिन आयुर्वेदिक उपचार अवधि लम्बी होती है। इसके परिणाम दूरगामी एवं हानिरहित रहते हैं, अर्थात आयुर्वेदिक चिकित्सा के कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते हैं।

योग और नेचुरोपैथी, योग के विषय में वर्तमान में जागरूकता सबसे अधिक है, आचार्य पतंजलि ने योग के नियम और आसनों का निर्माण किया था। योग के द्वारा हम अपने शरीर को स्वास्थ्य और निरोगी बना सकते हैं। बाबा रामदेव योग के प्रचार एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नेचुरोपैथी अर्थात प्राकृतिक रूप से चिकित्सा , मिट्टी, पानी, हवा जैसे प्राकृतिक तत्वों के माध्यम से उपचार को नेचुरोपैथी कहा जाता है। जानवरो के अस्वस्थ्य होने कि स्थिति में उनके द्वारा प्रकृति में उपलब्ध साधनों से स्वयं का उपचार किया जाता है, इन्ही से प्रेरणा लेकर मानव के उपचार के लिए भी प्राकृतिक चिकित्सा अपनायी गयी है।

यूनानी चिकित्सा, प्राचीन यूनान में उपचार के लिए अपनायी गयी चिकित्सा है, यूनानी चिकित्सा पद्धति का जनक बुकरात या  हिप्पोक्रेट को माना जाता है। इस चिकित्सा का आधार कफ़, बलगम, पीला पित्त (सफ़रा) और काला पित्त (सौदा) है। इसी से रोग के लक्षणों का पता किया जाता है और उपचार के लिए परम्परागत साधनों का उपयोग किया जाता है। भारत में इस पद्धिति के विकास का श्रेय हकीम अजमल खान को जाता है, इनके प्रयासों से दिल्ली में यूनानी चिकित्सा में पढा़ई हेतू “तिब्बतिया कालेज” की स्थापना की गयी है। 11 फ़रवरी को राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा दिवस मनाया जाता है।

सिद्ध चिकित्सा पद्धति, इस पद्धति का विकास भारत के तमिलनाडु में हुआ था तथा इसका जनक ऋषि अगस्त्य को माना जाता है। चूँकि इस चिकित्सा पद्धति का प्रचार -प्रसार 9 नाथों एवं 84 सिद्धों द्वारा किया गया अतः इसे ‘सिद्ध चिकित्सा’ कहा जाता है। तनाव, अनिद्रा, मोटापा और ब्लड प्रेशर के इलाज में सिद्ध चिकित्सा का ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसमें भी चिकित्सा का आधार वात, पित्त और कफ होते हैं। 4 जनवरी को सिद्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है।

होम्योपैथी चिकित्सा एक परम्परागत चिकित्सा पद्धिति है, इसके जन्मदाता सैमुएल हैनीमेन है। भारत में होम्योपैथी दूसरी लोकप्रिय चिकित्सा है।  विश्व में होम्योपैथी चिकित्सा से लाभ लेने वाले लोगों की संख्या 20 करोड़ से अधिक है। 

आयुष मंत्रालय क्या है?

आयुष मंत्रालय को 9 नवंबर 2014 को, हमारे प्राचीन चिकित्सा पद्धति के गहन ज्ञान को पुनर्जीवित करने और स्वास्थ्य के आयुष प्रणालियों के इष्टतम विकास और प्रसार को सुनिश्चित करने की दृष्टि से शुरू किया गया था। एक पूर्ण मंत्रालय के रूप में, यह एक वैज्ञानिक तर्क के साथ इन पारंपरिक प्रणालियों के विकास के प्रति एन डी ए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इससे पहले 1995 में भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी विभाग (ISM&H) का गठन इन सभी पद्यतियों के विकास के लिए किया गया। फिर इसे आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी में शिक्षा और अनुसंधान पर ध्यान देने के साथ नवंबर 2003 में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) विभाग के रूप में नामित किया गया था।

अंत में

पोषक तत्वों से भरपूर आहार की आवश्यकता हमारे शरीर को हमेशा रहती है। हम अपनी गलत खानपान शैली से अपने शरीर को नुकसान पहुंचाते जा रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरुप मानव जाति नये-नये रोगों से ग्रसित होते जा रही है। वर्तमान में प्रचलित कोरोना भी चीन की गलर खानपान की शैली का ही एक उदाहरण है। अतः हमे हमेशा आहार में संतुलित पोषण युक्त शुद्ध शाकाहारी भोजन  ही लेना चाहिए। वर्तमान में प्रचलित जंक फ़ूड की गलत लत से स्वयं को बचाये और आयुष आहार को अधिक से अधिक भोजन में शामिल करें , इसी सन्देश को प्रचारित करने हेतु आयुष मंत्रालय का ‘आयुष आहार पायलट प्रोजेक्ट’ चलाया जा रहा है। दोस्तों यदि आपको हमारा यह आयुष लेख पसंद आया हो तो कृपया इसे अपने दोस्तों तक अवश्य शेयर करे। इसी उम्मीद के साथ हम आज का यह लेख यही समाप्त करते हैं, जय हिन्द।

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