सहकारिता मंत्रालय क्या है?

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sahkarita mantralaya


विगत सप्ताह केंद्र सरकार द्वारा कई अहम फैसले लिए हैं, जिसमे मंत्रिमंडल मे विस्तार, मंत्रालयों मे फेर-बदल और नए सहकारिता मंत्रालय का गठन आदि प्रमुख रहे। केंद्र सरकार द्वारा 6 जुलाई 2021 को नए सहकारिता मंत्रालय के गठन की घोषणा की गयी तथा 7 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय की बागडोर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों मे सौप दी गई है। आज के इस लेख के माध्यम से हम सहकारिता मंत्रालय से सम्बंधित उन सभी प्रश्नो के उत्तर देने की कोशिश करेंगे जो आपके जेहन मे उठ रहें हैं। तो चलिए शुरू करते है आज का लेख सहकारिता मंत्रालय

इस लेख मे हम लाये हैं-

  • सहकारिता क्या है?
  • सहकारिता मंत्रालय क्या होता है?
  • क्या होगा सहकारिता मंत्रालय का उद्देश्य एवं कार्य ?
  • सहकारिता मंत्रालय क्यों जरूरी था?
  • सहकारिता आंदोलन क्या है?
  • सहकारी आन्दोलन की विशेषताएँ
  • सहकारिता समितियों के लिए केंद्र सरकार की योजनायें
  • सहकारिता से सम्बंधित प्रश्न -उत्तर

सहकारिता क्या है?

  • सहकारिता दो शब्दों ‘सह+कारिता’ के मेल से बना है। जिसमें सह से आशय हैं’ मिल जुलकर या साथ-साथ तथा कारिता का अर्थ हैं’ कार्य करना’। अतः किसी विशेष उद्देश्य के लिए मिल-जुलकर कार्य करने को सहकारिता कहा जाता है।
  • “सहकारिता संगठन द्वारा आत्म-सहायता को प्रभावपूर्ण बनाने की विधि है।”सर होरेस एल
  • “सहकारिता संगठन का वह स्वरूप है जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छानुसार समानता के आधार पर मनुष्य की हैसियत से अपने आर्थिक हितों में वृद्धि हेतु संगठित होते हैं।”- कैल्वर्ट
  • राबर्ट ओवेन (1771-1858) को सहकारी आंदोलन का जनक माना जाता है। सहकारिता का प्रचलित शाब्दिक मतलब को-ऑपरेटिव समितियों से होता है।
  • साल 1844 में उत्तरी इंग्लैंड के रोशडेल शहर में सूती वस्त्रों  की मिल में कार्यरत 28 कारीगरों के एक समूह ने आधुनिक सहकारिता का पहला व्यवसाय स्थापित  किया जिसे रोशडेल पायनियर्स सोसायटी कहा जाता है।
  • भारत में सहकारिता की शुरुआत  सन्‌ 1904 में अंग्रेजों ने कानून बनाकर की थी। कानून बनने के बाद अनेक पंजीकृत संस्थाएं इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए आगे आने लगी।
  • एक अनुमान के अनुसार वर्तमान मे  देशभर में करीब 5 लाख से अधिक सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जिनमें करोड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
  • ये समितियां उत्पादन, विपणन, कृषि, दुग्ध, खाद, बैंकिंग आदि से सम्बंधित हैं। लेकिन कृषि, दुग्ध और बैंकिंग मे इनका योगदान सर्वाधिक है। अमूल ब्रांड, सहकारी बैंक आदि इसके सटीक उदाहरण हैं।

सहकारिता मंत्रालय क्या है?

  • ज्ञात हो, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान अलग सहकारी मंत्रालय के गठन की घोषणा पहले ही कर दी थी।
  • अभी तक सहकारिता से सम्बंधित विषयों को कृषि मंत्रालय के अंतगर्त हल किया जाता था। अब इसके लिए एक नया मंत्रालय बनाया गया है और इसकी जरूरतों को देखते हुए इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नियंत्रण मे दिया गया है।
  • सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी बयान के अनुसार यह मंत्रालय सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करेगा. यह एक मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान करेगा.’  

क्या होगा सहकारिता मंत्रालय का उद्देश्य एवं कार्य ?

  • यह सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक पहुंचने वाले एक सच्चे जनभागीदारी आधारित आंदोलन को मजबूत बनाने में भी सहायता प्रदान करेगा।
  • सरकार के अनुसार, यह मंत्रालय सहकारिता को गहराई प्रदान करते हुए उसे असल में लोक आधारित आंदोलन बनाएगा और उसकी पहुंच जमीनी स्तर तक ले जाने की कोशिश करेगा।
  • यह मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान करेगा।
  • यह मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए कारोबार में सुगमता’ के लिए प्रक्रियाओं को कारगर बनाने और बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) के विकास को सक्षम बनाने की दिशा में कार्य करेगा।
  • पीआईबी की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, ”अलग सहकारिता मंत्रालय बनने से दूर-दराज़ के इलाक़ों में पहुँचने में मदद मिलेगी।
  • हमारे देश में सहकारिता आधारित आर्थिक विकास बहुत प्रासंगिक है।  इस मॉडल में हर व्यक्ति ज़िम्मेदारी और उत्साह के साथ काम करता है. यह मंत्रालय कारोबार को सुलभ बनाने को लेकर काम करेगा”।

सहकारिता मंत्रालय क्यों जरूरी था?

महाराष्ट्र स्टेट फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर मिल्स के पूर्व प्रबंध निदेशक संजीव बाबर  एवं  ‘बैकुंठ मेहता सहकारी प्रबंधन संस्थान के सर्वे के अनुसार – भारत मे सहकारी समितियां अच्छे से अपना कार्य कर रही है तथा भली-भाँति फल-फूल रही हैं , किन्तु ऐसा बेहद काम राज्यों मे हो रहा है गुजरात, महाराष्ट्र, केरल आदि इसके अच्छे उदाहरण है। इस सहकारिता के प्रभाव को राष्ट्र व्यापी बनाने हेतु एक केंद्रीय नेतृत्व की आवश्यकता थी। सहकारिता मंत्रालय इसी आवश्यकता की पूर्ति करता है।

सहकारिता आंदोलन क्या है?

  • सहकारिता एक सामाजिक-आर्थिक आंदोलन है, जो परस्पर सहयोग और सामंजस्य पर आधारित होता है। आर्थिक आंदोलन को गति प्रदान करने मे सहकारिता आंदोलन का विशेष प्रयास रहा है।
  • भारत मे सहकारिता आंदोलन का उदभव महाराष्ट्र के अहमद नगर मे किसानो द्वारा साहूकारों के विरोध मे किये गए आंदोलन को माना जाता है। साहूकारों द्वारा किसानो से जबरन अधिक ब्याज लिया जा रहा था।
  • साल 1904 मे सहकारी साख समिति अधिनियम, 1904 के तहत सहकारिता को एक निश्चित संरचना और आकार प्रदान किया गया।
  • देश की आजादी के बाद सहकारिता को पंचवर्षीय योजनाओं मे शामिल किया गया। इसके पश्चात् राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम’ (NCDC) की स्थापना की गयी।
  • वर्तमान मे देश मे करीब 1,94,195 कोऑपरेटिव डेयरी सोसाइटी और 330 शुगर मिल एसोसिएशन हैं. इसके अलावा हर राज्य में कई सहकारी बैंक हैं।
  • इस आंदोलन की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण अमूल ब्रैंड है जो कि गुजरात की एक सहकारी संस्था के द्वारा चलाया जाता है। अमूल का मुख्यालय गुजरात के आंनद मे है। भारत मे श्वेत क्रांति का उत्प्रेरक अमूल को माना जाता है।

सहकारी आन्दोलन की विशेषताएँ

  1. यह सामूहिक हितों के लिये बनाया गया व्यक्तियों का एक संघ है।
  2. सहकारी संगठन की सदस्यता स्वैच्छिक होती है। कोई व्यक्ति जब चाहे इसका सदस्य बन सकता है तथा पूर्व सूचना देकर सदस्यता समाप्त कर सकता।
  3. इसकी प्रबन्ध व्यवस्था लोकतान्त्रिक सिद्धान्तों के आधार पर की जाती है।
  4. सहकारी संगठन एक धार्मिक एवं परोपकारी संगठन न होकरआर्थिक संगठन होता है।
  5. सहकारी संगठन लाभ की जगह सेवा को अधिक महत्व देता है।
  6. यह नैतिक उत्थान, ईमानदारी तथा आत्म सहायता पर आधारित सामाजिक एवं आर्थिक आन्दोलन है।
  7. इसमें सामाजिक सम्पत्ति का बँटवारा एक निश्चित न्यायपूर्ण आधार पर आधारित होता है।
  8. यह पारस्परिक सहायता द्वारा आत्म सहायता के सिद्धान्त पर आधारित है।
  9. इसमें पूंजीवाद एवं साम्यवाद दोनों के गुण पाये जाते हैं।
  10. यह लोकतन्त्र पर आधारित एक स्वत: संचालित (Autonomous) संस्था है जो स्वतन्त्रतापूर्वक अपनी प्रबन्ध व्यवस्था करती है।
  11. यह आन्दोलन व्यक्ति के साथ-साथ समुदाय के सर्वागीण विकास लिये प्रयास करता है।
  12. ‘काम करो’ इस आन्दोलन का नारा है।
  13. सहकारिता आंदोलन संघात्मक पद्धति पर आधारित है। इसमें विभिन्न इकाइयां मिलकर अपना एक संघ बनाकर अपने क्रियाकलाप संचालित करती है।

सहकारिता समितियों के लिए केंद्र सरकार की योजनायें

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

  • इस योजना को 13  जनवरी 2016 को लागू किया गया था। किसानो को नवाचार तथा आधुनिक तौर-तरीकों के प्रति प्रोत्साहित करना इस योजना का उद्देश्य था।
  • इस योजना के तहत फसल की बुआई , कटाई तथा भण्डारण मे मौसम सम्बन्धी गतिविधियों , प्राकृतिक आपदाओं , कीटो , बीमारियों आदि से पहुंचे नुकसान को बीमा के अंदर कवर किया गया है।

कृषि डाक प्रसार सेवा

  • यह योजना चिन्हित किसानो को उन्नत एवं आधुनिक तकनीक के बीजों को भारतीय डाक सेवा के माध्यम से पहुंचाने के लिए शुरू की गयी है।
  • वर्तमान मे यह योजना देश के 14 राज्यों के 100 जिलों मे संचालित की जा रही है।

किसान कॉल सेंटर योजना

  • किसानो के कृषि सम्बंधित समस्याओं के समाधान हेतु 21 जनवरी 2014 को किसान कॉल सेंटर योजना प्रारंभ की गयी है। ये कॉल सेंटर किसानो को स्थानीय भाषा मे सलाह प्रदान करते हैं।
  • देश भर मे ऐसे 14 कॉल सेंटर खोले गए हैं तथा कृषि सम्बंधित मदद  के लिए टोल फ्री नंबर 18001801551 जारी किया गया है।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन

  • केंद्र सरकार ने 28 जुलाई 2014 को देशी गया के संरक्षण तथा उनकी नस्लों के विकास को वैज्ञानिक तरीके से प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की है।

सहकारिता से सम्बंधित प्रश्न -उत्तर

प्रश्न- सहकारिता की उत्पत्ति किस देश मे हुई?

उत्तर – ब्रिटेन

प्रश्न  -भारत में सहकारिता आंदोलन की शुरुआत कब हुई?

उत्तर -वर्ष 1904 में सहकारी साख समिति अधिनियम से

प्रश्न- भारत में सहकारी आंदोलन का जनक किसे माना जाता है?

उत्तर – एफ. निकालसन

प्रश्न- भारत में सर्वाधिक शहरी सहकारी बैंक किस राज्य में स्थित हैं?

उत्तर – महाराष्ट्र

प्रश्न-  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पर्यवेक्षण का प्राधिकार किसके पास है?

उत्तर- नाबार्ड

चलते -चलते

दोस्तों, इस लेख मे हमने सहकारिता मंत्रालय और उससे सम्बंधित तथ्यों की जरुरी उपलब्ध जानकारी आप के साथ साझा की है। चूँकि यह एक नया मंत्रालय बना है , तो इससे सम्बंधित सभी जानकारियां अभी उपलब्ध नही हैं। हम कोशिश करेंगे की हमारे आने वाले लेखों मे उस जानकारी को शामिल किया जाये। इसी के साथ हम अपने इस लेख को यहीं समाप्त करते हैं। धन्यवाद !

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