Ratle Hydroelectric Project से यूं आत्मनिर्भर बनेगा जम्मू-कश्मीर

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Ratle Hydroelectric Project


Ratle Hydroelectric Project में 5281.94 रुपये के निवेश को बीते 20 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की तरफ से मंजूरी प्रदान की गई है। केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर यह 850 मेगावाट की रतले पनबिजली परियोजना स्थित है। इस लेख में हम आपको रतले पनबिजली परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • Ratle Hydroelectric Project के बारे में
  • रतले पनबिजली परियोजना से मिलने वाले लाभ
  • चिनाब बेसिन में मौजूद अन्य परियोजनाओं के बारे में

Ratle Hydroelectric Project के बारे में

  • वर्ष 2013 के जून में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने रतले पनबिजली परियोजना के बांध की आधारशिला रखी थी। इस बांध की लंबाई 133 मीटर है। यहां एक-दूसरे से सटे हुए दो बिजली स्टेशन मौजूद हैं।
  • Ratle Hydroelectric Project capacity के हिसाब से भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इन दोनों पावर स्टेशनों की स्थापित क्षमता 850 मेगावाट की होने वाली है।
  • पांच वर्ष की अवधि में इसे शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एक नई संयुक्त उद्यम कंपनी इसमें निवेश कर रही है, जिसमें कि 51 फ़ीसदी हिस्सेदारी राष्ट्रीय जल विद्युत निगम (NHPC) की है, जबकि 49% हिस्सेदारी जम्मू-कश्मीर राज्य विद्युत विकास निगम लिमिटेड (JKHPDC) की है।
  • इस परियोजना को लेकर पाकिस्तान की तरफ से आपत्ति जताई जाती रही है। पाकिस्तान का यह आरोप है कि सिंधु जल संधि, 1960 का यह परियोजना उल्लंघन कर रही है। वर्ष 2013 में ही जब इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी, तभी पाकिस्तानी सरकार ने इस बांध के निर्माण पर आपत्ति जता दी थी और इसके सिंधु जल संधि के अनुरूप नहीं होने का दावा भी किया था।
  • हालांकि, विश्व बैंक की तरफ से वर्ष 2017 के अगस्त में बांध बनाने की अनुमति भारत को प्रदान कर दी गई थी। विश्व बैंक में पाकिस्तान की तरफ से आपत्ति को उठाया गया था, मगर इसके बाद केंद्र सरकार ने अब इस बांध के निर्माण कार्य को जारी रखने का निर्णय ले लिया है।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की सहायता से बातचीत 9 वर्षों तक चली। इसके बाद सिंधु जल संधि पर वर्ष 1960 में दोनों देशों की ओर से हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि पर एक हस्ताक्षरकर्ता विश्व बैंक भी है।
  • इस संधि के मुताबिक जहां पूर्व की नदियों के पानी पर भारत का पूरा नियंत्रण है, वहीं पश्चिमी नदियों के पानी को बिना रुके इस्तेमाल में लाने का अधिकार पाकिस्तान के पास है। व्यास, सतलुज और रावी पूर्वी नदियों में शामिल हैं, जबकि झेलम, चिनाब और सिंधु पश्चिमी नदियों का हिस्सा हैं।

रतले पनबिजली परियोजना से मिलने वाले लाभ

Ratle Hydroelectric Plant UPSC के दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण टॉपिक है, जिसके लाभ को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं। एक नजर डालते हैं इस परियोजना से मिलने वाले फायदों पर:

  • जम्मू कश्मीर को जब केंद्रशासित प्रदेश नहीं बनाया गया था, तभी सी यहां भारत सरकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को गति प्रदान करने पर विचार कर रही थी। यह परियोजना भी इसी पृष्ठभूमि का हिस्सा रही है।
  • इस परियोजना के निर्माण को यदि भारत सरकार बहुत जल्द पूरा करवा लेती है, तो सिंधु जल संधि के तहत भारत के हिस्से में जितना भी पानी आ रहा है, उसका पूरी तरह से देश उपयोग कर पाएगा। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के संदर्भ में भी यह परियोजना रणनीतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
  • जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश तो बना दिया गया है, लेकिन अब इसका समग्र रूप से सामाजिक और आर्थिक विकास भी होना है, जिसमें कि यह परियोजना खास भूमिका निभा सकती है। परियोजना के निर्माण से जुड़ी गतिविधियां जब शुरू हो जाएंगी, तो इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 4000 लोगों को रोजगार भी मिल पाएगा।
  • यही नहीं, जम्मू कश्मीर के लोगों को इस परियोजना के तैयार हो जाने से सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली भी मिल पाएगी। इस परियोजना के शुरू हो जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों को मिलने वाली मुफ्त बिजली पहले वर्ष 1 प्रतिशत होगी, जबकि हर साल यह 1 प्रतिशत बढ़ते हुए 12 साल में 12 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। कुल मिलाकर इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर को 5 हजार 289 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली मिलेगी।
  • Ratle Hydroelectric Project से जो बिजली पैदा होगी, इससे ग्रिड को संतुलन मिल पाएगा। ग्रिड का संतुलन यदि ठीक तरीके से बनाना है, तो ऐसे में जो वर्तमान में बिजली उत्पादन का बुनियादी ढांचा है, उसे सबसे पहले विकसित करना पड़ेगा।
  • बिजली परियोजना यदि बनकर तैयार हो जाती है तो इसका जीवन चक्र 40 साल का होगा। इससे जम्मू-कश्मीर को 9581 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। इतना ही नहीं, इस केंद्रशासित प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति भी अब इससे पहले से बेहतर रहेगी।

चिनाब बेसिन में मौजूद अन्य परियोजनाओं के बारे में

हिमालय के बारालाचा-ला दर्रे के पास से निकलकर चिनाब नदी भारत और पाकिस्तान से होकर बहने वाली एक प्रमुख नदी है। साथ ही पंजाब क्षेत्र की पांच प्रमुख नदियों में भी इसकी गिनती होती है।

  • चिनाब बेसिन में दुलहस्ती पावर स्टेशन स्थित है, जो कि 390 मेगावाट क्षमता का है। यह एक रन ऑफ द रिवर स्कीम है। चिनाब नदी के पानी से यहां जलविद्युत का उत्पादन होता है।
  • जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में सलाल पावर स्टेशन स्थित है, जहां चिनाब नदी के पानी से जलविद्युत पैदा होती है और इसकी स्थापित क्षमता 690 मेगावाट की है।
  • वहीं, upcoming hydropower projects in Jammu and Kashmir में कीरु पनबिजली परियोजना शामिल है, जो किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित है और जिसकी कुल क्षमता 624 मेगावाट की है।
  • इसके अलावा चिनाब की सहायक नदी मारुसुदर पर भी जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में पकल डल पनबिजली परियोजना प्रस्तावित है। यह एक जलाशय पर आधरित योजना है।

चलते-चलते

Ratle Hydroelectric Project में निवेश को मंजूरी देने का केंद्रीय मंत्रिमंडल का निर्णय बेहद सराहनीय है। वह इसलिए कि अब जब जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश बन चुका है, तो इसके सार्वभौमिक विकास के लिए इस तरह की परियोजनाओं को आगे बढ़ाना बहुत ही महत्वपूर्ण है। रतले पनबिजली परियोजना के अस्तित्व में आ जाने के बाद बिजली के क्षेत्र में यह केंद्रशासित प्रदेश आत्मनिर्भर बन पाएगा और जनता इससे सीधे तौर पर लाभान्वित होगी।

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