शून्य अभियान क्या है ? | What is Shoonya Campaign?

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Shoonya Campaign
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भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर और इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने के लिए , नीति आयोग ने आरएमआई और आरएमआई इंडिया के सहयोग से शून्य अभियान (Shoonya campaign) नाम से एक पहल की शुरुआत की है। यह अभियान भारत सरकार के 2025  तक 20% इलेक्ट्रिक वाहनों के लक्ष्य को सहयोग करता है। एक सर्वे के अनुसार देश में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण औसतन व्यक्तियों की आयु में 9 साल की कमी आ रही है। इन दोनों बातों के मद्देनजर नीति आयोग का शून्य अभियान बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है। आज के इस लेख में हम शून्य अभियान (Shoonya campaign) से जुड़ी सभी बातों की जानकारी प्राप्त करेंगे।

शून्य अभियान | Shoonya Campaign

  • शून्य अभियान की शुरुआत 15 सितम्बर 2021 को की गयी है। यह अभियान नीति आयोग,आरएमआई और आरएमआई इंडिया का संयुक्त प्रयास है।
  • यह पहल शून्य-प्रदूषण वाले डिलीवरी वाहनों को बढ़ावा देने वाली पहल है। जिसके तहत नीति आयोग ने देश के प्रमुख मैन्यूफैक्चरर्स, ई-कॉमर्स कंपनियों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को एक साझा मंच प्रदान किया है, जिससे ये सब मिलकर देश में फाइनल माइल डिलीवरी के विद्युतीकरण की दिशा में प्रयास कर सकें।
  • नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में आयोजित एक उद्घाटन बैठक में टाटा मोटर्स, महिंद्रा इलेक्ट्रिक, अशोक लीलैंड, सन मोबिलिटी, ज़ोमैटो, लाइटनिंग लॉजिस्टिक्स, ब्लूडार्ट, हीरो इलेक्ट्रिक, बिग बास्केट और स्विगी सहित लगभग 30 कंपनियों ने भाग लिया था।
  • नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार ,शून्य अभियान के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी, पर्यावरण संबंधी और आर्थिक लाभों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देंगे”
  • यह अभियान एक ऑनलाइन ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रिक वाहनों के संदर्भ में विद्युतीकृत किलोमीटर, कार्बन संबंधी बचत, मानक प्रदूषक संबंधी बचत और स्वच्छ डिलीवरी वाहनों से होने वाले अन्य लाभों से जुड़े आंकड़ों के माध्यम से इस अभियान के प्रभावों को साझा करेगा।

शून्य अभियान का उद्देश्य | Objectives of Shoonya Campaign

  • शून्य अभियान संस्कृत के शून्य शब्द से प्रेरित है, शून्य अभियान का उद्देश्य इलेक्ट्रिक डिलीवरी के लिए एक विशेष लेबल बनाकर अंतिम-मील डिलीवरी के विद्युतीकरण में तेजी लाना है।
  • इस अभियान का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में डिलीवरी के मामले में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने में तेजी लाना और शून्य-प्रदूषण वाली डिलीवरी से होने वाले लाभों के बारे में उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता पैदा करना है।

शून्य अभियान का महत्व | Importance of Shoonya Campaign

  • भारत के समान अति जनसंख्या वाले तथा विकासशील देशों को अतिशीध्र मालवानो वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन की बहुत ज़रूरत है। देश में वर्तमान में वायु प्रदूषण में 10% कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा इन्ही के द्वारा छोड़ी जाती है। जिसका योगदान 2030 मे 114% होने की सम्भावना है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों द्वारा वायु प्रदूषण की दर शून्य होती है। अतः देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर मे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर वायु प्रदूषण मे काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है।
  • देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति, विदेशों पर निर्भरता तथा ख़त्म होते खनिजों की समस्या के निदान के लिए नीति आयोग का यह कदम एक क्रांतिकारी पहल साबित हो सकता है।

शून्य की कहानी | Story of Shoonya

  • शून्य की खोज भारत में हुई थी, शून्य भारत में केवल शून्य होकर गणितीय अवधारणा तक सीमित नहीं है। यह अनंत संभावनाओं की बात करता है। किसी भी घटना का प्रारम्भ बिंदु शून्य और अंतिम बिंदु भी शून्य ही है, चीज़े शून्य से शुरू होकर शून्य में ही समा जाती हैं। शून्य सहित विश्व को एक व्यापक संख्या प्रणाली देने का श्रेय भारत को जाता है।
  • शून्य की शुरुआत भारत में हुई है लेकिन इसमें दुनिया को बदलने की क्षमता है। उपभोक्ताओं और उद्योग को सशक्त बनाकर, यह सभी देशों के लिए संभावनाओं की एक नई दुनिया और बेहतर भविष्य को खोलता है।

नीति आयोग | NITI Aayog

  • नीति आयोग यानि राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (National Institution for Transforming India) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गयी थी।
  • यह संस्थान सरकार के थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है तथा उसे निर्देशात्‍मक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान करता है।
  • नीति आयोग, भारत सरकार के लिए कार्यनीतिक और दीर्घकालिक नीतियों और कार्यक्रमों को अभिकल्पित करने के साथ-साथ केंद्र और राज्यों को प्रासंगिक तकनीकी सलाह भी प्रदान करता है।
  • यह संस्थान राष्ट्रीय उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करता है।
  • नीति आयोग एक बहू-सदस्यीय संस्था है। जिसकी संरचना निम्न प्रकार से है।
  • अध्यक्ष- भारत के प्रधानमंत्री
  • उपाध्यक्ष- नीति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
  • संचालन परिषद – राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्रशासित प्रदेशों (जिन केन्द्रशासित प्रदेशो में विधानसभा है वहां के मुख्यमंत्री) के उपराज्यपाल शामिल होंगे।
  • क्षेत्रीय परिषद- विशिष्ट मुद्दों और ऐसे आकस्मिक मामले, जिनका संबंध एक से अधिक राज्य या क्षेत्र से हो, को देखने के लिए क्षेत्रीय परिषद गठित की जाएंगी।
  • पूर्णकालिक सदस्य- अधिकतम 4 सदस्यों का चयन पूर्णकालिक होगा जिनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाएगी।
  • अंशकालिक सदस्य- देश के अग्रणीय विश्वविद्यालय शोध संस्थानों और संबंधित संस्थानों से 2 व्यक्तियों को अधिकतम दो अंशकालिक सदस्य बनाया जाता है।
  • पदेन सदस्य- केंद्रीय मंत्रिमंडल से अधिकतम 4 सदस्यों को प्रधानमंत्री द्वारा नीति आयोग का पदेन सदस्य चुना जाता है।
  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी या सीईओ- प्रधानमंत्री के सचिव स्तर का अधिकारी नीति आयोग का सीईओ नियुक्त किया जाता है।
  • विशेष आमंत्रित- प्रधानमंत्री विभिन्न क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को नीति आयोग के विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप मे मनोनीत करते हैं।
  • वर्तमान मे नीति आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, सीईओ श्री अमिताभ कांत हैं।
  • पूर्णकालिक सदस्य – डॉ विनोद पॉल, लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, विजय कुमार सारस्वत, पूर्व डीआरडीओ सचिव, रमेश चंद, कृषि विशेषज्ञ।
  • पदेन सदस्य- राजनाथ सिंह, केंद्रीय रक्षा मंत्री, निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री, अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री तथा नरेन्द्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि मंत्री।
  • विशेष आमंत्रित सदस्य– नितिन गडकरी, थावर चंद गहलोत, पियूष गोयल और राव इंद्रजीत सिंह।
  • 7 जून 2018 को प्रधानमंत्री ने पदेन सदस्यों और विशेष आमंत्रित सदस्यों को शामिल करने के लिए नीति आयोग के पुनर्गठन को मंजूरी दी थी।

रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट | Rocky Mountain Institute (RMI)

  • रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) एक गैर-लाभकारी संगठन है जो वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को जीवाश्म ईंधन से दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बाजार-आधारित समाधानों का उपयोग करता है।
  • यह गैर-पक्षपाती और स्वतंत्र हैं, और अपनी ऊर्जा प्रणाली से जुड़ी हर चीज को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा तकनीक के साथ मिलकर काम करता है।
  • 1982 में एमोरी लोविंस, आरएमआई के मानद चेयरमैन द्वारा इसकी स्थापना की गयी थी। वर्तमान मे इसके चेयरमैन जूल्स कॉर्टेनहॉर्स्ट हैं। इसका मुख्यालय कोलोराडो, संयुक्त राज्य अमेरिका मे स्थित है।

चलते चलते

भविष्य की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति हेतु शून्य अभियान जैसे कदम वैश्विक स्तर पर चलाने की आवश्यकता है। परंपरागत ईंधनों के दोहन से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की मात्रा बढ़ गयी है। जिसका परिणाम ग्लोबल वार्मिंग के रूप मे सामने आ रहा है। पृथ्वी के तापमान मे वृद्धि से कई इलाकों मे सूखे के हालत, अतिवृष्टि, चक्रवात, समुद्र का जल स्तर बढ़ना, ग्लेशियरों का पिघलना जैसे हानिकारक परिणाम सामने आ रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग का उत्तरदायी कोई एक देश नहीं है बल्कि यह सम्पूर्ण विश्व का सामूहिक परिणाम है। तो इसका समाधान और निदान भी सभी को सामूहिक प्रयासों से ही करना होगा। रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (RMI) एक वैश्विक संस्था है और ये इस  कार्य को विश्व के सभी देशों के साथ मिलकर कर रही है। हम आशा करते हैं कि सम्पूर्ण विश्व मे इनके प्रयास रंग लाये और हम ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या से बाहर निकल आये। इसी आशा के साथ हम आज का अपना यह लेख यहीं समाप्त करते हैं। जय हिन्द!

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