International Energy Agency के साथ भारत का समझौता

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International Energy Agency and India signs agreement

International Energy Agency यानी कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ भारत ने हाल ही में एक समझौता किया है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है। इसमें स्थिरता कायम करना है। साथ ही ऊर्जा सहयोग को भी और मजबूत बनाना है। यही वजह है कि भारत ने IEA के साथ रणनीतिक साझेदारी समझौते को अंजाम दिया है। विशेष तौर पर ऊर्जा के क्षेत्र में रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना ही इस समझौते का उद्देश्य है। इस लेख में हम आपको इस समझौते के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • International Energy Agency के बारे में
  • International Energy Agency के साथ समझौते से लाभ
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण कार्यक्रम के बारे में

International Energy Agency के बारे में

  • वर्तमान परिदृश्य में जब ऊर्जा संकट गंभीर रूप अख्तियार करने लगा है तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी विशेष महत्व रखता है। यह वास्तव में एक स्वायत्त अंतरसरकारी संगठन है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी को वर्ष 1974 में स्थापित किया गया था। दरअसल वर्ष 1973 के दौरान बहुत बड़ा तेल संकट पैदा हो गया था। इसी के बाद इसकी स्थापना की गई थी।
  • वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का क्या रुझान है यानी कि ऊर्जा को लेकर दुनिया भर में क्या स्थिति है, इस पर IEA नजर रखता है। यही नहीं, यह इन सबका सही तरीके से विश्लेषण भी करके निष्कर्ष प्रदान करता है। IEA ध्वनि ऊर्जा नीति को भी प्रोत्साहित करने के काम में जुटा हुआ है।
  • इनके अलावा अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी सहयोग को भी यह बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहा है। दुनियाभर में जितने भी देश अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य हैं, इन सभी देशों को स्वच्छ ऊर्जा, विश्वसनीय ऊर्जा और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
  • मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी चार लक्ष्यों के साथ काम कर रही है। इनमें से सबसे पहला ऊर्जा सुरक्षा है यानी कि दुनिया भर में ऊर्जा संरक्षण को प्रोत्साहित करने की दिशा में एजेंसी काम कर रही है। इसके अलावा आर्थिक विकास भी इसके लक्ष्य में शामिल है।
  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का एक और लक्ष्य पर्यावरण के संबंध में दुनिया भर में जागरूकता पैदा करना है, ताकि पर्यावरण संकट से निपटा जा सके। इन सबके अलावा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का एक चौथा लक्ष्य पूरी दुनिया को सहयोगी के तौर पर शामिल कर लेना है, ताकि उर्जा का संरक्षण अधिक से अधिक मात्रा में हो सके।
  • फ्रांस की राजधानी पेरिस में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का मुख्यालय स्थित है, जिसे कि इसके सचिवालय के नाम से भी जानते हैं। एजेंसी में मुख्य निर्णय लेने वाले निकाय को शासी बोर्ड कहा जाता है।
  • यदि इसके गठन की बात करें तो इसके जितने भी सदस्य देश हैं, इन सभी देशों के या तो उर्जा मंत्री या फिर वरिष्ठ प्रतिनिधि मिलकर इसका गठन करते हैं। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों की संख्या 30 है।
  • जो भी देश एजेंसी का सदस्य बनने के उम्मीदवार होते हैं, उनके लिए आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) का सदस्य होना अनिवार्य होता है। OECD की स्थापना 1960 में हुई थी और वर्तमान में 35 देश इसके सदस्य हैं। आधिकारिक तौर पर यह संयुक्त राष्ट्र का प्रेक्षक भी है। हालांकि, OECD के सभी सदस्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य नहीं बने हैं।

International Energy Agency के साथ समझौते से लाभ

  • अब जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ समझौता कर लिया है तो इससे ऊर्जा को लेकर बृहद स्तर पर जानकारियों का आदान-प्रदान हो पाएगा। यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का पूर्णकालिक सदस्य बनने का जो प्रयास भारत की तरफ से इस वक्त चल रहा है, उस दिशा में भी भारत का यह कदम बहुत ही मददगार साबित होने वाला है।
  • इस समझौते का एक बहुत बड़ा लाभ यह भी होने वाला है कि इससे न केवल आपसी विश्वास पहले से कहीं मजबूत होगा, बल्कि पारस्परिक सहयोग भी अब तेजी से बढ़ेगा। इन सबके अलावा वैश्विक ऊर्जा की सुरक्षा और इसकी स्थिरता भी सुनिश्चित हो पाएगी।
  • International Energy Agency के साथ यह समझौता कर लेने के बाद भारत अब इसका एक रणनीतिक भागीदार हो गया है। ऐसे में धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से न केवल इससे मिलने वाले लाभ में बढ़ोतरी होने वाली है, बल्कि इसके प्रति भारत की जिम्मेवारियां भी बढ़ने जा रही हैं।
  • यह समझौता हो जाने के बाद ऊर्जा क्षेत्र का जो वर्तमान स्वरूप है, उसमें सुधार तो आएगा ही, साथ में स्वच्छ ऊर्जा के प्रसार के लिए कार्यक्रमों का भी अब तेजी से निर्माण हो पाएगा। ऊर्जा सुरक्षा पहले से अब ज्यादा मजबूती से सुनिश्चित हो पाएगी। स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच हर किसी की होगी।
  • समझौता होने से ऊर्जा के स्थाई स्रोत उपलब्ध हो पाएंगे। उर्जा को लेकर भारत की क्षमता में पहले से इजाफा होगा। पेट्रोलियम भंडारण की क्षमता में भी अब बढ़ोतरी होगी। साथ ही भारत में जो गैस पर आधारित अर्थव्यवस्था है, उसमें भी विस्तार देखने के लिए मिलेगा।
  • भारत और IEA के बीच जो यह समझौता हुआ है, इसका क्रियान्वयन IEA सचिवालय की तरफ से होना है।

स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण कार्यक्रम के बारे में

  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की तरफ से Clean Energy Transitions Programme (CETP) को वर्ष 2017 के नवंबर में शुरू किया गया था। इसके जरिए दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। दुनिया भर में जितने भी देशों की सरकारें सतत ऊर्जा उत्पादन और इसके इस्तेमाल की दिशा में काम करना चाहती हैं, इन सभी को स्वतंत्र तरीके से अत्याधुनिक समर्थन प्रदान करने की दिशा में स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण कार्यक्रम काम कर रहा है।
  • भारत, इंडोनेशिया, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और मैक्सिको जैसे देश इसके प्राथमिकता वाले देशों में शामिल हैं। इन सबके अलावा लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में भी यह कार्यक्रम तेजी से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत तकनीकी सहयोग का आदान-प्रदान हो रहा है। प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रणनीतिक संवाद हो रहे हैं। विश्लेषणात्मक कार्य चल रहे हैं और क्षमता निर्माण पर भी बल दिया जा रहा है।

चलते-चलते

International Energy Agency के साथ भारत का समझौता निश्चित तौर पर दुनिया भर में ऊर्जा संरक्षण एवं भारत की ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। जरूरत बस पूरी गंभीरता से इसके क्रियान्वयन की है।

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