आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv) – भारत का पहला परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज

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भारत ने समुद्र में ऐतिहासिक उपलब्धी हासिल करते हुए, देश का पहला परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज आईएनएस ध्रुव विशाखापट्टनम में नौसेना को समर्पित किया है। इस उप्लब्धि ने भारत को विश्व की उन पांच महाशक्तियों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है जिनके पास यह क्षमता है। राष्ट्र की इस उप्लब्धि के गवाह बने देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (आईएनएस) अजित डोभाल, जिन्होंने 10 सितम्बर 2021 को आईएनएस ध्रुव देश को समर्पित किया है। आज के इस अंक में हम देश के पहले परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज आईएनएस ध्रुव के बारे मे ही बात करने वाले हैं। तो चलिए दोस्तों शुरू करते है आज का यह लेख।

आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv)

  • आईएनएस ध्रुव भारत का पहला सैटेलाइट और परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग जहाज है। यह देश का स्वदेशी जहाज है इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) द्वारा विकसित किया गया है।
  • आईएनएस ध्रुव का संचालन संयुक्त रूप से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन और भारतीय नौसेना द्वारा किया जाएगा।
  • आईएनएस ध्रुव सामरिक बल कमान (एसएफसी) के अधीन होगा और भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसेना कमान में स्थित होगा।
  • यह एक मिसाइल रेंज इंस्ट्रूमेंटेशन जहाज है जो इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस भी इकट्ठा कर सकता है। शिपयार्ड द्वारा इसके निर्माण का कार्य 30 जून 2014 को शुरू कर दिया गया था।
  • इसका निर्माण एवं परीक्षण कार्य बहुत ही गोपनीय ढंग से किया गया था। इसका निर्माण कार्य साल 2018 में पूर्ण कर लिया गया था तथा साल 2020 में नौसेना को परीक्षण के लिए दे दिया गया था।
  • इसे भारत के विक सैंडविक डिजाइन इंडिया द्वारा डिजाइन किया गया है। यह सर्विलांस ऑपरेशन के लिए आवश्यक 14 मेगावाट बिजली तक का निर्माण खुद कर सकता है।
  • आईएनएस ध्रुव की निर्माण लागत लगभग 1500 करोड़ रूपये के आसपास है। इसका विस्थापन 10,000 टन से अधिक, लंबाई 175 मीटर, बीम 22 मीटर, ड्राफ्ट 6 मीटर है तथा यह 21 समुद्री मील की गति प्राप्त कर सकता है।
  • इसे भारत के रणनीतिक हथियारों और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों की सहायता के लिए मिसाइल और उपग्रहों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
  • जहाज का उद्देश्य भारत के सामरिक हथियारों के विकास और भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम का समर्थन करना है। जहाज सामरिक मिसाइलों और उपग्रहों को भी ट्रैक कर सकता है।

आईएनएस ध्रुव की खासियत 

  • आईएनएस ध्रुव की सबसे बड़ी और पहली खासियत यही है की यह पूर्णतः स्वदेशी जहाज है और इस तरह का नेवी शिप दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही है।
  • यह भारत का पहला सैटेलाइट और परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग जहाज है। जो दुश्मन देश की मिसाइलों का पता लगाकर उसकी सूचना सैटेलाइट के माध्यम से विभिन्न सुरक्षा प्रणालियों को दे सकता है।
  • ध्रुव भारत का पहला नौसैनिक पोत है जो लंबी दूरी से भी परमाणु मिसाइलों लगभग 2000 किलोमीटर को ट्रैक करने में सक्षम है, यह भारत की भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति को मजबूत करता है। यहाँ पर चीन के परमाणु बैलिस्टिक युद्ध का खतरा अधिक है।
  • आईएनएस ध्रुव दुश्मन देश की पनडुब्बियों की खोज और स्थिति का पता लगाने के लिए समुद्र तल को ट्रेस करने की क्षमता रखता है।
  • आईएनएस ध्रुव में डीआरडीओ द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक सक्रिय स्कैन एरे रडार (AESA) सिस्टम लगा है, जिसकी मदद से विभिन्न स्पेक्ट्रमों को स्कैन करके भारत पर नजर रखने वाले जासूसी उपग्रहों की निगरानी की जा सकती है और साथ ही में पूरे क्षेत्र में मिसाइल परीक्षणों की निगरानी भी की जा सकती है।
  • इस जहाज को प्राथमिक एक्स बैंड और द्वितीयक एस बैंड सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन एरे (एईएसए) रडार से सुसज्जित किया गया है। इसमें कई मिसाइल ट्रैकिंग एंटेना स्थापित करने के लिए पर्याप्त जगह और एक लम्बे खुले डेक की व्यवस्था की गयी है।
  • आईएनएस ध्रुव, अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं के साथ, भारतीय शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों की ओर जाने वाली दुश्मन की मिसाइलों के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करेगा।

केवल वीटो देशों के पास ही थी यह पावर

हमारे देश के लिए बहुत गर्व की बात है की हमारे देश के होनहार वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने सैटेलाइट और बैलेस्टिक मिसाइल विशेषता वाला बचाव अस्त्र बना दिया है। अभी तक इस तरह का जहाज केवल संयुक्त राष्ट्र संघ में वीटो पावर रखने वाले देशों अमेरिका, रूस, चीन,ब्रिटैन तथा फ्रांस के पास ही है। भारत ने भी अब इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर ली है। यह विशेषज्ञता भारत के संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थायी सदस्यता के दावे को मजबूत करती है।

भारत के लिए आईएनएस ध्रुव का क्या महत्व है?

  • भारत का अपने दो प्रमुख पड़ोसी पाकिस्तान और चीन से हमेशा से भूमिगत सीमा विवाद रहा है। ये दोनों ही देश परमाणु मिसाइल शक्ति सम्पन्न देश हैं। चूँकि वर्तमान में भारत के पास अपने क्षेत्र की मिसाइल हमले से रक्षा के लिए कोई सटीक सिस्टम नहीं है। ऐसे वक्त में किसी मिसाइल के हमले की सूचना आईएनएस ध्रुव द्वारा पहले ही दे दिया जाना कई लोगों की जान बचा सकता है।
  • आईएनएस ध्रुव देश की आत्मनिर्भर भारत मुहीम का समर्थन करता है साथ ही यह भारत का वैश्विक बिरादरी में कद ऊँचा बनाता है, क्योकि अभी तक ऐसी क्षमता केवल विश्व की पांच बड़ी शक्तियों अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटैन तथा फ्रांस के पास ही है।
  • भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और दक्षिणी चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्यीकरण के कारण भारत-प्रशांत क्षेत्र में आईएनएस ध्रुव की तैनाती काफी हद तक भारत के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित बना देगी।
  • आईएनएस ध्रुव भारत-प्रशांत में भारत की समुद्री जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा क्योंकि इसे ऐसे समय में कमीशन किया जा रहा है जब उन्नत पनडुब्बियों के उपयोग के साथ पानी के नीचे युद्ध और निगरानी ड्रोन का युग आ गया है।
  • आईएनएस ध्रुव का निगरानी क्षेत्रफल काफी बढ़ा है। यह भारत की अदन की खाड़ी से लेकर मलक्का, सुंडा, लोम्बोक, ओमबाई और दक्षिण चीन सागर तक निगरानी में मदद करने में सक्षम है।
  • भारत की इलेक्ट्रॉनिक खुफिया जानकारी इकट्ठा करने वाली जासूसी एजेंसी, एनटीआरओ, की एक टुकड़ी की तैनाती आईएनएस ध्रुव में रहेगी जिससे यह इन क्षेत्रों से अधिक डेटा एकत्र करने और खतरों की पहचान करने में सक्षम होगी।
  • आईएनएस ध्रुव के साथ, भारतीय नौसेना अब नौसैनिक युद्ध के सभी तीन आयामों – उप-सतह, सतह और हवाई में अपने सैन्य अभियानों को बेहतर ढंग से क्रियान्वित कर सकती है।

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बैलिस्टिक मिसाइल के खतरे से ऐसे  बचाएगा आईएनएस ध्रुव

आईएनएस ध्रुव देश को बैलेस्टिक मिसाइलों के खतरों से बचाएगा। बैलेस्टिक मिसाइलें एक परवलयाकार मार्ग का अनुसरण करती हुई अपने लक्ष्य तक पहुँचती हैं। तात्पर्य यह है कि, छोड़े जाने के बाद बैलेस्टिक मिसाइल हवा में एक निश्चित अधिकतम ऊंचाई तक जाती हैं उसके बाद वहां से अपने लक्ष्य की तरफ गिरती चली जाती हैं। जैसे ही कोई बैलेस्टिक मिसाइल लांच होगी उसकी स्थिति का पता सैटेलाइट के द्वारा पता लग जायेगा, इसके बाद आईएनएस ध्रुव में लगा राडार उसकी गति, दिशा और दूरी को ट्रेस करके तुरंत सारी जानकारी सैटेलाइट के माध्यम से हमारी सुरक्षा प्रणाली को भेजेगा। इसके पश्चात् सुरक्षा प्रणाली दुश्मन मिसाइल के ख़िलाफ़ हमला बोल कर उसको नाकाम करेंगी। आईएनएस ध्रुव भारत की समुद्री तथा सतही दोनों क्षेत्र की रक्षा में सक्षम है। इसके साथ ही आईएनएस ध्रुव समुद्र क्षेत्र की मैपिंग करके यहाँ दुश्मन देश की पनडुब्बियों की स्थिति का पता लगाने की क्षमता भी रखता है। इस तकनीक से हम अपने देश के नागरिक और सैन्य जहाजों का बचाव कर सकते हैं।

चलते चलते

रक्षा क्षेत्र में भारत के नित-रोज आगे बढ़ते कदम देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाते जा रहे हैं। इसी वर्ष भारत ने आकाश नेक्स्ट जनरेशन मिसाइल का परीक्षण किया जो तेजी से उड़ने वाले ऑब्जेक्ट्स को निशाना बनाने वाली मिसाइल है। इसके बाद DRDO ने एडवांस्ड चेफ टेक्नोलॉजी को प्रस्तुत किया जो विमानों को दुश्मन देश के राडार से बचाने में सक्षम है। हाल ही में, वायु सेना द्वारा पाकिस्तान की सीमा के निकट बाड़मेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लड़ाकू विमानों की सफलतापूर्वक इमरजेंसी लैंडिंग करायी गयी और अब भारत ने  एकदम से आईएनएस ध्रुव का जलावतरण करके रणनैतिक रूप से अपना कद ऊँचा किया है। सबसे बड़ी बात यह है की भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता जा रहा है। इन्ही शुभकामनाओं के साथ कि देश नित-रोज नये आयामों को छूता चला जाये , हम आज का यह लेख यहीं समाप्त करते हैं। जय हिन्द !

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