INS Vela से यूं बढ़ गई भारतीय नौसेना की ताकत

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INS Vela नामक पनडुब्बी के बीते 25 नवंबर को भारतीय नौसेना में शामिल हो जाने के बाद इसकी सामरिक शक्ति में और बढ़ गई है। इसकी विशेषताएं भी कम हैरान करने वाली नहीं हैं।

कलवरी, खंडेरी और करंज पनडुब्बियों के भारतीय नौसेना में प्रोजेक्ट 75 के अंतर्गत शामिल हो जाने के बाद विगत 25 नवंबर को पनडुब्बी INS Vela को भी भारतीय नौसेना में औपचारिक तौर पर शामिल कर लिया गया। इसने भारतीय नौसेना को न केवल पहले से और अधिक ताकतवर बना दिया, बल्कि देश के दुश्मनों की भी इसने नींद उड़ा कर रख दी है। आईएनएस वेला की विशेषताएं इतनी ज्यादा हैं कि इसे जानने के बाद दुश्मनों का थर-थर कांपना लाजमी है। इस लेख में हम आपको आईएनएस वेला के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

क्यों पड़ी INS Vela की जरूरत?

  • भारत आज जिस गति से विकास कर रहा है और दुनियाभर में जितनी तेजी से इसके मान-सम्मान में बढ़ोतरी हो रही है, यह बात भारत के कई पड़ोसी दुश्मनों को रास नहीं आ रही है। यही वजह है कि दुश्मन लगातार समुद्र के रास्ते भारत को नुकसान पहुंचाने की ताक में हैं।
  • ऐसे में पूर्व में चीन के साथ एवं पश्चिम में पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा को और मजबूत बनाने के लिए भारत को समुद्र में और अधिक ताकतवर बनने की जरूरत महसूस की जा रही थी। जिस तरह से चीन और पाकिस्तान से समुद्र में भारत को चुनौतियां मिल रही थीं, वैसे में यह बहुत जरूरी बन गया था कि भारतीय नौसेना अपनी सुरक्षा को न केवल और मजबूत करे, बल्कि वह दुश्मनों से लोहा लेने एवं दुश्मनों के किसी भी हमले को नेस्तनाबूद करने के लिए पहले से भी ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार रहे।
  • यही वजह रही है कि स्कॉर्पियन श्रेणी की नई पनडुब्बी INS Vela को भारतीय नौसेना में कमीशन कर लिया गया है। आईएनएस वेला के भारतीय नौसेना में शामिल हो जाने के बाद भारत की समुद्री सीमा की सुरक्षा पहले से और मजबूत हो गई है। साथ ही भारत के दुश्मनों के बीच भी एक मजबूत संदेश गया है कि यदि वे समुद्र के रास्ते भारत को किसी भी तरीके से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें इसका मुंहतोड़ जवाब भी मिलेगा।

INS Vela  से संबंधित जानने योग्य तथ्य

  • एक भारतीय होने के नाते हम सभी को आईएनएस वेला पर गर्व होना चाहिए। वह इसलिए कि इस पनडुब्बी का निर्माण स्वदेशी तरीके और तकनीकों से भारत में ही किया गया है।
  • पनडुब्बी को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा मुंबई में तैयार किया गया है। इस पनडुब्बी के निर्माण में नेवल ग्रुप ऑफ फ्रांस का भी सहयोग मिला है।
  • इंद्र कुमार गुजराल जब भारत के प्रधानमंत्री हुआ करते थे, उसी दौरान 25 पनडुब्बियों के अधिग्रहण के लिए 30 वर्ष की योजना तैयार की गई थी, जिसमें कि प्रोजेक्ट 75 पनडुब्बियों का निर्माण होना था।
  • आखिरकार वर्ष 2005 में 6 स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियों के निर्माण के लिए भारत और फ्रांस के बीच 3.75 बिलियन डॉलर के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • आत्मनिर्भर भारत के तहत तैयार हुए आईएनएस वेला को जब भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया, तो भारत के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था। भारतीय नौसेना की क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा करने का काम इसने किया है।

क्या है प्रोजेक्ट 75?

  • प्रोजेक्ट 75 दरअसल भारतीय नौसेना का एक कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत स्कॉर्पियन श्रेणी की 6 अटैक पनडुब्बियों का निर्माण करना शामिल है।
  • इससे पहले इस तरह की तीन पनडुब्बियां तैयार हो चुकी हैं, जिन्हें कि भारतीय नौसेना में कमीशन किया जा चुका है।
  • आईएनएस वेला चौथी ऐसी पनडुब्बी है, जिसे कि भारतीय नौसेना में पिछले महीने शामिल किया गया है। बड़ी ही कुशलता के साथ आईएनएस वेला का निर्माण किया गया है। इसके अलग-अलग चरणों पर रक्षा उत्पादन विभाग, जो कि रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है, वह लगातार अपनी नजरें बनाये हुए था।
  • भारतीय नौसेना भी इसमें हरसंभव मदद मुहैया करा रही थी।
  • शिपयार्ड मझगांव डॉक लिमिटेड, जिसके द्वारा आईएनएस वेला का निर्माण किया गया है, रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत यह एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
  • आईएनएस वेला तो भारतीय नौसेना में कमीशन हो चुका है, जबकि अब स्कॉर्पियन वागीर का भी इन दिनों परीक्षण जारी है।
  • स्कॉर्पियन श्रेणी की छठी पनडुब्बी, जिसका नाम आईएनएस वाग्शीर है, इसका भी निर्माण कार्य चल रहा है।

स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियों की विशेषताएं

  • स्कॉर्पियन श्रेणी की जिन पनडुब्बियों को प्रोजेक्ट 75 के तहत शामिल किया गया है, इनका संचालन डीजल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम द्वारा होता है।
  • सबसे अधिक परिष्कृत पनडुब्बियों में से स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियां एक हैं।
  • इनकी यह विशेषता होती है कि ये खुफिया जानकारी आसानी से इकट्ठा कर सकती हैं। इतना ही नहीं, पनडुब्बी रोधी युद्ध में भी इनकी अहम भूमिका होती है।
  • इसके अलावा एंटी-सरफेस शिप वारफेयर के दौरान भी यह पनडुब्बी उल्लेखनीय भूमिका निभाती है।
  • इन सबके अलावा स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियों की यह खासियत होती है कि ये खदान बिछाने में सक्षम होती हैं।
  • साथ ही किसी क्षेत्र विशेष की निगरानी करना इनके बाएं हाथ का खेल होता है। चुनौतीपूर्ण मिशन पूरा करने में ये सक्षम होती हैं।
  • वर्ष 2000 के जुलाई में रुस से आईएनएस सिंधुशास्त्र खरीदा गया था, जो कि स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बी थी।
  • इसके करीब दो दशकों के बाद यह पहला ऐसा मौका है, जब आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बी की सीरीज को भारतीय नौसेना में जगह दी जा रही है।

INS Vela को ऐसे मिला नाम

  • आईएनएस वेला को इसका नाम मिलने के पीछे की कहानी यह है कि वर्ष 1973 से वर्ष 2010 तक भारतीय नौसेना में वेला नाम की एक पनडुब्बी शामिल थी। यह पनडुब्बी वर्ष 2010 में डिसकमीशंड हुई थी।
  • वेला सोवियत मूल की फॉक्सट्रॉट श्रेणी की पनडुब्बी हुआ करती थी। इसलिए अब जब इस पनडुब्बी का निर्माण कार्य पूरा हो गया, तो इसे भी आईएनएस वेला नाम दे दिया गया।

INS Vela के कमीशन में विलंब की वजह

कोविड-19 महामारी के फैले होने की वजह से वेला के समुद्री परीक्षणों में देरी हो रही थी। यही वजह है कि इसकी कमीशनिंग में विलंब हुआ है।

INS Vela की खासियतें

  • आईएनएस वेला कई तरह की खासियतों से युक्त है। इसकी यह विशेषता है कि जब यह पानी के अंदर होती है तो यह 20 समुद्री मील की अधिकतम गति के साथ चल सकती है। उसी तरीके से पानी की सतह पर भी यह 11 समुद्री मील की गति से आगे बढ़ सकती है।
  • INS Vela की लंबाई 67.5 मीटर है। इसकी ऊंचाई 12.3 मीटर है। इसके बीम का माप 6.2 मीटर है।
  • INS Vela पर एक बार में 35 लोग सवार हो सकते हैं। साथ ही इसने 8 अधिकारी भी सफर कर सकते हैं।
  • इसमें 4 MTU 12V 396 SE84 डीजल इंजन दिये गये हैं, जबकि शक्ति के लिए 360 बैटरी सेल लगाए गए हैं। इसके अलावा आईएनएस वेला में एक साइलेंट परमानेंटली मैग्नेटाइज्ड मोटर भी दिया गया है।
  • INS Vela की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि यह पनडुब्बी C303 एंटी टॉरपीडो काउंटरमेजर सिस्टम से भी युक्त है। अपने साथ यह पनडुब्बी 18 टॉरपीडो या एक्सोटेट एंटी-शिप मिसाइल या फिर 30 माइंस तक लेकर चल सकती है।

और अंत में

INS Vela के भारतीय नौसेना में शामिल कर लिए जाने के बाद अब इस बात पर मुहर लग चुकी है कि आत्मनिर्भर भारत के तहत देश किसी भी तरह की जरूरी चीजों का निर्माण करने में सक्षम हो चुका है। आने वाले वक्त में देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने में आत्मनिर्भर भारत अभियान की उल्लेखनीय भूमिका रहने वाली है।

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