मुगल काल में इस तरह से हुआ तनीकी और औद्योगिक विकास

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UPSC Exam के लिए Mughal Period इसके सबसे Important topics में से एक है। UPSC Exam के लिए यह कितना Important है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि UPSC Exam के लिए History की तैयारी करते वक्त पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों में इससे संबंधित सवालों की भरमार देखने को मिल जाती है। यहां हम आपको Mughal Period में Industrial Development के साथ Technological Development के बारे में भी विस्तार से बता रहे हैं।

Technological Development in Mughal Period

भारत में जब मुगलों का आगमन जब 17वीं शताब्दी में हुआ, इसी काल में लाहौर, आगरा एवं फतेहपुर सीकरी में अकबर के संरक्षण के परिणामस्वरूप कालीनों की बुनाई और रेशम व रेशम के धागों का उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू हुआ। सैन्य से लेकर जहाज निर्माण, धातु शोधन, कांच निर्माण, मुद्रणालय और समय मापन जैसी तकनीकें भी इस दौरान विकसित हुईं।

  • सैन्य तकनीकें- गुजरात, मालवा और दक्खन आदि इलाकों में 15वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में बंदूकों का निर्माण हो रहा था। इन तोड़ेदार बंदूकों को बनाने में दो तकनीकों चक्र तकनीकी जिसे व्हील लॉक भी कहते हैं और चकमकी पत्थर की तकनीकी, जिसे फ्लिंटलॉक भी कहते हैं, का इस्तेमाल किया जाता था। पिस्तौल में व्हीललॉक का प्रयोग हो रहा था। अबुल फजल ने भी अकबर के एक ऐसी यांत्रिकी विकसित करने के बारे में लिखा है, जिसकी मदद से 17 बंदूकों से गोलियां केवल एक घोडा दबाने से दागी जानी संभव थीं।
  • जहाज निर्माण की तकनीक- जहां 1510 ईस्वी से पहले कालीकट में लोहे की कीलों का इस्तेमाल जहाज में किया जा रहा था, वहीं 17वीं शताब्दी के समय इसकी जगह लोहे के लंगर उपयोग में लाये जाने लगे। उसी तरह से बाल्टी की जगह 17वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में चेन पम्प ने ली, जिसका इस्तेमाल यूरोपवासी कर रहे थे।
  • धातु शोधन की तकनीक- अबुल फजल ने लिखा है कि लोहे की तोपों व बंदूकों के नाल का निर्माण अकबर की आयुधशाला में होता था। जस्ता के उत्पादन को लेकर अबुल फजल ने राजस्थान के जाबर क्षेत्र का उल्लेख किया है। तांबे की खान राजस्थान के खेत्री में थी, जबकि उस दौरान न के बराबर टिन का उत्पादन हो रहा था। पश्चिमी एशिया से इसका आयात हो रहा था।
  • कांच के निर्माण की तकनीक- 16वीं एवं 17वीं शताब्दी के दौरान जब भारत के लोग केवल धातुओं के दर्पण के बारे में जानते थे, उस दौरान यूरोपवासी यहां कांच के अन्य सामान के साथ कांच के दर्पण लेकर आये। मुगलकालीन चित्रों को देखने पर यूरोप में बने रेतघड़ी दिख जाती हैं। साथ ही यूरोप में बने पानी पीने के गिलास के साथ ज्वलंत ग्लास एवं अग्रवर्ती ग्लास के बारे में भी पता चलता है।
  • मुद्रणालय- सूरत भीम जी पारक ने 1670 ईस्वी के दशक में मुद्रण तकनीकी को लेकर इस दौरान अपनी रुचि दिखाई थी।
  • समय मापन की तकनीक- अधिकतर भारतीय शहरों में 16वीं एवं 17वीं शताब्दी में जलघड़ी का इस्तेमाल समय का पता लगाने के लिए किया जाता था। फारसी में यह तास, पूरी यांत्रिकी घड़ी तास घड़ियाल के नाम से जानी जाती थी। दिल्ली सल्तनत काल में जलघड़ी के बारे में अफीफ ने तारीख-ए-शाही में लिखा है। जहांगीर को सर टॉमस रो ने एक यांत्रिक घड़ी उपहार स्वरूप दी थी।
  • बाकी तकनीकें- मुगलकाल में खाका यानी कि भवन का नक्शा और माल ढोने के लिए बैलगाड़ी उपयोग में आ रहे थे। गुलाब जल से बने इत्र के नूरजहां की मां द्वारा आविष्कार की जानकारी जहांगीर के समय की मिलती है। अबुल फजल ने शोरे से पानी ठंडा किये जाने के बारे में लिखा है। साथ ही यात्रा करने व सामान ढोने के साथ अनाज पीसने वाली बैलगाड़ी के भी अकबर द्वारा इस्तेमाल किये जाने के बारे में फजल ने लिखा है। अहमदाबाद में तो एक पवन चक्की भी अनाज पीसने के लिए शुरू की गई थी।

Industrial Development in Mughal Period

  • मुगल काल में औद्योगिक विकास के बारे में विदेशी यात्रियों और तत्कालीन इतिहासकारों के विवरणों से जो जानकारी मिलती है, उसके मुताबिक दरबारों की साज-सज्जा और शान-शौकत वाली वस्तुओं को बनाने के लिए सरकारी कारखाने लगाये गये। महानिदेशक कारखानों का संचालन करता था। मुगल शासकों ने कारखानों में रुचि लेते हुए कुशल विशेषज्ञों और कारीगरों को देश में बसाया था, ताकि उत्पादन के बेहतर तरीके वे लोगों को सिखा सकें।
  • जहांगीर के समय की एक छुरी का जिक्र मिलता है, जिसकी मूठ को काले धब्बों वाले दंदार-ए-माही यानी कि मछली दांत से बनाया गया था। साथ ही एक सौ तोले उल्का पत्थर और सामान्य लोहे का मिश्रण तैयार करके जहांगीर ने उस्ताद दाऊद से एक तलवार, एक छुरी और एक चाकू भी बनवाया था, जो इतनी धार वाली थी कि सबसे उत्तम पानीदार तलवार का भी यह आसानी से मुकाबला कर सकती थी।
  • मुगल काल में कारखानों को लेकर विभाग ही था, जिसमें दीवान-ए-बयूतात सबसे ऊंचे ओहदे पर था। लेखपाल को मुशनिफ-ए-कुल-ओ-जूज के नाम से जाना जाता था। कारीगरों से सीधा संबंध रखने का काम दारोगा करता था। साथ ही हर कारखाने में माल और रोकड़ का प्रभारी एक तहसीलदार भी होता था। कारखानों के लेखा का परीक्षण करने की जिम्मेवारी मुस्तौफी की थी।

निष्कर्ष

UPSC Exam में Mughal Period की अहमियत को देखते हुए UPSC Exam के लिए Important इस topic के बारे में आपने जो इस लेख में पढ़ा है, UPSC Exam के लिए History की तैयारी करते वक्त यह आपके बहुत काम आयेगी। इसलिए इसे अच्छी तरह से पढ़ लेना उपयोगी होगा।

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