जानें कंप्यूटर चिप और उसके प्रकार

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computer chip

कंप्यूटर चिप क्या होता है 
कंप्यूटर में प्रयोग होने वाला चिप किसी अर्द्धचालक पदार्थ का बना होता है। ये बहुत पतला तथा छोटा सा अधिकतर सिलिकॉन धातु का बना एक टुकड़ा होता है जो कि सभी कंप्यूटरीकृत यंत्रो के संचालन का आधार होता है। इस चिप का स्वरूप काफ़ी छोटे जो कि हमारे स्मार्टफोन में प्रयोग होता है, से लेकर एक पर्सनल कंप्यूटर या सुपर कंप्यूटर में प्रयोग होने वाले काफ़ी बड़े आकार तक का होता है। प्रारम्भ में जब चिप का अविष्कार किया गया था तब ये बहुत बड़े आकार के हुआ करते थे लेकिन समय के साथ जैसे -जैसे कंप्यूटर के आकार छोटे होते गए उसी तरह चिप भी अब काफ़ी छोटे आकार में आने लगे है।

कंप्यूटर में चिप का क्या काम होता है?
किसी भी कंप्यूटर या स्मार्टफोन की कल्पना भी चिप के बिना असंभव है। चिप के बिना ये सभी यंत्र मात्र एक खाली डिब्बे जैसे है। चिप के कारण ही ये सभी यंत्र डेटा का संग्रह रख पाते है और फिर उसी के अनुसार हमारे दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते है। चिप हमारे स्मार्टफोन तथा कंप्यूटर में सभी तरह के डेटा और जानकारियों का संग्रह अपने पास रखता
है।

कंप्यूटर चिप की इकाई-
8 बिट = 1 बाईट
1 Kb (किलो बाईट) =1024 b (बाईट)
1 mb (मेगा बाईट) = 1024kb (किलो बाईट)
1 gb (गीगा बाईट) = 1024 mb (मेगा बाईट)
1 tb (टैरा बाईट) =1024 gb (गीगा बाईट)
1 pb (पेटा बाईट) = 1024 tb (टेरा बाईट)

कंप्यूटर चिप कितने प्रकार का होता है ?

कंप्यूटर में प्रयोग की जाने वाली चिप मुख्यतः दो प्रकार की होती है।

1. प्राइमरी मेमोरी- प्राइमरी मेमोरी को कम्प्यूटर की अस्थायी मेमोरी भी कहते है। इसे अस्थायी मेमोरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये किसी भी डेटा को तभी तक कंप्यूटर में संग्रहित रखता है जब तक कि कंप्यूटर कार्य कर रहा होता है। जैसे ही हम एक बार कंप्यूटर को बंद कर देते है इसमें संग्रहित सभी डेटा समाप्त हो जाता है तथा इसका कोई भी तथ्य नहीं मिलता है।

प्राइमरी मेमोरी को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया है- RAM, ROM

RAM (रैंडम एक्सिस मेमोरी) – RAM या (Random Access Memory) कंप्यूटर की अस्थाई मेमोरी होती हैं।
की-बोर्ड, माउस या अन्य किसी इनपुट डिवाइस से इनपुट किया गया डाटा प्रक्रिया से पहले रैम में ही संगृहीत किया जाता है और सी.पी.यू. द्वारा आवश्यकतानुसार वहाँ से प्राप्त किया जाता है। रैम में डाटा या प्रोग्राम अस्थाई रूप से संगृहीत रहता है कंप्यूटर बंद हो जाने या विजली चले जाने पर रैम में संगृहीत डाटा मिट जाता है।

कंप्यूटर के RAM को भी 3 भागों में विभाजित किया गया हैं-
1. गतिक रैम (Dynamic RAM)
2. समकालिक रैम (Synchronous RAM)
3. स्थिर रैम (Static RAM)

ROM (रीड ओनली मेमोरी) – यह कम्प्यूटर की स्थायी मेमोरी होती है जो कि कंप्यूटर के निर्माण के समय मे ही इसमें डाले गए प्रोग्राम के संग्रह के साथ होती है। यह मेमोरी कंप्यूटर से कभी भी नष्ट नही की जा सकती है। अगर इस मेमोरी को कम्प्यूटर से हटा दिया जाए तो कम्प्यूटर कार्य करना बंद कर देगा।

कम्प्यूटर के ROM को भी 3 भागों में विभाजित किया गया है।
1. PROM (Programmable Read Only memory)
2. EPROM (Erasable Programmable Read only Memory)
3. EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)

2. सेकेंडरी मेमोरी- कंप्यूटर में प्रयोग होने वाली सेकेंडरी मेमोरी को हम अपनी जरूरत के हिसाब से बाहर
से जोड़ सकते है। इस मेमोरी की कार्य करने की गति प्राइमरी मेमोरी से काफ़ी कम होती है, लेकिन हम
कंप्यूटर की प्राइमरी मेमोरी को घटा या बढ़ा नही सकते है, जबकि सेकंडरी मेमोरी की क्षमता को हम
अपनी जरूरत के मुताबिक घटा या बढ़ा सकते है।

सेकेंडरी मेमोरी मुख्यतः 4 प्रकार की होती है-
1. चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)- यह पुराने जमाने के टेप रिकॉर्डर की भांति होते थे, जिसमें प्लास्टिक के रिबन पर
चुम्बक की परत चढ़ी होती थी।

  1. चुम्बकीय डिस्क (Mangnetic Disk) – चुम्बकीय डिस्क भी दो प्रकार के होते है।
    (a) फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)
    (b) हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)
  2. ऑप्टिकल डिस्क (Operating Disk) – ऑप्टिकल डिस्क भी 3 प्रकार की होती है।
    (a) सीडी (CD)
    (b) डीवीडी ड्राइव (DVD)
    (c) ब्लू रे (Blu Ray)
  3. यूएसबी फ़्लैश ड्राइव (USB) – यह वर्तमान की सबसे ज़्यादा प्रचलित और पोर्टबल सेकेंडरी मेमोरी
    डिवाइस है जो कि USB पोर्ट के माध्यम से कंप्यूटर से जोड़ी जाती है। इसे हम पेन ड्राइव के नाम से भी
    जानते है। इसका प्रयोग वीडियो, ऑडियो के अलावा अन्‍य डेटा को सेव करने के लिए किया जाता है।

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