छत्तीसगढ़ पंचायत प्रावधान (अनुसूचित का विस्तार) नियम 2021 | Chhattisgarh Panchayat Provisions (Extension of the Scheduled) Rules, 2021

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Chhattisgarh Panchayat Provisions (Extension of the Scheduled) Rules, 2021

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देश में कब क्या हो रहा है, यह जानना आपका अधिकार है। इसलिए हम अपने लेखों में आपके लिए ऐसी जानकारी लेकर आते हैं। तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तय किए गए पंचायत प्रावधान और मसौदा नियमों के बारे में। राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए भी यह लेख लाभदायक साबित हो सकता है। तो आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं –

छत्तीसगढ़ पंचायत प्रावधान (अनुसूचित का विस्तार) नियम 2021 का उद्देश्य क्या है? | What is the objective of Chhattisgarh Panchayat Provisions (Extension of the Scheduled) Rules, 2021?

छत्तीसगढ़ सरकार ने पेसा अधिनियम, 1996 के तहत ‘छत्तीसगढ़ पंचायत प्रावधान (अनुसूचित का विस्तार) नियम 2021’ के तहत नए मसौदा नियम तैयार किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है कानूनी रूप से अनुसूचित क्षेत्रों के निवासियों और आदिवासियों के अधिकारों को स्वशासन की अपनी स्वयं की प्रणाली के माध्यम से स्वयं को ही शासित करने के जो अधिकार हैं उन्हें मान्यता प्रदान की जाए।

क्यों थी इन नियमों की मांग? | Why these rules were in demand?

छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से आदिवासी पेसा नियमों की माँग कर रहे क्योंकि ज़ाहिर सी बात है इस अधिनियम के लागू होने से आदिवासियों को अपने संसाधनों पर अधिक अधिकार प्राप्त हो सकेगा। इस विधेयक से यह समझ में भी आ रहा है कि ग्राम स्तर पर ग्राम सभाओं को मजबूती प्रदान करने की योजनाएँ बनाई जा रही हैं।

क्या है पेसा अधिनियम, 1996? | What is PESA Act, 1996?

केंद्र सरकार द्वारा ग्राम सभाओं के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों में लोगों के लिए स्वशासन सुनिश्चित हो सके, इसलिए पेसा अधिनियम को अधिनियमित किया गया था। यही वह अधिनियम है जो आदिवासी समुदायों और अनुसूचित क्षेत्रों के निवासियों के अधिकारों को कानूनी रूप से मान्यता देता है। इतना ही नहीं बल्कि पेसा अधिनियम प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को भी स्वीकार करता है। एक और महत्वपूर्ण कार्य भी पेसा करता है जोकि है सभी सामाजिक क्षेत्रों को नियंत्रित करना और ग्राम सभाओं की विकास योजनाओं को मंजूरी देना।

किन राज्यों के पास पेसा अधिनियम हैं? | Which states have PESA Laws?

आपको यह जानना भी ज़रूरी है कि छत्तीसगढ़ पेसा अधिनियम को लागू करने वाला पहला राज्य नहीं है बल्कि इससे पहले भी 6 राज्य पेसा नियमों को बना चुके हैं और अगर छत्तीसगढ़ में भी पेसा अधिनियम लागू हो जाता है तो वो ऐसा करने वाला भारत का सातवाँ राज्य होगा। अभी तक जिन राज्यों में पेसा कानून बन चुके हैं, वे हैं – राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगना।

कौन से मुद्दे हैं पेसा से संबंधित? | Which matters are associated with PESA?

इससे संबंधित कुछ विचारणीय मुद्दे भी हैं जैसे कि आंशिक कार्यान्वयन। जैसे राज्य सरकारों को राष्ट्रीय सरकार के अनुरूप चलना चाहिए लेकिन यह नहीं हो पता जिस वजह से आंशिक कार्यान्वयन होता है और कई आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन विकृत भी हो जाता है।

पेसा कई जगहों पर सफल नहीं हो पाया है क्योंकि कानूनी दुर्बलता, राजनीतिक इछशक्ति की कमी, नौकरशाही उदासीनता और स्पष्टता की कमी जैसी कई प्रशासनिक बाधाएँ भी आई हैं।

पेसा से जुड़ा एक आर अहम मुद्दा यह भी सामने आया था कि कई जगह विकास योजनाओं को ग्राम सभा द्वारा कागजों पर अनुमोदित कर दिया जा रहा था लेकिन असल में न तो कोई चर्चा ही थी, न क निर्णय के लिए बैठक हुई और न ही कोई कदम उठाया गया।

क्या है महत्ता पेसा नियमों की? | What is the significance of PESA Rules?

चूंकि पेसा नियम के तहत सरकार से सत्ता हस्तांतरित होकर ग्राम सभा के पास चली जाती है, इसलिए गाँव स्तर के निकाय इस अधिनियम से मजबूत होंगे। अब आपको यह जानना चाहिए कि ग्राम सभाओं की शक्तियों में क्या-क्या शामिल है। तो ये शक्तियाँ हैं – उन योजनाओं पर नियंत्रण जो आदिवासियों को प्रभावित करती हैं, सांस्कृतिक पहचान, परंपरा का रखरखाव और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण। जल, जंगल और भूमि पर संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार भी ग्राम सभाओं के पास आ जाता है। इतना ही नहीं बल्कि रीति-रिवाज़ों, परंपराओं, खनिजों और खनन क्षेत्र के निर्णयों से संबंधित अधिकार भी ग्राम सभाओं को मिल जा रहे हैं। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि पेसा की वजह से ग्राम सभाओं का अधिकार क्षेत्र बढ़ जाता है।

अगर पेसा अधिनियम सही तरीके से लागू हो जाता है तो भारत के भविष्य की राह काफी अच्छी होगी। इससे पारंपरिक शासन प्रणालियों में जो कमियाँ हैं वो तो दूर होंगी ही साथ ही यह अधिक लिंग-समावेशी और लोकतांत्रिक भी बनेगा।

यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो ऐसे ही लेख पढ़ते रहने के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ। हमारा उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोगों को इस अधिनियम के बारे में जागरूक कर सकें। आपके मन में अगर अभी भी कोई शंका अथवा प्रश्न है तो बेझिझक कमेंट बॉक्स में लिखकर अपनी जिज्ञासा को शांत कीजिए।

धन्यवाद!

 

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