जानें, क्यों और कैसे होता है कैबिनेट (Cabinet) का गठन?

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Union Cabinet formation in India

भारत और इंग्लैंड के साथ ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के लगभग सभी देशों में कैबिनेट की व्यवस्था है। इसमें सरकार के सबसे ऊंचे स्तर के नेता शामिल होते हैं, जो सामूहिक रूप से सरकार को चलाने संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। भारत में ना केवल केंद्रीय शासन, बल्कि राज्य स्तरीय शासन में भी कैबिनेट की व्यवस्था को अपनाया गया है। तो आइये जानें जानें, क्यों और कैसे होता है कैबिनेट (Cabinet) का गठन?

यहां हम आपको कैबिनेट से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।

कैबिनेट क्या है? (What is Cabinet?)

जब लोकसभा और विधानसभा के चुनाव हो जाते हैं तो उसमें बहुमत प्राप्त करने वाला दल सरकार बनाता है। केंद्र में सरकार का मुखिया प्रधानमंत्री, जबकि राज्य में मुख्यमंत्री होता है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा जनता के बीच से चुने गए राजनेताओं की एक टीम शासन चलाने के लिए बनाई जाती है, जिसे कि कैबिनेट के नाम से जानते हैं। इसमें बेहद महत्वपूर्ण मंत्री सीमित संख्या में शामिल होते हैं। इनके बीच सरकार चलाने के लिए विभागों का बंटवारा किया जाता है और जरूरत के अनुसार इसमें फेरबदल भी होते हैं।

कैबिनेट का इतिहास (History of Cabinet)

कैबिनेट का लंबा इतिहास रहा है। सबसे पहले तो 1660 में चार्ल्स द्वितीय ने Cabinet बनाया था। इसमें उन्होंने बेहद विश्वासपात्र लोगों को रखा था, जिनके जरिए वह काम कराना पसंद करता था। बाद में विलियम तृतीय ने भी अपने शासनकाल के अंतिम दिनों में कैबिनेट बनाकर मंत्री चुने थे। ब्रिटेन में 1937 में मिनिस्टर्स ऑफ़ द क्राउन एक्ट बना था, जिसमें कैबिनेट में कौन मंत्री होंगे, इसकी व्याख्या की गई थी। अलग-अलग देशों में कैबिनेट का स्वरूप अलग-अलग देखने को मिलता है।

कैबिनेट का गठन (Cabinet Formation)

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 77 कहता है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रालयों अथवा विभागों का गठन करेंगे। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति इन मंत्रालयों को संबंधित मंत्रियों को सौंपते हैं। हर मंत्रालय में मंत्रियों की सहायता के लिए एक सचिव भी प्रभाव में रहते हैं। राष्ट्रपति इन मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं, जिसके बाद से वे मंत्री कहे जाते हैं। लोकसभा के प्रति यह मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
  • तीन श्रेणियों में मंत्रिपरिषद को बांटा गया है। ऐसा महत्व के अनुसार होता है। सबसे महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री होते हैं, जिन्हें मंत्रिपरिषद की हर बैठक में शामिल होकर अपनी राय रखनी पड़ती है। इसके बाद आते हैं राज्य मंत्री, जो कि कभी-कभी बैठकों में बुलाए जाते हैं। इसके अलावा उप मंत्री होते हैं, जिन्हें तभी बैठकों के लिए बुलाया जाता है जब उनके मंत्रालय से संबंधित कोई बात होती है। एक तरह से कैबिनेट मंत्री के अंतर्गत राज्य मंत्री और उप मंत्री काम करते हैं। कैबिनेट मंत्री में भी कुछ मंत्रियों को किसी मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दे दिया जाता है।
  • मंत्रिमंडल जिसे कि भारतीय संविधान में कार्यपालिका का दर्जा हासिल है, उसकी सहायता के लिए एक मंत्रिमंडल सचिव भी होता है। इसी तरह से मंत्रिमंडल सचिवालय मौजूद है, जो कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्टाफ एजेंसी के तौर पर जाना जाता है। उच्च स्तरीय नीति निर्धारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्ष 1947 में गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद की जगह पर मंत्रिमंडल सचिवालय का गठन किया गया था।
  • मंत्रिमंडल सचिवालय मंत्रिमंडल की बैठक के लिए कार्य सूची तैयार करने के साथ-साथ आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराता है। साथ में कैबिनेट और कैबिनेट समिति जो निर्णय लेती है, उनका यह रिकॉर्ड भी रखता है और संबद्ध मंत्रालयों को इसकी जानकारी भी उपलब्ध कराता है। मंत्रिमंडल सचिवालय के प्रधान मंत्रिमंडल सचिव होते हैं और देश के पहले कैबिनेट सचिव होने का सम्मान एन आर पिल्लै को मिला था।

कैबिनेट का महत्व

  • भारतीय संविधान के 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 352 में Cabinet शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
  • राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था आदि से संबंधित महत्वपूर्ण नीतिगत मसलों पर कैबिनेट न केवल विचार-विमर्श करती है, बल्कि उसे अंतिम रूप भी प्रदान करती है। कैबिनेट के जिम्मे सामान्य हाउसकीपिंग के मसलों से लेकर संबंधित समितियां की नियुक्ति और आवास से जुड़े हुए मामलों को भी मिटाने का काम होता है।
  • कैबिनेट भारतीय संसद के प्रति जवाबदेह होती है। भारतीय संविधान का प्रावधान कहता है कि मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की तादाद लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 फ़ीसदी से अधिक नहीं हो सकती है। यही नहीं, हर मंत्री का संसद का सदस्य होना भी जरूरी होता है। यदि किसी व्यक्ति को कैबिनेट में बिना संसद का सदस्य हुए भी चुन लिया गया है तो उसे 6 महीने के अंदर उपरी या निचले सदन का सदस्य बनना पड़ता है। अन्यथा वह मंत्री पद पर नहीं बना रह सकता।

निष्कर्ष

अकेले प्रधानमंत्री पूरी सरकार को नहीं चला सकते हैं। ऐसे में कैबिनेट प्रधानमंत्री के साथ मिलकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करके निर्णयों को अंतिम रूप देकर सरकार के काम को आसान बना देती है और सरकार पर जनता के भरोसे को भी बढ़ाती है। जल्द ही हम Modi Cabinet 2019 की चर्चा करेंगे। अगर आपक भी जानना चाहते हैं New Cabinet 2019 के बारे में तो कमेंट बॉक्स में लिखकर हमे बताएंग और बताएंग की आपकी नजर में कैबिनेट का सबसे महत्वपूर्ण कार्य क्या है?

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