The 1999 Odisha Cyclone: बर्बाद हो गया था जब सूबा

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1999 cyclone

वर्ष 1999, Odisha Cyclone के लिए ही मुख्य रूप से जाना जाता है। उड़ीसा में आया तूफान इतना प्रलयंकारी था कि आज तक इसकी तबाही के निशान यहां देखने के लिए मिल ही जाते हैं। इस लेख में हम आपको उड़ीसा में वर्ष 1999 में आए चक्रवाती तूफान के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

इस लेख में आपके लिए है:

  • 1999 Cyclone in Odisha: भयानक मंजर
  • 1999 Odisha Cyclone का उद्गम : प्रभावित होने वाले जिले और शहर, मृतकों की तादाद, प्रभावित लोगों की संख्या……..
  • नहीं हो पाई थी तैयारी
  • तूफान बीतने के बाद
  • तूफान के बाद उठाए गए कदम

1999 Cyclone in Odisha: भयानक मंजर

  • वर्ष 1999 के Odisha Cyclone की highest wind speed 300 मील प्रति घंटा रही थी। बीती शताब्दी में यह दुनिया में आये सबसे भयावह चक्रवाती आपदाओं में से एक था।
  • भारतीय मौसम विभाग ने 24 अक्टूबर, 1999 को अपने निगरानी संयंत्र के जरिए सबसे पहले इसे Gulf of Siam के ऊपर बने निम्न दाब वाले चरण में पहचाना था। इसके 5 दिन बाद ही यह चक्रवाती तूफान जमीन से टकरा गया था।
  • तूफान की भयावहता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 36 घंटे से भी अधिक समय तक यहां 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यहां हवाएं चलती रही थीं।
  • उड़ीसा के तटवर्ती जिलों बालासोर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, पुरी और गंजम में रहने वाले लोग अपने घरों को खाली करके किसी महफूज जगह पर चले जाने के लिए मजबूर हो गए थे।

जहां जमीन से टकराया तूफान

  • पारादीप के दक्षिण पश्चिम में स्थित जगतसिंहपुर जिले में इरसमा और बलिकुड़ा के बीच में।

तूफान के जमीन से टकराने का वक्त

  • 29 अक्टूबर 1999 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर।

हवा की रफ्तार

The 1999 Cyclone in Odisha के दौरान बह रही हवा की रफ्तार इतनी अधिक थी कि इसकी गति को मापने के लिए पारादीप स्थित भारतीय मौसम विभाग के कार्यालय में लगाया गया संयंत्र एनीमोमीटर भी गति को दर्ज कर पाने में नाकाम साबित हुआ था।

तीन दिनों की मूसलाधार बारिश

उड़ीसा के तटवर्ती इलाकों में चक्रवाती तूफान की वजह से तीन दिनों तक मूसलाधार बारिश हुई थी। साथ में समुद्र की लहरें भी 7 से 10 मीटर तक उठ रही थी, जिसने जमीन पर 20 किलोमीटर अंदर के इलाकों तक सब कुछ बहा लिया था।

चक्रवाती तूफान का प्रभाव

Odisha super cyclone जो year 1999 में आया था, इसने 200 किलोमीटर तक के इलाके को बुरी तरीके से प्रभावित किया था।

1999 Odisha Cyclone का उद्गम

अंडमान आइसलैंड के 550 किलोमीटर पूर्व में निम्न दाब के रूप में इस चक्रवाती तूफान का उद्गम हुआ था।

प्रभावित होने वाले जिले और शहर

1999 Cyclone in Odisha, जिसकी वजह से 45 सेंटीमीटर से 95 सेंटीमीटर तक की बारिश हुई थी, इसने राज्य के 14 तटीय जिलों के साथ 28 तटीय शहरों को प्रभावित किया था, जिसमें दो बड़े शहर राजधानी भुवनेश्वर और कटक भी शामिल थे।

मृतकों की तादाद

आधिकारिक तौर पर बताया गया कि Odisha super cyclone जिसने year 1999 में भारी तबाही मचाई थी, इसमें 9 हजार 885 लोगों की जान चली गई थी, लेकिन अन्य स्रोत बताते हैं कि इस तूफान की वजह से 50 हजार से भी अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। एक अनुमान के मुताबिक लगभग डेढ़ हजार बच्चे इस दौरान अनाथ हो गए थे। केवल जगतसिंहपुर जिले में ही 8 हजार 119 लोगों की मौत हो गई थी।

प्रभावित लोगों की संख्या

The 1999 Odisha Cyclone की वजह से लगभग एक करोड़ 30 लाख लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें 33 लाख बच्चे, 50 महिलाएं और 35 लाख बुजुर्ग शामिल थे।

घायल लोग

इस विनाशकारी चक्रवाती तूफान की वजह से 7 हजार 505 लोग घायल हुए थे।

पालतू जानवरों पर असर

The 1999 Cyclone in Odisha 3 लाख 15 हजार 886 पालतू जानवरों एवं भेड़-बकरियों के लिए काल बनकर आया था।

छिन गई छत

वर्ष 1999 में उड़ीसा में आए चक्रवाती तूफान के कारण 16 लाख 50 हजार 86 घर छतिग्रस्त हो गए थे। यही नहीं, 23 हजार 129 घर तो बह गए थे। इसके अलावा 7 लाख 46 हजार 337 घर पूरी तरीके से नष्ट हो गए थे। चक्रवाती तूफान की वजह से 8 लाख 80 हजार 620 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे।

नहीं हो पाई थी तैयारी

  • भारतीय मौसम विभाग को आने वाले विनाशकारी चक्रवाती तूफान की जानकारी 5 दिन पहले ही मिल पाई थी, जिसकी वजह से इतने कम दिनों में तूफान से लड़ने के लिए तैयारी पूरी नहीं की जा सकी।
  • इसी का नतीजा हुआ कि भारत को सदी के सबसे खौफनाक तूफान को झेलना पड़ा। इसी तूफान की वजह से हुई भारी तबाही को देखते हुए साइक्लोन को लेकर चेतावनी देने के लिए वार्निंग सिस्टम को देश में विकसित किया गया।
  • यही कारण है कि उसके बाद से जब भी देश में कोई बड़ा चक्रवाती तूफान आया है, उससे पहले ही सरकार की ओर से इतनी तैयारी कर ली गई है कि इससे जान-माल का ज्यादा नुकसान नहीं हो सका है।

तूफान बीतने के बाद

1999 Cyclone in Odisha आकर चला तो गया, लेकिन इसके बाद कई महीने लग गए यहां जिंदगी को सामान्य होने में। लोगों के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था। लोगों के पास रहने के लिए घर भी नहीं थे। ऊपर से यहां हर ओर इंसानों और जानवरों की लाशें पड़ी हुई थीं। ये सड़ रही थीं। इनसे दुर्गंध आ रही थी। इसकी वजह से यहां महामारी फैलने का भी खतरा बढ़ गया था।

तूफान के बाद उठाए गए कदम

इसके बाद राहत कोष बनाए गए, जिसमें लोगों ने आर्थिक मदद की। डिजास्टर मैनेजमेंट कमिटी भी बनाई गई, जो कि नुकसान का अंदाजा लगाती है और सरकार के सामने रखती है। भारत के राज्यों ने अब इस तरह के तूफानों से लड़ना भी सीख लिया है।

निष्कर्ष

The 1999 Odisha Cyclone अपने साथ तबाही का ऐसा भयानक मंजर लेकर आया था, जिसे याद करके आज भी प्रभावित लोग सिसकने लगते हैं। इस भयानक चक्रवाती तूफान ने उड़ीसा के लोगों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया। मौत का ऐसा खौफनाक तांडव तब तक उड़ीसा के लोगों ने अपनी जिंदगी में कभी भी नहीं देखा था। हालांकि, इससे राज्य सरकारों ने सबक भी लिया और खुद को इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए सक्षम भी बना लिया।

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