बड़े काम की है चक्रवातों से जुड़ी ये रोचक जानकारी

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चक्रवात उन सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदाओं में से एक हैं, जिनकी वजह से दुनिया भर में हर साल बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होता है। यहां हम आपको चक्रवात से जुड़ी हर जरूरी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

ये है चक्रवात

  • चक्रवात दरअसल समुद्री तूफान को कहा जाता है।
  • भूमध्य रेखा, जिसे कि विषुवतीय रेखा भी कहते हैं, उसके समीप जो समुद्र स्थित है, वह थोड़ा अधिक गर्म होता है। यहीं चक्रवात प्रायः पैदा होते हैं।
  • सूर्य से मिली गर्मी से यहां के समुद्र की हवा गर्म व हल्की ओर ऊपर उठ जाती है।
  • ऐसे में इस जगह पर निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है।
  • इस निम्न दाब वाली जगह को भरने के लिए आसपास की ठंडी हवा तेजी से इस ओर बढ़ने लगती हैं।
  • धरती तो अपने अक्ष पर लट्टू की तरह घूर्णन कर रही है। ऐसे में ये हवाएं सीधी न आकर चक्कर लगाती हुईं इस ओर बढ़ने लगती हैं। इसे ही चक्रवात कहते हैं।
  • गर्म होकर ऊपर उठने वाली हवा में नमी होने की वजह से घने बादल भी बनते हैं और चक्रवात में तब तेज हवाओं के साथ भारी बारिश भी होती है।
  • उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात में हवा के चलने की दिशा घड़ी की सुई के विपरीत रहती है। जबकि, दक्षिणी गोलार्द्ध में यह घड़ी की सुई की दिशा में ही रहती है।

चक्रवात के प्रकार

ध्रुवीय चक्रवात

  • इन्हें पोलर चक्रवात भी कहा जाता है।
  • ये आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्र में आते हैं।
  • यहां बड़े इलाके में कम दबाव होता है, जो जाड़े के दिनों में तो मजबूत होता है, मगर गर्मी के दिनों में कमजोर पड़ जाता है।
  • उत्तरी गोलार्द्ध में इसका एक केंद्र बफ्फिन द्वीप और दूसरा केंद्र उत्तर-पूर्वी साइबेरिया के समीप होता है।
  • दक्षिणी गोलार्द्ध में इसका केंद्र 160 डिग्री पश्चिम देशांतर पर स्थित रोस आइस शेल्फ के किनारे पर होता है।
  • आबादी कम होने के कारण इसका असर कम होता है।

धु्रवीय निम्न चक्रवात

  • दोनों गोलार्द्ध में ये महासागरीय क्षेत्रों में चलते हैं।
  • ये मुश्किल से 24-48 घंटे तक ही टिकते हैं।
  • अतिरिक्त उष्ण कटिबंधीय चक्रवात यहीं मध्य अक्षाशों में पैदा होते हैं, जिसे बोरोक्लीनिक क्षेत्र के नाम से भी जानते हैं।

उपोष्ण कटिबंधीय चक्रवात

  • वर्ष 1972 में इस श्रेणी के चक्रवात को अमेरिका के नेशनल हरीकेन सेंटर ने मान्यता दी थी।
  • जहां ये चक्रवात पैदा होते हैं, उस इलाके में समुद्र का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जाता है।
  • इसके अंतर्गत चलने वाली हवा की गति 50 किमी प्रति घंटे से भी कम होने की वजह से नुकसान अधिक नहीं होता है।

उष्ण कटिबंधी चक्रवात

  • ये सबसे भयंकर और विनाशकारी होते हैं।
  • इसमें तेज हवाएं तो चलती ही हैं, साथ में मूसलाधार बारिश भी होती है।
  • बिजली खूब गरजती है। हवा भी 100 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से बहती है। नीलोफर और हुदहुद जैसे तूफान इसी श्रेणी में आते हैं, जो समुद्री इलाकों में सबकुछ तबाह कर देते हैं।

मेसोस्केल

  • करीब 2 से 10 किमी व्यास वाले हवा के छोटे-छोटे भंवर जो तूफान की तरह उठते हैं, उन्हें ही मेसोस्केल के तहत रखा जाता है।
  • संख्या अधिक होने के बावजूद इनसे नुकसान बेहद कम इसलिए होता है, क्योंकि ये छोटे होते हैं।
  • अमेरिका में तो हर साल इस तरह के करीब 1700 मेसोस्केल पैदा होते हैं, मगर इनमें से आधे ही तूफान में बदल पाते हैं।

ऐसे होता है चक्रवातों का नामकरण

  • सबसे पहले 20वीं शताब्दी में ऑस्ट्रेलिया के एक मौसम वैज्ञानिक ने अपने नापसंद नेताओं के नाम पर तूफानों को नाम देना शुरू किया था।
  • हर वर्ष अमेरिका की ओर से 21 नामों की सूची तैयार की जाती है। इस तरह से अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों को छोड़कर हर अक्षर से एक नाम रख दिया जाता है।
  • हर वर्ष 21 से अधिक तूफान आने पर उनके नाम ग्रीक अल्फाबेट जैसे कि अल्फा, बीटा और गामा पर रख दिये जाते हैं।
  • नाम रखते वक्त सम-विषम भी देखा जाता है। उदाहरण के लिए 2004, 2014 व 2018 में चक्रवातों के नाम पुरुषों के नाम पर रखे गये, जबकि 2001, 2003 और 2007 में आये चक्रवातों के नाम महिलाओं के नाम पर रखे गये।
  • एक नाम छः वर्षों के अंदर दोबारा प्रयोग में नहीं आता है।
  • चक्रवातों का नाम रखने के लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी कि डब्ल्यूएमओर की ओर से एक प्रणाली बनाई गई है।
  • अलग-अलग देशों को इसके तहत नाम सुझाने पड़ते हैं। इन देशों ने जो नाम दिये हैं और उनके आधार पर जो सूची तैयार की गई है, उसी में से तूफानों के नाम रखे जाते हैं।
  • मयामी नेशनल हरीकेन सेंटर और विश्व मौसम विज्ञान संगठन, जो कि संयुक्त राष्ट्र संघ की ही एक एजेंसी है, की ओर से वर्ष 1953 से ही उष्णकटिबंधीय चक्रवातों व तूफानों के नाम रखे जाते रहे हैं।
  • उत्तरी हिंद महासागर में भी वर्ष 2004 में संबंधित देशों से कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले तूफानों का नामकरण खुद करें।
  • भारत के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, मालदीय, म्यांमार और ओमान ने इस बारे में बैठक करके सभी देशों ने आठ नाम सुझाए, जिससे 64 नामों की सूची तैयार हो गई। उत्तरी महासागर क्षेत्र में तूफानों के नाम इसी सूची के आधार पर रखे जाते हैं।
  • भारत ने जो नाम सौंपे थे, उनमें मेघ, बिजली, सागर, अग्नि, वायु और आकाश जैसे नाम शामिल हैं।
  • पाकिस्तान ने तितली, नीलोफर और बुलबुल जैसे नाम दिये हैं।
  • आठ देशों ने जो नाम दिये हैं, उन्हीं में से बारी-बारी से एक नाम चुन लिया जाता है। नये नाम की जरूरत पड़ने पर सूची फिर से भर दी जाती है।

निष्कर्ष

लगभग हर साल दुनिया के किसी-न-किसी में कोई विनाशकारी तूफान आ ही जाता है। इनके बारे में स्पष्ट जानकारी होने से जान-माल के भारी नुकसान को कम किया जा सकता है। वैसे, आपसे यदि चक्रवात के लिए नाम सुझाने को कहा जाए, तो आप कौन-सा नाम सुझाएंगे?

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