Cyclone Nivar: कैसे आया चक्रवाती तूफान और क्या रहा प्रभाव?

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Cyclone Nivar

Cyclone Nivar ने बीते दिनों तमिलनाडु और पुडुचेरी के तट पर दस्तक दी थी। यह एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात था, जिसने यहां व्यापक प्रभाव डाला। बंगाल की खाड़ी में यह तूफान पैदा हुआ था। इस लेख में हम आपको चक्रवाती तूफान निवार के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

इस लेख में आपके लिए है:

  • चक्रवाती तूफान निवार से जुड़ीं महत्वपूर्ण बातें
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बारे में
  • निवार चक्रवाती तूफान का प्रभाव
  • Cyclone Nivar से निबटने को हुए प्रयास

चक्रवाती तूफान निवार से जुड़ीं महत्वपूर्ण बातें

  • उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में इस बार जितने चक्रवात आए हैं, उनमें यह चौथा चक्रवात रहा। इससे पहले भी तीन चक्रवात इस साल इस क्षेत्र में उठ चुके थे। बीते नवंबर में ही चक्रवात गति (Cyclone Gati) को देखा गया था। यह सोमालिया में आया था।
  • चक्रवात अम्फान (Cyclone Amphan) भी इसी साल मई में आया था। इसने पूर्वी भारत को प्रभावित किया था। इसके अलावा चक्रवात निसर्ग (Cyclone Nisarga) भी इसी साल आया और महाराष्ट्र में इसका बड़े पैमाने पर प्रभाव देखा गया।
  • वर्ष 2018 में चक्रवात गाजा (Cyclone Gaja) आया था, जो कि तमिलनाडु के तट से टकराया था। इसके दो वर्षों के बाद निवार चक्रवाती तूफान आया है।
  • चक्रवाती तूफान के नामकरण के लिए विभिन्न देशों द्वारा नामों की सूची दी गई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की तरफ से चक्रवातों के नामकरण के लिए जो दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं, उनके आधार पर इस तूफान को चक्रवात निवार नाम प्रदान किया गया।
  • निवार नाम इस सूची के लिए ईरान की तरफ से दिया गया था। निवार का अर्थ रोकथाम करना होता है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन के जो दिशा-निर्देश हैं, उनके मुताबिक हर क्षेत्र के जितने भी देश हैं, वे चक्रवातों को नाम देने के लिए अधिकृत किए जा चुके हैं।
  • उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र की बात करें तो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर जो उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनते हैं, वे सभी इसमें शामिल होते हैं। 13 सदस्य देश इस क्षेत्र में शामिल हैं। इनमें भारत तो है ही, इसके अलावा म्यांमार, बांग्लादेश, यमन, सऊदी अरब, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, ओमान, मालदीव, पाकिस्तान, श्रीलंका और कतर शामिल हैं।
  • सभी देशों ने मिलकर इस साल के लिए चक्रवात के 169 नामों का सुझाव दिया था। इनमें से सभी देशों ने 13 नाम इसके लिए दिए थे।
  • निवार चक्रवाती तूफान 110 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आया था। इतनी तेज गति से हवाओं के चलने की वजह से पहले तो यह एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा गया था, मगर बाद में इसकी गति 120 किमी प्रति घंटा से पार होने के बाद इसे परिवर्तित करके गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रख दिया गया।

उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बारे में

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात की आकृति गोलाकार होती है। पूरी तरीके से यह गोल होता है और गोल-गोल ही यह उष्णकटिबंधीय महासागरों में उत्पन्न होने के बाद उठता जाता है।
  • इसकी विशेषताओं की बात करें तो इसमें निम्न वायुमंडलीय दबाव के साथ तेज हवाओं का चलना और भारी बारिश साथ में लाना शामिल हैं।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की कुछ और भी विशेषताएं हैं। इनमें चक्रवात की आंख के साथ गर्म तापमान, निम्न वायुमंडलीय दबाव का एक केंद्रीय क्षेत्र और स्पष्ट स्कीज (Skies) शामिल हैं। स्कीज से तात्पर्य वायुमंडल एवं बाहरी अंतरिक्ष के उस क्षेत्र से है, जो पृथ्वी से देखा जाता है।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम भी दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। दक्षिण पश्चिमी प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में ये उष्णकटिबंधीय चक्रवात के नाम से तो जाने जाते हैं, मगर उत्तरी अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत की बात करें तो उन क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय चक्रवात को हरिकेन के नाम से जाना जाता है।
  • उसी तरीके से उत्तर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ये विली-विली के नाम से जाने जाते हैं, तो चीन और दक्षिण पूर्व एशिया में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को टाइफून बुलाया जाता है।
  • उत्तरी गोलार्ध में जहां उष्णकटिबंधीय चक्रवात वामावर्त यानी कि Anticlockwise चलते हैं, वहीं दक्षिणी गोलार्ध में ये दक्षिणावर्त यानी कि Clockwise चलते हुए चक्कर काटते हैं।

निवार चक्रवाती तूफान का प्रभाव

  • चक्रवाती तूफान निवार की वजह से तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनजीवन पटरी से उतर गया था। इसकी वजह से जो भारी बारिश हुई, उसके कारण कई इलाकों में भारी जलजमाव हो गया। चेन्नई के मडिपक्कम इलाके की सड़कें पूरी तरीके से जलमग्न हो गई थीं।
  • तमिलनाडु के महाबलीपुरम इलाके में भी इसका व्यापक असर देखा गया। इसके अलावा कुडुलोर इलाका भी कुछ हद तक प्रभावित हुआ।
  • पुदुचेरी में भी इसकी वजह से लगातार दो दिनों तक बारिश होती रही, जिसकी वजह से यहां भी बहुत से इलाकों में पानी भर गया था। हालांकि, इसके कमजोर पड़ जाने से न केवल तमिलनाडु और पुडुचेरी के लोगों ने, बल्कि मछुआरों ने भी राहत की सांस ली।

Cyclone Nivar से निबटने को हुए प्रयास

  • निवार चक्रवाती तूफान से निपटने के लिए तमिलनाडु और पुडुचेरी की सरकारों की तरफ से पूरी तैयारी की गई थी। चेन्नई के साथ 16 जिलों में तमिलनाडु सरकार ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1880 के अंतर्गत सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया था।
  • उसी तरह से पुडुचेरी के उपराज्यपाल किरण बेदी ने भी लगातार स्थिति पर नजर बना कर रखी थी। ट्वीट के जरिए उन्होंने रात के 3:00 बजे भी यह जानकारी दी थी कि इस वक्त सुबह के 3:00 बज रहे हैं और हालात नियंत्रण में हैं।
  • इसके बाद जब समाचार एजेंसी एनआईए ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के हवाले से यह ट्वीट किया कि गंभीर स्थिति में पहुंचा चक्रवाती तूफान निवार अब कमजोर पड़ गया है और अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में लौट आया है, तो फिर सभी ने राहत की सांस ली।

निष्कर्ष

Cyclone Nivar का खतरा टल तो गया है, लेकिन अब भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक एक और चक्रवाती तूफान के आने की आशंका जताई जा रही है। इस वजह से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और आंध्र प्रदेश के लिए चेतावनी भी जारी कर दी गई है। हालांकि, जिस तरीके से तमिलनाडु और पुडुचेरी की राज्य सरकारों ने चक्रवाती तूफान निवार से निपटने की पूरी तैयारी की और इससे जनजीवन को ज्यादा प्रभावित नहीं होने दिया, वैसी ही तैयारी यदि इन चारों राज्यों की सरकारें भी कर लें तो आने वाले चक्रवाती तूफान से भी प्रभावी तरीके से निबटा जा सकता है।

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