Diego Maradona: ‘हैंड ऑफ़ गॉड’ से ‘सदी के गोल’ तक फुटबॉल के जादूगर की दास्तां

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Diego Maradona

“एक सर्वकालिक खिलाड़ी. जी हां, याद रखियेगा यहाँ हम ‘सर्वकालिक’ शब्द का उपयोग कर रहे हैं. एक ऐसा खिलाड़ी जिसके अंदर गुण भी थे तो अवगुण भी थे. जिसे बदनामी का डर नहीं था. जो अद्भुत के साथ बाग़ी और गुस्सैल भी था. फ़ुटबाल का जादूगर था. लोग उसे जीनियस डिएगो माराडोना (Diego Maradona) के नाम से जानते थे.”

25 नवंबर 2020, बुधवार का दिन विश्वभर के खेल प्रेमियों के लिए एक सदमें की खबर लेकर आया था. ये खबर थी अर्जेंटीना के अपने जमाने के दिग्गज फुटबॉलर डिएगो माराडोना (Diego Maradona) के निधन की. बता दें कि अर्जेंटीना की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार माराडोना की मौत दिल का दौड़ा पड़ने से हुई है. डिएगो माराडोना लंबे समय से बीमार चल रहे थे. आज से दो सप्ताह पहले ही माराडोना के ब्रेन की सर्जरी हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वो सर्जरी ब्रेन में एक क्लॉट की वजह से हुई थी. 

गेम ऑफ़ ऑल टाइम फ़ुटबाल के प्लेयर ऑफ़ ऑल टाइम डिएगो माराडोना (Diego Maradona) अब इस दुनिया में नहीं रहे. रफ्तार और सूज-बूझ के खेल फ़ुटबाल में डिएगो माराडोना के पास ऐसा करिश्माई अंदाज था. जो सभी खेल प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देता था.

इस लेख के मुख्य बिंदु-

  • डिएगो माराडोना: फ़ुटबाल के जीनियस
  • 20वीं सदी के सबसे महान फ़ुटबॉलर
  • “हैंड ऑफ़ गॉड और गोल ऑफ़ सेंचुरी” के पीछे की कहानी
  • माराडोना: संक्षेप सफ़रनामा
  • सरांश

डिएगो माराडोना: फ़ुटबाल के जीनियस-

 अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के झुग्गी-झोपड़ियों वाले एक कस्बे में आज से 60 साल पहले फ़ुटबाल के जीनियस डिएगो माराडोना (Diego Maradona) का जन्म हुआ था. फ़ुटबाल के सुपरस्टार बनने के बाद जैसे माराडोना फ़ुटबाल को छकाते हुए गोल पोस्ट पर डाला करते थे. ठीक उसी तरह उन्होंने अपने बचपन में गरीबी को भी छकाते हुए मात दी थी.

  • डिएगो माराडोना के खेल में ऐसा करिश्मा था कि कई लोग जिनकी तादाद काफी ज्यादा है उन्हें ब्राज़ील के महान फ़ुटबॉलर पेले से भी शानदार खिलाड़ी मानते हैं.
  • 491 मैचों में डिएगो माराडोना ने कुल 259 गोल दागे थे.
  • डिएगो माराडोना के पास फ़ुटबाल की अद्भुत क्षमता है. इस बात का अंदाज़ा उनके बचपन से ही लगने लगा था. महज़ 16 साल की ही उम्र में माराडोना ने अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल जगत में क़दम रख दिया था.
  • डिएगो माराडोना का कद 5 फीट 5 इंच का था. इसी के साथ उनका शरीर भी समान्य से मोटा हुआ करता था.

20वीं सदी के सबसे महान फ़ुटबॉलर(Diego Maradona)

इस बात को बताने से पहले आपसे इल्तिजा है कि लेख के पहले शब्द पर गौर करें. वो शब्द है सर्वकालिक खिलाड़ी. अगर हम हर सदी के सबसे बेहतरीन फुटबालर की लिस्ट भी बनाएं तो उसमे भी माराडोना का नाम शीर्ष पर ही आएगा.

  • जब 20वीं सदी के सबसे महान फ़ुटबॉलर के लिए एक सर्वेक्षण हुआ था. तो उसमे भी डिएगो माराडोना ने पेले को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया था.
  • हालाँकि इसके बाद फ़ीफ़ा ने वोटिंग के नियम बदल दिए थे. जिसके बाद पेले और डिएगो माराडोना को संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया था.
  • चतुराई, तेज़ी, चौकन्नी नज़र, ड्रिब्लिंग ये सारे गुण डिएगो माराडोना के अंदर थे.

“हैंड ऑफ़ गॉड और गोल ऑफ़ सेंचुरी” के पीछे की कहानी-

 आपको बता दें कि डिएगो माराडोना ने अर्जेंटीना के लिए कुल 91 मैच खेले थे, जिनमें उन्होंने कुल 34 गोल दागे थे. ये फिगर उनके खेल के करियर का एक हिस्सा मात्र है. डिएगो माराडोना ने ही साल 1986 के विश्वकप में अर्जेंटीना को जीत दिलवाई थी. साल 1986 का विश्वकप  मेक्सिको में आयोजित हुआ था.

  • साल 1986 के वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल में माराडोना ने कुछ ऐसा किया था. जिसकी चर्चा आज उनके मरने के बाद भी हो रही है.
  • अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच मेक्सिको में क्वार्टर फ़ाइनल का यह मैच हो रहा था. इस मैच के ऊपर दोनों ही देशों की साख भी दांव में लगी हुई थी. इसके पीछे का कारण ये था कि इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच सिर्फ़ चार साल पहले फ़ॉकलैंड्स युद्ध हुआ था. तनाव दर्शकों के दिमाग के साथ खेल के मैदान पर भी था.
  • उस तनाव का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 22 जून 1986 को साँसें थमा देने वाले उस रोमांचक मैच में 51 मिनट बीत जाने के बाद भी दोनों टीमों में से किसी ने भी 1 भी गोल नहीं किया था.
  • दोनों ही टीमें एक दूसरें का दांव काट रहीं थीं. लेकिन अब कुछ ऐसा होने वाला था. जिसे फ़ुटबाल के इतिहास में दर्ज होना है.
  • 51 मिनट बीत जाने के बाद कुछ ऐसा हुआ जिसपर रेफरी की भी नजर नहीं गई. हुआ कुछ ऐसा कि माराडोना विपक्षी टीम के गोलकीपर पीटर शिल्टन की तरफ़ उछले.  पीटर शिल्टन का ध्यान माराडोना की तरफ था. तभी माराडोना ने अपने सर और हाँथ की मदद लेते हुए फुटबॉल को गोल पोस्ट के अंदर डाल दिया था. उस वक्त रेफरी ने ये ध्यान नहीं दिया था कि फ़ुटबॉल पर माराडोना का हाँथ भी लगा था.
  • हाँथ का इस्तेमाल होने की वजह से ही वो गोल विबादों का जड़ बन गया है. आज भी फुटबॉल के बड़े विवादों में उस गोल का नाम लिया जाता है.
  • अगर हम फुटबॉल के नियमों की बात करें तो उसके हिसाब से माराडोना के द्वारा किया गया गोल सही नहीं था. वो एक फ़ाउल गोल था. जिसके लिए सज़ा के तौर पर माराडोना को ‘येलो कार्ड’ दिखाया जाना चाहिए था.
  • वीडियो असिस्टेंस टेक्नॉलजी की कमी होने की वजह से और रेफरी के ना देख पाने की वजह से उसे गोल माना गया और इसी के साथ इंग्लैंड के विरुद्ध हो रहे उस मैच में अर्जेंटीना 1-0 से आगे हो गया था.   
  • मैच के बाद जब माराडोना से उस गोल को लेकर सवाल किये गये थे. तो उन्होंने जवाब दिया था कि उन्होंने वो गोल अपने सिर और भगवान के हाँथ की मदद से किया था. उसी के बाद से वो घटना फुटबॉल के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई और उसे ‘हैंड ऑफ़ गॉड’ के नाम से याद किया जाता है.
  • उस मैच को अभी एक और इतिहास बनाना था. माराडोना ने जब हाँथ की मदद से गोल दाग दिया. तब उसके बाद अर्जेंटीना के फैन्स की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. मैदान में चारों तरफ माराडोना का नाम गूंज रहा था.
  • ठीक 4 मिनट बाद फ़ुटबॉल के इतिहास को एक और मंज़र को अपने अंदर दर्ज करना था. ये मंजर था ‘गोल ऑफ़ द सेंचुरी’ यानी ‘सदी का गोल’ होने का.
  •  डिएगो माराडोना अब बताने वाले थे कि आने वाली पीढ़ी उन्हें फुटबॉल के जादूगर के तौर पर क्यों याद करेगी? तब उन्होंने अपना करिश्माई खेल दिखाया, फुटबॉल को इंग्लैंड के 5 खिलाड़ियों से छकाते हुए गोल कीपर शिल्टन के पास ले जाते हुए दिखे.
  • तब शिल्टन ने भी अपनी सूझबूझ दिखाते हुए डिएगो माराडोना की तरफ अप्रोच किया. लेकिन डिएगो माराडोना ने यहां दिखा दिया कि शिल्टन अभी तुम्हें काफी कुछ सीखना बाकी है. शिल्टन को भी चकमा देते हुए डिएगो माराडोना ने फुटबॉल को गोल पोस्ट के अंदर डाल दिया था.
  • डिएगो माराडोना के द्वारा किये गये उस गोल को ‘गोल ऑफ़ द सेंचुरी’ यानी ‘सदी का गोल’ के नाम से याद किया जाता है.

उस मैच के बारे में बात करते हुए माराडोना ने कहा था कि “वो मैच जीतने से कई ज्यादा महत्वपूर्ण था क्योंकि उस जीत के साथ ही इंग्लैंड वर्ल्ड कप से बाहर हो गया था.”

माराडोना: संक्षेप सफ़रनामा-

  • साल 1977- माराडोना ने इंटरनेशनल फुटबॉल में अपनी शुरुआत की थी. मैच अर्जेंटीना बनाम हंगरी था.
  • साल 1982- माराडोना ने बार्सिलोना में दो साल का सफर पूरा कर लिया था. अब वो नेपोली में शामिल हो चुके थे.
  • साल 1986-  डिएगो माराडोना के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण साल में से एक, इसी साल उन्होंने अर्जेंटीना को अकेले दम पर वर्ल्ड कप जितवाया था.
  • साल 1990- अर्जेंटीना इसी साल हुए वर्ल्ड कप में रनर अप था. कप्तान डिएगो माराडोना ही थे.
  • साल 1991- डिएगो माराडोना के जीवन का एक और महत्वपूर्ण साल, लेकिन वजह खराब थी. इसी साल माराडोना ड्रग टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गये थे. इसके बाद उनके ऊपर 15 महीनों का बैन भी लगा था.
  • साल 1994- इस साल फुटबॉल वर्ल्ड कप अमेरिका में हो रहा था. इस वर्ल्ड कप में  डिएगो माराडोना डोप टेस्ट में फेल हो गये थे. जिसके बाद उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था.
  • साल 1997- इसी साल डिएगो माराडोना ने प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल से रिटायरमेंट का ऐलान किया था.
  • साल 2010- प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने दो सालों तक अर्जेंटीना टीम के मैनेजर की भूमिका भी निभायी थी. इसी दौरान उनकी टीम ने वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल तक के सफर को तय किया था.  क्वार्टर फ़ाइनल से बाहर होने के बाद माराडोना ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

सरांश-

आसमान में चमकते सितारे की तरह डिएगो माराडोना फुटबॉल के इतिहास में हमेशा चमकते ही रहेंगे. उन्होंने अर्जेंटीना के अलावा बार्सिलोना और नेपोली जैसे नामी फ़ुटबॉल क्लबों के लिए भी खेला था. साल 1982 की बात है जब डिएगो माराडोना तीन मिलियन पाउंड में स्पेन के फ़ुटबॉल क्लब बार्सिलोना और दो साल बाद इटली के क्लब नेपोली में शामिल हुए थे. नेपोली से उन्होंने 5 मिलियन पाउंड में करार किया था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये बात भी कही जाती है कि डिएगो माराडोना ने अपने करियर का सबसे अच्छा क्लब फुटबॉल इटली में ही खेला था. इसलिए शायद माराडोना की इटली में इतनी ज्यादा प्रसिद्धि है.

“अविश्वसनीय,बदनाम, बाग़ी और जीनियस फुटबॉलर डिएगो माराडोना ने अपने पीछे एक इतिहास छोड़ा है. जिसे अभी काफी पढ़ा और लिखा जाना बाकी है.”  

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