कौन हैं आनंद कुमार?

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“आंसुओं से नजरें चुराकर हंसने का हुनर देखना है तो सुपर 30 के आँगन में एक बार जरूर आइएगा”, यह कथन किसी विज्ञापन का नहीं है। सुपर 30 के नाम से चलने वाले एक छोटे से स्कूल के अध्यापक का गर्व से भरा कथन है जो पिछले 15 वर्षों से प्रति वर्ष 30 गरीब छात्रों को आईआईटी परीक्षा की तैयारी करवा रहे हैं।

कौन हैं आनंद कुमार :

वर्ष 1973 का पहला दिन जब एक साधारण बालक ने बहुत साधारण परिवार में जन्म लिया। पटना के एक छोटे से शहर के डाक बाबू और साधारण पापड़ बेचने वाली माता के घर जिस बालक ने जन्म लिया, उसने शिक्षा में साधारण स्तर पर सम्झौता नहीं किया। सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए आनंद ने गणित को अपना प्रिय विषय बनाया। उनके शैक्षिक स्तर ने उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविध्यालया तक पहुँचने का मौका दिया, लेकिन गरीबी के कारण वहाँ तक नहीं पहुँच पाये। लेकिन आय की कमी ने उनके पढ़ने के उत्साह को कम नहीं होने दिया। स्नातक की पढ़ाई के दौरान उनके नंबर थ्योरी पर लिखे पेपर मेथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मेथेमेटिकल गेजेट में प्रकाशित हुए, जो अपने आप में सम्मान की बात है।

किस्मत की एक अन्य परीक्षा इनके सामने आई जब 23 अगस्त 1994 को इनके पिता का निंधन हो गया। इस कारण आय का मुख्य स्त्रोत खत्म हो गया और आनंद कुमार ने अपनी माता का हाथ बटाने का बीड़ा उठाया। स्वाभिमानी आनंद ने अपने पिता की मृत्यु पर सरकार द्वारा अनुकंपा से मिलने वाली नौकरी न करके अपने बूते पर काम करने का फैसला किया।

जीवन की राह :

युवा आनंद ने अपनी माँ के साथ पापड़ बेचते हुए गरीब वर्ग के मेधावी छात्रों को गणित की शिक्षा देने के लिए ‘रामानुजम स्कूल ऑफ मेथेमेटिक्स’ नाम का स्कूल खोल दिया। दो छात्रों से शुरू हुआ यह स्कूल जिसमें 500 रुपए की ट्यूशन फीस लेने का फैसला किया गया। इसी दौरान एक अत्यंत निर्धन छात्र जिसके पास यह पैसे देने की भी सामर्थ्य नहीं थी, आनंद के पास आया। उसने मानों एक नया ही दीपक जला दिया। आनंद ने उसे मुफ्त शिक्षा दी और वह छात्र आईआईटी की परीक्षा में सफल हो गया।

सुपर 30 की शुरुआत :

आनंद कुमार ने 2002 में एक ऐसे संस्थान की स्थापना करी जहां उन सभी छात्रों को जो आगे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन धन की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते हैं। उन्होनें ‘सुपर 30’ नाम से एक कोचिंग सेंटर खोला जिसमें प्रति वर्ष 30 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इन छात्रों को आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कारवाई जाती है। तब से यह संस्थान हर छात्र को उच्चतम शिक्षा के इस प्रवेश द्वार तक पहुंचाने का जो बीड़ा उठाता है, उसे शत-प्रतिशत पूरा करता है। इस यात्रा में अब तक 330 यात्री जुड़े थे जिसमें से 281 आईआईटी और इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश पा चुके हैं।

दुनिया ने लोहा माना :

‘सुपर 30’ ने विश्व स्तर पर अपना लोहा मनवा लिया है। वर्ष 2010 में टाइम्स पत्रिका ने ‘द बेस्ट ऑफ एशिया’ की सूची में शामिल किया था। प्रसिद्ध डिस्कवरी चैनल ने भी आनंद कुमार के सुपर 30 को अपने कार्यक्र्म के लिए चुना था। जापान के टी वी शो में भी इन्हें स्थान दिया गया। अब खबर है की आनंद कुमार के जीवन पर एक फिल्म भी बन रही है।

आनंद कुमार ने अब सुपर 30 के दायरे को बढ़ाने का निर्णय लिया है।

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