देश की विविधता में रंग घोलते हैं भारत के ये 5 सबसे प्रमुख त्योहार

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भारत में अलग-अलग जातियों और सम्प्रदायों के लोग रहते हैं जो कई तरह के त्यौहार मनाते हैं। इसी कारण भारत को त्यौहारों का देश भी कहा जाता है। भारत में इतनी विभिन्नता होते हुए भी काफी एकता है और लोग साथ मिलकर सभी त्यौहार बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। यहां हम आपको भारत के पांच ऐसे ही सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो देश की विविधता में रंग घोलते हैं।

1. मकर संक्रांति

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मकर संक्रांति भारत में ही नहीं, बल्कि नेपाल में भी मनाया जाता है। यह हिंदुओं का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। हर साल यह त्यौहार जनवरी माह के 14 या 15वें दिन को मनाया जाता है। इस त्यौहार को संक्रांति या उत्तरायणी भी बोला जाता है। इस दिन सूरज धनु राशि को छोड़कर मकर में प्रवेश करता है। इसी वजह से इसका नाम भी मकर संक्रांति पड़ा है।

प्राचीन कथा के मुताबिक सूर्यदेव ने अपने बेटे शनिदेव को पसंद नहीं करने के कारण उन्हें और उनकी मां छाया को खुद से अलग कर दिया था, जिससे क्रोधित होकर शनिदेव और उनकी मां ने सूर्यदेव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया था। सूर्यदेव की दूसरी पत्नी संज्ञा से जन्मे यमराज ने कठोर तपस्या करके पिता सूर्यदेव को कुष्ठ रोग से आजादी दिलवाई थी। हालांकि, सूर्यदेव इतने क्रोधित थे कि उन्होंने शनिदेव और उनकी माता के घर में शनिदेव की राशि कुंभ को जलाकर खाक कर दिया था, जिसमें केवल तिल ही बचा था। बाद में यमराज के अनुरोध पर सूर्यदेव के शनिदेव के पास आने पर तिल से पूजा किये जाने से खुश होकर सूर्यदेव ने शनिदेव को उनका दूसरा घर मकर दे दिया था। तभी से मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा के दौरान तिल का महत्व स्थापित हो गया।

2. बैसाखी

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हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाने वाला पर्व बैसाखी काफ़ी रंग बिरंगा त्यौहार है। यह एक राष्ट्रीय पर्व है और देश के कई जगहों पर इसे खेती का पर्व भी कहा जाता है। यह पर्व एक कृषि पर्व है और रबी की फसल पक जाने पर मनाया जाता है। इसी माह में किसान रबी की फसल काटते हैं और फिर इन्हें बेचते हैं, जिससे इनके घर में खुशहाली आती है। सूर्य का इस दिन मेष राशि में प्रवेश होता है। यही नहीं, 13 अप्रैल के दिन ही 1699 ईस्वी में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह द्वारा खालसा पंथ की स्थापना की गई थी। केवल सिखों ही नहीं, बल्कि हिंदुओं के लिए भी यह त्योहार बड़ा मायने रखता है। बैसाखी के दिन ही यदि कुंभ मेले का भी संयोग बन जाता है, तो इस दिन स्नान का महत्व ही कुछ और होता है। बैसाखी के अवसर पर अग्नि को नया अन्न समर्पित किया जाता है। साथ ही सिख समाज में बैसाखी के दिन सामूहिक जन्मदिवस भी मनाया जाता है। बैसाखी के त्योहार को बलिदान के त्योहार के नाम से भी इसलिए जानते हैं कि इसी दिन सिखों के नौवें गुरु तेगबहादुर सिंह को औरंगजेब द्वारा दिल्ली के चांदनी चौक पर फांसी पर लटका दिया गया था।

3. लोहड़ी

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लोहड़ी मकर संक्रांति के ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है और यह एक बहुत ही प्रसिद्ध कृषि पर्व है जो खासतौर पर पंजाब में मनाया जाता है। यह त्यौहार पौष माह के अंतिम दिन को सूरज डूबने के बाद मनाया जाता है। इस पर्व पर लोग आग के चारों ओर बैठते हैं और इस दौरान लावा, मूंगफली आदि खाकर काफी हर्ष से इस पर्व को मनाते हैं। पहले यह पर्व तिलोड़ी के नाम से भी जाना जाता था, क्योंकि यह तिल और रोड़ी यानी कि गुड़ की रोटी नामक दो शब्दों से मिलकर बना था। जैसे-जैसे समय बीता, इसका नाम बदलते-बदलते लोहड़ी हो गया। यही वजह है कि इस दिन तिल और गुड़ खाने के साथ इसे बांटने का बड़ा ही महत्व है। लोहड़ी दरअसल पौष माह की आखिरी रात को मनाया जाने वाला त्योहार है। लोहड़ी को मनाने के लिए दौरान लोग गज्जक, मक्का, खील और रेवड़ी आदि भी खाते हैं। खासकर मक्के की रोटी और सरसों का साग इस अवसर पर प्रमुखता के साथ परोसे और खाये जाते हैं। एक मान्यता के मुताबिक संत कबीरदास की पत्नी लोई की याद में भी लोहड़ी मनाने की परंपरा चली आ रही है। वहीं, पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रजापति दक्ष के यज्ञ में भगवान भोलेनाथ की पत्नी सती के कूदकर आत्मदाह करने की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। लोहड़ी के दिन ईरान में नववर्ष मनाया जाता है।

4. होली

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होली एक रंगों का त्यौहार है और भारत के सभी हिस्सों में मनाया जाता है। इस पर्व के दिन लोग सारे गिले शिकवे भुला कर एक दूसरे को गले लगाते हैं और एक दूसरे के चेहरे पर रंग और गुलाल लगाते हैं। यह त्यौहार फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली की पूर्व संध्या पर होलिका दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पौराणिक कथा के मुताबिक भक्त प्रह्लाद के नास्तिक पिता हिरण्यकश्यपु ने अपने बेटे की ईश्वर भक्ति से क्रोधित होकर उसे मारने के लिए अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसके पास एक ऐसी चुनरी थी, जिसे ओढ़कर यदि वह आग पर बैठे तो वह जल नहीं सकती थी। वह भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई, परंतु प्रह्लाद की भक्ति से चुनरी उड़कर प्रह्लाद पर आ गिरी और होलिका जलकर मर गई। तभी से भगवान की भक्ति पर अटूट श्रद्धा रखने का संदेश देते हुए और बुराई पर अच्छाई की जीत के नाम पर होलिका दहन किया जाने लगा। होली दरअसल होलिका दहन से ही जुड़ा हुआ त्योहार है। होली के अवसर पर शाम के वक्त अपने से बड़ों के पैरों पर अबीर या गुलाल डालकर उनका आशीर्वाद लेने की भी परंपरा है।

5. दिवाली

diwali

दिवाली शरद ऋतू में मनाया जाता है और इसे रौशनी का पर्व भी कहा जाता है। दीपावली भारत का बहुत ही मुख्य पर्व है इसी दिन प्रभु राम रावण को हरा कर 14 वर्षों के बाद अयोध्या वापस आये थे। दिवाली के दिन सभी लोग अपने घरों को दीपक और लाइट से सजाते हैं। दिवाली का त्योहार बुराई के खिलाफ अच्छाई की जीत का प्रतीक है। साथ ही इस पर्व पर माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की भी पूजा की जाती है। स्वच्छता का संदेश देने वाले इस त्योहार में माता लक्ष्मी की पूजा करने से जहां बरकत आती है, वहीं भगवान श्रीगणेश की पूजा करने से जीवन के सारे बिध्न खत्म होने लगते हैं, ऐसी मान्यता है। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस और एक दिन पहले नरक चतुर्दशी बनाई जाती है। दीवाली के बाद गोवर्धन पूजा और भैया दूज भी मनाया जाता है।

चलते-चलते

भारत में कई अन्य त्यौहार भी मनाये जाते हैं, जिनसे लोग एक दूसरे के करीब आते हैं। त्योहारों के माध्यम से लोगों को अपनी रोज़मर्रा ज़िन्दगी से थोड़े पल अपने परिवार और मित्रों के साथ मानाने को भी मिलते है। ये त्यौहार हमारे देश के गौरव हैं और हमारी एकता को बनाये रखते हैं।

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