जब 1932 में Iraq को Britain से मिली Independence

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when iraq got independence

3 अक्टूबर वर्ष 1932 में इराक के ऊपर से ग्रेट ब्रिटेन का अधिपत्य खत्म हो गया था, जिसके बाद इराक राष्ट्रसंघ का सदस्य एक स्वतंत्र राष्ट्र की हैसियत से चुन लिया गया था। यहां हम आपको ब्रिटेन से इराक की आजादी के बारे में बता रहे हैं।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • इराक का संक्षिप्त इतिहास
  • इराक पर ब्रिटेन का अधिकार
  • When Iraq got Independence

इराक का संक्षिप्त इतिहास

मेसोपोटामिया की कई प्राचीन सभ्यताओं में इराक का इतिहास छुपा हुआ है। यही कारण है कि लिखित इतिहास के प्राचीनतम स्थल के तौर पर यह जाना जाता है। साम्राज्यों के खंडहर के नाम से भी इराक विख्यात है। इसकी वजह यह है कि यहां अनेक साम्राज्यों ने जन्म लिया। फले-फूले और फिर मिट्टी में मिल गए। इराक की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में सुमेरी, बाबुली, असूरी और खल्दी सभ्यताएं शामिल हैं, जिनमें कि ईसा से 3500 वर्ष पूर्व की सुमेरी सभ्यता सबसे प्राचीन मानी गई है।

इराक पर ब्रिटेन का अधिकार

  • वर्ष 1914 में जब प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई थी तो तुर्की जर्मनी की तरफ से इस युद्ध का हिस्सा बन गया था।
  • इसी दौरान अंग्रेजी सेना इराक में दाखिल हो गई थी और 22 नवंबर, 1914 को पहले अंग्रेजों ने बसरा पर और उसके बाद 11 मार्च, 1917 को बगदाद पर भी अपना अधिकार जमा लिया था।
  • अंग्रेजो के इस आक्रमण के पीछे दो बड़े मकसद छुपे हुए थे। एक तो अंग्रेजों को आबादान में स्थित एंग्लो पर्शियन ऑयल कंपनी को हर तरीके से महफूज रखना था, जबकि अंग्रेजों का दूसरा उद्देश्य मोसुल में मौजूद तेल के विशाल भंडार पर अधिकार जमाना था।
  • जब युद्ध समाप्त हो गया तो इसके बाद अंग्रेजों का प्रभावक्षेत्र इराक में बन गया। अपनी तरफ से अंग्रेजों ने 23 अगस्त, 1921 को इराक में एक कठपुतली अमीर फैजल को यहां का राजा घोषित कर दिया।

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When Iraq got Independence?

When did Iraq gain independence from Britain? यह सवाल अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है। इसका जवाब निम्नवत है:

  • इराक और ग्रेट ब्रिटेन के बीच वर्ष 1930 में एक संधि हुई थी। यह एक विधिवत 25 वर्षीय संधि थी।
  • इसमें एक शर्त यह भी रखी गई थी कि जितनी जल्दी संभव हो सके इराक को राष्ट्रसंघ में शामिल करने के लिए ग्रेट ब्रिटेन सिफारिश कर देगा।
  • इसी संधि की एक धारा के मुताबिक इराक के ऊपर से ग्रेट ब्रिटेन का अधिपत्य इराक के ऊपर से 4 अक्टूबर, 1932 को समाप्त हो गया। इसके बाद इराक एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में सामने आया।
  • When Iraq got Independence, उसे राष्ट्रसंघ का सदस्य भी बना लिया गया।
  • इराक ने एंग्लो-इराकी संधि की अवधि को बढ़ाने का आग्रह किया था, जिसे स्वीकार करते हुए अक्टूबर, 1947 तक बढ़ा दिया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के एक सदस्य के रूप में 26 जून, 1954 को इराक को अपना लिया गया। इराक की अरब राष्ट्र के संघ की स्थापना में बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
  • मध्यपूर्व सुरक्षा योजना के अंतर्गत बगदाद पैक्ट गुट बनाया गया था। इराक इसका एक प्रमुख सदस्य था। हालांकि, हाल में जो यहां राजनीतिक क्रांति हुई, उसकी वजह से राजतंत्र का यहां से उन्मूलन हो गया। इराक ने इसके बाद बगदाद पैक्ट गुट के देशों से भी अपने आपको अलग कर लिया।
  • इराक में 14 जुलाई, 1958 को सैनिक क्रांति हो गई थी। इस दौरान सैनिक अधिकारियों के एक दल की तरफ से इराक को गणतंत्र भी घोषित कर दिया गया था। इसके अलावा संघ से भी इसे पृथक कर लिया गया था।
  • यह क्रांति इराक में बड़ी ही महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इस दौरान न केवल इराक के तत्कालीन शाह फैजल द्वितीय मारे गए, बल्कि शाह के चाचा, भूतपूर्व शासक अमीर अब्दुल्ला और प्रधानमंत्री नूरी अल सईद भी इसमें मारे गए थे।
  • जनरल कासिम अगले 4 वर्षों तक इराक में शासन करते रहे, मगर जल एवं वायु सेना ने 8 फरवरी, 1963 को एक बार फिर से सैनिक क्रांति कर दी। इसके बाद जनरल कासिम को 9 फरवरी, 1963 को फांसी पर चढ़ा दिया गया। राष्ट्रीय असेंबली की हैसियत से क्रांतिकारी कमान ने यहां फिर कार्यभार संभाल लिया।
  • अस्थाई रूप से 4 मई,, 1964 को इराक का संविधान स्वीकृत कर लिया गया। इसमें स्वतंत्र एवं प्रभुसत्तासंपन्न लोकतांत्रिक समाजवादी इस्लामी अरब गणराज्य की इराक को संज्ञा दे दी गई और अरब एकता को इसके सबसे प्रमुख उद्देश्य के रूप में रखा गया।
  • जनरल कासिम के शासनकाल के वक्त से ही कुवैती प्रभुसत्ता से जुड़ा जो झगड़ा चला आ रहा था, उसे खत्म करने के लिए राष्ट्रपति अहमद हसन बक्र की अगुवाई में नई सरकार ने कुवैत से एक संधि कर ली। हालांकि, कुर्द की समस्या का शांतिपूर्ण हल तुरंत निकाला जाना संभव नहीं हो सका।
  • कुर्दों के साथ 10 फरवरी, 1964 को युद्धविराम की घोषणा तो हुई थी, मगर 1965 में एक बार फिर से अंग्रेजों के साथ युद्ध की शुरुआत हो गई थी।
  • वैसे, क्रांतिकारी कमान परिषद ने मार्च, 1970 में संवैधानिक आधार पर हमेशा के लिए कुर्द समस्या को सुलझा लिया था।
  • संयुक्त अरब गणराज्य के साथ इराक का 16 अक्टूबर, 1964 को एक समझौता हुआ। दोनों देश तुरंत संयुक्त राजनीतिक नेतृत्व की स्थापना के लिए सहमत हो गए। साथ ही इन्होंने यह तय किया कि अगले दो वर्षो के अंदर संवैधानिक आधार पर उभय देशों का वे एकीकरण भी कर लेंगे।
  • इस अवधि को बाद में 2 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया था। दोनों देशों के बीच हर तरह के सीमा कर को जून, 1970 में खत्म कर दिया गया।

निष्कर्ष

निश्चित तौर पर इराक के लिए यह आजादी बहुत ही महत्वपूर्ण थी। इराक में आजादी के बाद से बड़े पैमाने पर राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिला। हालांकि, बाहरी देशों की दखलंदाजी से इराक इसके बाद भी नहीं बच सका। विशेषकर, वर्ष 2003 के बाद से इराक की स्थिति बेहद खराब होती चली गई। आर्थिक तौर पर इराक इसके बाद से बहुत पीछे चला गया।

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