खजुराहो के स्मारक – वास्तविक प्राचीन भारत

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खजुराहो को हिन्दू और जैन धर्म के मंदिरों का सबसे बड़ा समूह कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे प्रसिद्द, खूबसूरत और ऐतिहासिक विरासतों में गिना जाता है। खजुराहो को मुख्य रूप से वास्तु विशेषज्ञता, कामुक मूर्तियों और बारीक़ नक्काशियों के लिए जाना जाता है। बस इतना हे नहीं, यह यूनेस्को की वैश्विक धरोहर की सूचि में भी शामिल है। सामान्य रूप से खजुराहो के मंदिर, यहाँ उकेरी गईं मूर्तियों और स्त्री-पुरुष के सम्बन्धों को लेकर ही चर्चित हैं। लेकिन वास्तव में इन मंदिरों का इतिहास तो कुछ और ही बातें बताता है।

खजुराहो के मंदिरों का रहस्य:

भारत के मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे का नाम खजूराहो है। लेकिन विश्व पर्यटन मानचित्र पर इस कस्बे को ताजमहल के बाद दूसरा स्थान प्राप्त है। मध्यकालीन स्थापत्य कला के बेजोड़नमूनों के रूप में यह मंदिर ९३० – ११३० ई.पू. के मध्य में बनाए गए थे। उस समय इनकी संख्या ८५ थी जो अब घटते हुए केवल २२ रह गई है।

चंदेल राजवंश जिस समय मध्य प्रदेश क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहा था उस समय चंदेल राजा धंगदेवा और यशोवर्मन ने किया था। सबसे पहला मंदिर यशोवर्मन ने विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके बाद आज का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कनदारिया महादेव मंदिर का निर्माण विध्याधर नाम के राजा ने करवाया था।

इन मंदिरों पर विभिन्न विदेशी आक्रमणकारियों ने न केवल राज्य को नुकसान पहुंचाया बल्कि इन मंदिरों के अस्तित्व को भी मिटाने की भरपूर कोशिश करी गई। महमूद गजनवी (१०२२ई.पू.), सिकंदर लोदी (१४९५ ई.पू.) इन मंदिरों के विनाशकर्ताओं में प्रमुख माने जाते हैं।

खजुराहो में विशेष क्या है:

खजुराहो मंदिर समूह की मुख्य विशेष बातें इस प्रकार हैं:

  • इन मंदिरों में सबसे प्राचीन और वर्तमान में प्रसिद्ध कंदारिया महादेव मंदिर की ऊंचाई १०७ फिट मानी जाती है। इस मंदिर के अंदर २५६ मूर्तियाँ और बाहर ६४६ मूर्तियों की गणना करी गई है।
  • मुख्य रूप से यह मंदिर समूह बलुआ पत्थर से निर्मित है, लेकिन अपवाद स्वरूप चौंसठ योगिनी, ब्रह्मा और ललगुआँ महादेव मंदिर को ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है।
  • खजुराहो के सभी मंदिर मुख्य रूप से शैव, वैष्णव और जैन धर्म-संप्रदाय से संबन्धित हैं;
  • इन सभी मंदिरों की स्थापत्य कला में एक विशेष बात उल्लेखनीय है कि सभी मंदिर केवल नींव खोदकर नहीं बल्कि एक चबूतरा बना कर उसपर निर्मित किए गया हैं। अन्य मंदिरों की भांति इन मंदिरों में भी गर्भगृह, अंतराल, मंडप और अर्ध मंडप का निर्माण किया गया है।
  • इन मंदिरों की मूर्तियों के संबंध में आम धारणा केवल मिथुन-रात मूर्तियों को लेकर ही है, जबकि यह सत्य नहीं है। इन मंदिरों की दीवारों पर परिवार, देवी-देवता, अप्सरा और पशुओं की भी मूर्तियाँ देखी जा सकतीं हैं।
  • खजुराहो के मंदिरों की मूर्तियों की एक और बात विशेष है जो कहीं देखने में नहीं आती है। वो है इन मंदिरों में उकेरी गई मूर्तियाँ स्थायित्व के स्थान पर गतिशीलता को प्रदर्शित करतीं हैं।
  • यह मूर्तियाँ इतनी मुखर और जीवंत हैं कि ऐसा लगेगा आप एक हँसती-गाती मूर्ति को साक्षात देख रहे हैं। यह भाव दर्शकों को केवल मानवीय मूर्तियों में ही नहीं बल्कि पशु मूर्तियों में भी दिखाई देते हैं।
  • यह मंदिर समूह भोगोलिक रूप से तीन भागों जैसे पश्चमी, पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र में विभाजित किए गए हैं।
  • कुछ लोगों की मान्यता रही है कि खजुराहो मंदिर की मिथुन-रत मूर्तियाँ तंत्र साधना के उद्देशय से निर्मित की गईं थी।

खजुराहो मंदिर समूह के कुछ विशेष मंदिर :

सामान्य रूप से खजुराहो मंदिर समूह के सभी मंदिर दर्शनीय हैं, लेकिन निम्न मंदिर सबसे पहले देखने योग्य माने जाते हैं:

विश्वनाथ मंदिर : ब्रह्मा जी का प्रसिद्ध मंदिर पुष्कर के अलावा खजुराहो में भी आपको मिल जाएगा। तीन सिर वाले ब्रह्मा जी की मूर्ति के अलावा इस मंदिर के उत्तरी दिशा में शेर और दक्षिणी दिशा में हाथी की मूर्तियाँ भी आकर्षण का केंद्र मानी जाती हैं।

चित्रगुप्त मंदिर:

यमदेव के मुंशी रूप में प्रसिद्ध भगवान चित्रगुप्त जी के मंदिर बनारस के अलावा आपको खजुराहो के मंदिर समूह में भी मिल जाएँगे। इस मंदिर में भगवान सूर्य की सात घोड़ों वाली रथ पर ५ फुट ऊंची मूर्ति अपने आप में पूरा आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा इस मंदिर की दीवारों पर राजाओं के शिकार और राजसभाओं में होने वाले समूहिक नृत्य के चित्र देखते ही बनते हैं।

लक्ष्मण मंदिर:

इस मंदिर में मुख्य मूर्ति के रूप में भगवान विष्णु की मूर्ति है जो पूरी तरह से जीवंत है। इस मंदिर के द्वार पर त्रिमूर्ति के रूप में प्रसिद्ध ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अलावा विष्णु-लक्ष्मी  की मूर्ति भी दर्शनीय है। विष्णु जी के तीन अवतारों, उनके मुख्य रूप के अलावा नरसिंहा और वराह रूपों की मूर्ति भी स्थापित है।

आदिनाथ मंदिर:

यह मंदिर जैन धर्म के प्रवर्तक पहले तीर्थंकर ऋषभ देव को समर्पित है जहां दीवारों पर यक्ष-यक्षिणी की मुद्राओं को उकेरा गया है।

चतुर्भुज मंदिर:

खजुराहो के मंदिर समूहों में दक्षिणी भाग में स्थित इस मंदिर में विष्णु भगवान की बड़ी कलात्मक मूर्तियाँ स्थापित करी गई हैं।

समय की गर्त में खो गए खजुराहो के मंदिरों की खोज १८३८ में ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन टी एस बर्ट ने करी थी। इसके बाद इन मंदिरों की देखभाल पर समय और धन व्यय करा गया।  परिणामस्वरूप १९८६ में यूनेस्को ने खजुराहो के मंदिरों को विश्व धरोहर स्थल का स्थान दिया गया है। इस प्रकार एक छोटा सा गाँव विश्व की प्रसिद्ध धरोहर का संरक्षक बन गया है।

 

 

 

 

 

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