अरुण जेटली के योगदान को कभी भुला नहीं पायेगा देश

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Arun Jaitely

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली अब इस दुनिया में नहीं हैं। पिछले कुछ समय से बीमार जेटली ने 24 अगस्त 2019 को 66 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। Arun Jaitely ना केवल पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे, बल्कि साथ में वे प्रख्यात अधिवक्ता भी थे। नरेंद्र मोदी सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर अरुण जेटली की भूमिका सराहनीय रही। आइए जानते हैं अरुण जेटली के व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के साथ उनकी प्रमुख उपलब्धियों के बारे में।

ऐसे थे अरुण जेटली

दिल्ली में जन्मे अरुण जेटली की माता का नाम रतन प्रभा जेटली और पिता का नाम महाराज किशन जेटली था। जेटली की तरह उनके पिता भी एक वकील रहे हैं। जेटली ने अपनी स्कूल की पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल, नई दिल्ली से की। वर्ष 1973 में उन्होंने नई दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद वर्ष 1977 में विधि संकाय से उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि की भी डिग्री हासिल कर ली। अपने छात्र जीवन के समय से ही वे ना केवल पढ़ाई में सबसे आगे रहते थे, बल्कि अतिरिक्त गतिविधियों में भी उन्होंने ढेरों पुरस्कार हासिल किए। दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन के 1974 में वे अध्यक्ष भी रहे। बनना तो जेटली सीए चाहते थे, मगर 1977 में वकालत शुरू कर दी। अरुण जेटली का विवाह संगीता जेटली से 24 मई 1983 को हुआ था। उनके रोहन नाम के एक बेटे और सोनाली नाम की एक बेटी भी है। दोनों अपने पिता की तरह वकील ही हैं।

वाजपयी सरकार में जेटली की भूमिका

  • वर्ष 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनी तो अरुण जेटली को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी मिली। साथ में उन्हें विनिवेश राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का भी दायित्व मिला।
  • जब राम जेठमलानी ने 23 जुलाई 2000 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया तो उनकी जगह पर अरुण जेटली को कानून न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। वाजपेयी सरकार में जेटली ने जहाजरानी मंत्री व नौवहन मंत्री के रूप में भी काम किया।
  • जेटली ने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी कुछ समय तक अपनी सेवा दी। जब वर्ष 2004 में एनडीए की हार हो गई तो महासचिव के तौर पर जेटली ने फिर से भाजपा के लिए काम करना शुरू कर दिया।

NDA के सत्ता से बाहर रहने के दौरान

  • वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में जब NDA हार गई तो लाल कृष्ण आडवाणी ने अरुण जेटली को 3 जून, 2009 को विपक्ष का नेता चुना। अरुण जेटली ने भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य की भी जिम्मेदारी निभाई।
  • राज्यसभा में जब वे विपक्ष के नेता थे तो महिला आरक्षण विधेयक पर बातचीत के दौरान भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही जन लोकपाल विधेयक को लेकर उन्होंने अन्ना हजारे का समर्थन किया था।
  • वर्ष 2014 तक उन्होंने कोई सीधा चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन इस वर्ष हुए आम चुनाव में वे कांग्रेस के अमरिंदर सिंह से हार गए। इसके बाद उन्हें राज्यसभा सदस्य गुजरात से मनोनीत किया गया। मार्च 2018 में अरुण जेटली को दोबारा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सदस्य चुन लिया गया।

मोदी सरकार में अरुण जेटली (Arun Jaitely in Modi Government)

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब 26 मई 2014 को एनडीए की सरकार बनी तो अरुण जेटली को नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री के रूप में चुना। साथ में उनके पास कारपोरेट मामलों का मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय भी शामिल था।
  • अरुण जेटली के वित्त मंत्री रहने के दौरान देश में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 9 नवंबर 2016 से महात्मा गांधी श्रृंखला वाले 500 और 1000 रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया गया। इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार के साथ काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद पर अंकुश लगाना बताया गया। अरुण जेटली ने 20 जून 2017 को इस बात की पुष्टि की थी कि जीएसटी रोलआउट बिल्कुल सही ट्रैक पर जा रहा है।

अरुण जेटली की उपलब्धियां (Arun Jaitely’s Achievements)

  • वर्ष 1990 की जनवरी में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरुण जेटली को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया।
  • अरुण जेटली को वर्ष 1989 में वीपी सिंह सरकार ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के पद पर नियुक्त किया था।
  • जेटली 27 मई 2014 से 9 नवंबर 2014 तक एवं 13 मार्च 2017 से 3 सितंबर 2017 तक देश के रक्षा मंत्री भी रहे।

अंत में

चुनावी राजनीति से मेल न खाने वाला स्वभाव होने के बावजूद अरुण जेटली का राजनीतिक कद हमेशा ऊंचा रहा। उनके ज्ञान के स्तर, निर्णय लेने की क्षमता और काम के प्रति उनके समर्पण की वजह से वे हमेशा लोगों के चहेते बने रहे। बताएं, अरुण जेटली की सबसे अच्छी चीज आपको क्या लगती थी?

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