WHO ने दिए कोविड वैरिएंट्स को नाम

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31 मई को WHO ने कोरोना वायरस के नाम से सम्बंधित विभिन्न प्रकार के विरोधाभासो पर विराम लगाते हुए, कोरोना वायरस के विभिन्न प्रकारो की पहचान के लिए नामकरण पद्धति की घोषणा की है। WHO ने विभिन्न देशो मे मिले कोरोना वरिएंट्स के नाम उनकी संक्रामकता के आधार पर तय किये हैं। दुनिया अभी तक यह भी तय नहीं कर पायी है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक है या लैब में बनाया गया है। कोई भी देश कोरोना के स्वदेशी होने की पुष्टि नहीं करता है , सभी देश कोरोना वेरिएंट को उनके साथ जोड़ने पर भी विरोध जता रहे हैं। ऐसी स्थिति मे WHO द्वारा कोरोना वरिएंट्स की पहचान के लिए उनके नाम की सूची जारी करना एक सकारात्मक पहल है। WHO द्वारा ग्रीक अल्फाबेट नामकरण पद्धति के आधार पर विभिन्न कोरोना वैरिएंट्स का नामकरण किया गया है। आज के इस लेख मे हम कोरोना के वैरिएंट्स नाम के विषय मे ही बात करने वाले हैं। 

इस लेख मे आपके लिए है

  • जानिये, WHO द्वारा कोरोना वरिएंट्स को क्या नाम दिये गये हैं?
  • जानिये कैसे रखा गया कोरोना वैरिएंट्स नाम?
  • जानिये क्यों अपनायी गयी नामकरण पद्धति?
  • वेरिएंट के देशज नाम को लेकर विवाद
  • VOCs /VOIs  क्या होते हैं ?
  • WHO –एक परिचय

जानिये, WHO द्वारा कोरोना वरिएंट्स को क्या नाम दिये गये हैं?

  • सितंबर 2020 मे यूनाइटेड किंगडम (UK) में मिले वेरिएंट B.1.1.7 को ‘अल्फा’ नाम दिया गया है।
  • मई 2020 मे दक्षिण अफ्रीका में मिले  कोरोना वेरिएंट B.1.351 को ‘बीटा’ नाम दिया गया है।
  • नवम्बर 2020 मे ब्राजील में मिले P.1 कोरोना वेरिएंट को ‘गामा’ और P.2 को ‘जीटा’ नाम दिया गया है।
  • मार्च 2020 मे अमेरिका में मिले वेरिएंट B.1.427/B.1.429 को ‘एपसिलन’ और नंवबर 2020 मे B.1.526 वेरिएंट को ‘आयोटा’ नाम दिया गया है। 
  • जनवरी 2021 मे फिलिपींस में मिले कोरोना वरिएंट्स   P.3 को ‘थीटा’ नाम दिया गया है।
  • कई देशों में रिपोर्ट हो चुके कोरोना वरिएंट्स   B.1.525 को ‘एटा’ नाम दिया गया है।
  • भारत में अक्टूबर 2020 में मिले वैरिएंट B.1.617.2 को डेल्टा नाम दिया गया है.जबकि भारत में ही मिले वायरस के दूसरे स्ट्रेन  B.1.617.1  का नाम ‘कप्पा’ रखा गया है।

जानिये कैसे रखा गया कोरोना वैरिएंट्स नाम?

  • कोरोना वायरस का वास्तविक मेडिकल नाम SARS-CoV-2 है और  इसकी वजह से होने वाले संक्रमण को  Covid-19 कहते हैं।
  • WHO  ने कोरोना वेरिएंट नामकरण हेतु दुनिया भर के भागीदारों के एक विशेषज्ञ समूह को बुलाया, इस समूह मे मौजूदा नामकरण प्रणालियों, नामकरण और वायरस टैक्सोनॉमिक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और राष्ट्रीय अधिकारियों मे विशेषज्ञता वाले व्यक्ति शामिल थे।
  • WHO  द्वारा गहन परामर्श और विभिन्न संभावित नामकरण पद्धतियों की समीक्षा के बाद लेबल का चयन किया गया है।
  • WHO  ने कोरोना वेरिएंट्स के नामकरण के लिए ग्रीक भाषा के अल्फाबेट्स चयन किया है। इसके पीछे वजह है इस पद्धति का बहुत प्रचलित होना ,इसमें प्रयोग होने वाले वर्णाक्षरों अल्फ़ा, बीटा, गामा से सभी परिचित हैं।
  • WHO ने कहा कि जब ग्रीक अल्फाबेट के 24 लेटर्स खत्म हो जाएंगे, तो ऐसी ही दूसरी पद्धति का प्रयोग नाम रखने के लिए किया जायेगा।

जानिये क्यों अपनायी गयी नामकरण पद्धति?

  • कोरोना वैरिएंट्स को अलग -अलग नाम देने की सबसे बड़ी वजह थी, किसी देश का नाम कोरोना वेरिएंट्स के साथ प्रयुक्त करने पर आपत्ति जाहिर करना। जैसे – चाइना या वुहान वायरस कहने पर चीन का आपत्ति जाहिर करना।
  • कोरोना का निरंतर म्यूटेट होकर अलग -अलग रूपों मे सामने आना, और हर बार अलग-अलग लक्षण के साथ प्रकट होना। कोरोना के इस व्यवहार ने इसके एक से अधिक वैरिएंट्स बना दिये हैं। हर वेरिएंट की पहचान के लिए एक नाम होना जरुरी हो गया था जिससे आसानी से इसे पहचाना जा सके।
  • कोरोना का प्रचलित वेरिएंट नाम बहुत ही जटिल और कठिन है जैसे -B.1.617.2  G/452R.V3 इसमें नंबर ,अल्फाबेट, दशमलव आदि इसको एक गणित की पहेली बना रहा है। ये लम्बा है, असानी से पढ़ा और याद नहीं किया जा सकता है।

कोरोना वेरिएंट के देशज नाम को लेकर विवाद

  • कोरोना वेरिएंट्स के साथ नाम प्रयोग किये जाने पर सबसे पहली प्रतिक्रिया चीन के द्वारा दी गयी थी। जब कोरोना वायरस को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  ‘चाइनीज वायरस’ बोला गया था। उसके बाद कोरोना वायरस को ‘वुहान वायरस’ और ‘चीन वायरस’ भी बोला गया था , जिसकी जोरदार आपत्ति चीन द्वारा जताई गयी थी।
  • हाल ही मे, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के द्वारा कोरोना वायरस को सिंगापुर वायरस के नाम  से संदर्भित करने पर सिंगापुर सरकार द्वारा आपत्ति जाहिर की गयी थी।
  • हाल ही मे ,भारत सरकार द्वारा भी अडवाइजरी जारी करके सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इंडियन कोरोना वेरिएंट शब्द हटाए जाने का आदेश जारी किया गया था।

VOCs /VOIs क्या होते हैं ?

  • जनवरी 2020 से WHO अपने पार्टनर्स, एक्सपर्ट नेटवर्क, नेशनल अथॉरिटीज, वैज्ञानिक संस्थान और शोधकर्ताओं के साथ मिलकर कोरोना वायरस और उसके सभी वैरिएंट्स पर लगातार परिक्षण एवं शोध कर रहा है।
  • कोरोना के विभिन्न वेरिएंट्स और म्यूटेंट रूपों पर अध्ययन और शोध करने के बाद WHO ने इसे दो भागो VOCs और VOIs मे विभक्त किया है।
  • VOCs या वैरिएंट्स ऑफ कंसर्न प्रकार के वेरिएंट मे संक्रामकता में वृद्धि, अधिक गंभीर बीमारी, पिछले संक्रमण या टीकाकरण के दौरान उत्पन्न एंटीबॉडी में महत्त्वपूर्ण कमी, उपचार या टीके की प्रभावशीलता में कमी या नैदानिक उपचार की विफलता देखने को मिलती है।
  • WHO द्वारा सभी कोरोना वैरिएंट्स को VOCs यानी वैरिएंट्स ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा है। अतः अल्फ़ा, बीटा, गामा आदि सभी इसके उदाहरण हैं।
  • VOIs या वैरिएंट्स ऑफ इंट्रेस्ट यह यह एक विशिष्ट ‘जेनेटिक मार्करों’ वाला वेरिएंट है। जो सामुदायिक स्तर पर या बहुस्तरीय संक्रमण फैलाते हैं ।  लेकिन ये वैरिएंट्स गुच्छों या समूहों में लोगों को संक्रमित करते हैं. ये एकसाथ कई देशों में मिल सकते हैं।
  • B.1.617 वेरिएंट VOIs  का एक उदाहरण वायरस  है, जिसके दो म्यूटेट हैं, E484Q तथा L452R .

विश्व स्वास्थ्य संगठन एक परिचय

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO), संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतरगर्त कार्य करने वाली वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल संस्था है। इसका उद्देश्य  विश्व के देशों के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानव को स्वास्थ्य सम्बन्धी समझ विकसित करना है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7  अप्रैल 1948 मे की गयी थी। इसका मुख्यालय जिनेवा , स्विट्ज़रलैंड मे स्थित है। इसके वर्तमान महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस एडहानॉम हैं।
  • वर्तमान मे 194 देश विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य हैं तथा WHO के 150 देशो मे कार्यालय हैं साथ मे छह क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं।
  • भारत 2 जनवरी, 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन का सदस्य बना। दक्षिण-पूर्व एशिया का क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली, भारत मे स्थित है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘चेचक उन्मूलन कार्यक्रम’ के माध्यम से भारत सरकार के साथ मिलकर वर्ष 1977 में चेचक का उन्मूलन किया था।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व बैंक की मदद से विभिन्न देशो मे साल 1988  पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम (Global Polio Eradication program) चलाया है। जिसके परिणामस्वरूप भारत समेत दुनिया के बहुत से देश पोलियो मुक्त हो गये हैं।
  • WHO इबोला, कैंसर , एचआईवी, डेंगू, इन्फ्लूएंज़ा वायरस तथा गैर-संक्रामक रोगो के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम चलाकर उनके उन्मूलन के कार्यक्रमों को आयोजित करता है।
  • वर्तमान के परिपेक्ष मे विश्व स्वास्थ्य संगठन Covid -19 के विरुद्ध पर्याप्त जागरूकता , जानकारी, बचाव -सुझाव , विभिन्न देशो के मध्य कोरोना के बचाव की समझ बनाये रखना, कोरोना वैक्सीन को मान्यता प्रदान करना जैसे कार्यो को बखूबी निभा रहा है।

चलते चलते

WHO एक वित्तीय फण्ड पर आधारित संस्था है , इसको फण्ड के लिए अमीर देशो तथा NGOs की सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है , जिससे कई बार इसके ऊपर पक्षपात के आरोप लगते  रहे हैं । पिछले वर्ष कोरोना के प्रारंभिक प्रसार के समय इसका झुकाव चीन की तरफ देखा गया था , जिसकी विश्वभर मे आलोचना भी हुई थी। अपनी वित्तीय संकट के चलते कई बार WHO को आलोचना का शिकार भी होना पड़ता है। किन्तु अपनी सभी परेशानियों के साथ WHO हमेशा वैश्विक मानवता स्वास्थ्य रक्षा की अपनी मुहीम मे लगातार कार्य करता रहता है।

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