Vasco da Gama का भारत आगमन, 10 महीने में पूरी हुई थी यात्रा

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vasco da gama

Vasco da Gama का नाम आपने पहले सुना जरूर होगा। वास्को द गामा, जिन्हें कि अक्सर वास्को डी गामा के नाम से जाना जाता है, कहा जाता है कि भारत की खोज उन्होंने की थी। हालांकि, यह कहना अधिक उचित होगा कि भारत के बारे में यूरोप को अवगत कराने का काम वास्को डी गामा ने किया था। इस लेख में हम आपको Vasco da Gama के India आने के बारे में और इससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

इस लेख में आप जानेंगे :

  • वास्को डी गामा के बारे में
  • खोज निकाला भारत पहुंचने वाला मार्ग
  • 8 जुलाई को भारत यात्रा की शुरुआत
  • भारत में वास्को डी गामा और उनकी वापसी
  • कैसे हुई Vasco da Gama की मौत?

वास्को डी गामा के बारे में

  • वास्को डी गामा दरअसल एक नाविक थे, जिन्हें नई चीजें ढूंढना बहुत पसंद था। पुर्तगाल में वर्ष 1460 में इन्होंने जन्म लिया था।
  • अफ्रीका महाद्वीप का पूरा चक्कर लगाते हुए भारत तक पहुंचने वाले वास्को डी गामा पहले व्यक्ति थे। यही कारण है कि वास्को डी गामा को सर्वप्रथम भारत की खोज करने वाला इतिहास में बता दिया गया है।
  • समुद्र किनारे स्थित साइनेस (Sines) नामक एक कस्बे में वास्को डी गामा ने अपना बचपन बिताया था। उनके पिता भी एक खोजी नाविक ही थे। नाइट (knight) की उपाधि तक वास्को डी गामा के पिता को मिली हुई थी।
  • वास्को डी गामा भी बड़े हुए तो उन्होंने ठान लिया कि वे अपने पिता की तरह ही खोजी नाविक के तौर पर काम करेंगे और समुद्र में चल रहे जहाजों की कमान वे संभालेंगे।

खोज निकाला भारत पहुंचने वाला मार्ग

मसाले के लिए उस दौरान भारत बहुत विख्यात था। भारत के मसाले की यूरोप में बड़ी मांग थी, लेकिन दिक्कत ये थी कि जो इकलौता मार्ग भारत तक पहुंचने का यूरोप वालों को मालूम था, वह जमीन से होकर गुजरता था। यूरोप वालों का यहां तक पहुंचना राजनीतिक कठिनाईयों की वजह से लगभग असंभव था। साथ में इसमें खर्च भी बहुत आता।

  • पुर्तगाल के राजा चाह रहे थे किसी तरह से यदि भारत तक पहुंचने के लिए समुद्री मार्ग का पता चल जाए तो इससे उन्हें बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि भारत से मसाले लाकर यूरोप में बेचने से उन्हें बड़ी आमदनी होगी।
  • बारटोलोमीयु डियास (Bartolomeu Dias) नामक एक और पुर्तगाली खोजी के दिमाग में यह विचार आया था कि समुद्र के रास्ते यूरोप से भारत तक पहुंचा जा सकता है। Cape of Good Hope, जिसे कि उत्तमाशा अंतरीप के नाम से भी जानते हैं और जो अफ्रीका महाद्वीप के सबसे दक्षिण में समुद्र किनारे बसी हुई एक जगह है, इसकी खोज बारटोलोमीयु डियास ने ही की थी।
  • Cape of Good Hope के बारे में तब यह माना जा रहा था कि जो जहाज वहां से पूर्व दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, भारत तक उनका पहुंचना मुमकिन है।
  • इसके बाद पुर्तगाल के राजा ने यह जिम्मेवारी वास्को डी गामा को सौंप दी। राजा ने उससे कहा कि Cape of Good Hope से जो रास्ता जाता है, वह उसकी तलाश करके आये। साथ में कुछ जहाज और आदमियों को वह अपने साथ ले जाए। राजा ने साथ ही उससे व्यापार की संभावनाओं का भी पता लगाने के लिए कह दिया।

8 जुलाई को भारत यात्रा की शुरुआत

  • अब बारी आई भारत की यात्रा शुरू करने की। वास्को डी गामा 8 जुलाई, 1497 को पुर्तगाल के तट से रवाना हो गये। साथ में उनके चार जहाज चले, जिनमें लगभग 170 लोग सवार थे।
  • सबसे पहले तो वे दक्षिण में Cape of Good Hope की ओर बढ़े। यहां वे 22 नवंबर को पहुंचने में सफल रहे। अफ्रीका के तट के सहारे उत्तर की ओर वे बढ़ते गये। साथ में जो व्यापारिक बंदरगाह मिल रहे थे, वहां पड़ाव भी वे डालते रहे।
  • Vasco da Gama को Route की तलाश थी, जो उन्हें भारत पहुंचा दे। ऐसे में जब मालिंदी (Malindi) बंदरगाह वे 14 अप्रैल, 1498 को पहुंचे तो भारत के लिए किस दिशा में बढ़ा जाए, यह एक नाविक ने उन्हें बता दिया।
  • फिर क्या था, मानसून हवाओं की वास्को डी गामा ने मदद ली और अपने दल के साथ भारत की ओर वे और उत्साह से बढ़ चले। उनकी यह यात्रा 20 मई, 1498 को पूरी हो गई, जब वे केरल के कालीकट बंदरगाह पर पहुंच गये।
  • वास्को डी गामा ने इस तरह से 10 माह में भारत पहुंचने में सफलता पाई। साथ ही यहां से पहली बार Portugal in India का अध्याय भी भारत में शुरू हो गया। कालीकट बंदरगाह को स्थानीय मलयालम भाषा में कोझिकोड बंदरगाह के नाम से जाना जाता है।

भारत में वास्को डी गामा और उनकी वापसी

  • जब Vasco da Gama भारत पहुंचे तो यहां स्थानीय राजा से उन्होंने भेंट की। भारत के साथ व्यापार को लेकर उन्होंने संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दीं, मगर मुस्लिम दरबारी ऐसा नहीं चाह रहे थे। पुर्तगाली दरअसल ईसाई थे और उनके साथ राजा के मुस्लिम दरबारी जुड़ने के इच्छुक नहीं थे।
  • भारत में लगभग ढाई माह बिताने के बाद 1498 के ही अगस्त में वास्को डी गामा ने अपने वतन लौटना शुरू कर दिया। हालांकि, वापसी की उनकी यात्रा प्रतिकूल मौसम की वजह से अच्छी नहीं रही। बीमारियों की चपेट में आकर उनके दल के आधे से अधिक लोगों की मौत हो गई।
  • वैसे, वास्को डी गामा जब अपने देश वापस पहुंचे तो यहां उनका भव्य अभिनंदन किया गया, क्योंकि जिस उद्देश्य से राजा द्वारा उन्हें भेजा गया था, उसमें वे कामयाब होकर लौटे थे। राजा ने पुरस्कार और तोहफे से वास्को डी गामा को लाद दिया था।

कैसे हुई Vasco da Gama की मौत?

वास्को डी गामा द्वारा भारत तक पहुंचने के मार्ग तलाशे जाने के बाद दो बार और भारत जाने के लिए बनाये गये दल का नेतृत्व उन्हें सौंपा गया। पुर्तगालियों का इससे भारत के साथ न केवल व्यापार बढ़ा, बल्कि पुर्तगाली ताकतवर भी होने लगे। हालांकि, तीसरे बार जब वास्को डी गामा भारत पहुंचे इसके कुछ समय के बाद 23 दिसंबर, 1524 को उन्होंने मलेरिया की वजह से दम तोड़ दिया।

चलते-चलते

Vasco da Gama का भारत आगमन भारतीय इतिहास की एक प्रमुख घटना है। बस याद इसे यूं रखना है कि वास्को डी गामा ने भारत की खोज नहीं की, बल्कि उन्होंने भारत पहुंचने के मार्ग से यूरोप का परिचय कराया।

5 COMMENTS

  1. sahi bat. india to bahut purana hai. vasco-da-gama ne to bas west ko bataya ki india kaise jaye. badhiya likha hai

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