Psychiatry vs Psychology: एक ही फील्ड के दो करियर ऑप्शंस

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Psychiatry vs Psychology

हम ऐसे दौर में जी रहे हैं, जब भागमभाग हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। यही वजह है कि तनाव और अवसाद जैसी बीमारियां आजकल आम हो गई हैं। लोगों का सुख-चैन, हंसना-खेलना इस वजह से दूभर होता जा रहा है। डिप्रेशन इस कदर हावी हो जा रहा है कि आत्महत्या जैसा कदम भी लोग उठा ले रहे हैं। इन सभी चीजों से निजात पाने का लोगों को बस एक ही रास्ता नजर आता है और वह है साइकोलॉजिस्ट या फिर साइकियाट्रिस्ट की सहायता लेना। आपको लगता होगा कि ये दोनों चीजें एक ही हैं, मगर ऐसा है नहीं। इस लेख में हम आपको Psychiatry vs. Psychology के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

साइकियाट्री और साइकोलॉजी, ये दोनों ही अलग-अलग क्षेत्र हैं। दोनों की पढ़ाई भी अलग-अलग होती है। दोनों ही क्षेत्रों में करियर के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

इस लेख में आप पढ़ेंगे:

  • Psychiatry vs. Psychology: प्रमुख बिंदु
  • साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिस्ट की भूमिकाएं
  • साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिस्ट बनने का तरीका
  • Psychiatry और Psychology की पढ़ाई कराने वाले संस्थान
  • साइकोलॉजी के स्पेशलाइजेशन

Psychiatry vs Psychology: प्रमुख बिंदु

  • Psychiatry vs. Psychology को समझना बहुत ही आसान है। वह इसलिए कि एमबीबीएस की डिग्री जिन स्टूडेंट्स के पास होती है, वे Psychiatry careers यानी कि मनोचिकित्सक के तौर पर करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
  • वहीं, ऐसे स्टूडेंट्स, जिन्होंने मनोविज्ञान (psychology) में एमए या फिर एमएससी किया है, उनके लिए साइकोलॉजिस्ट यानी कि मनोवैज्ञानिक बनने का विकल्प मौजूद है।
  • ये दोनों ही डॉक्टर पेशेवर होते हैं, लेकिन अंतर यह हो जाता है कि मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए साइकियाट्रिस्ट दवा दे सकते हैं, मगर साइकोलॉजिस्ट को अब तक यह अधिकार नहीं मिल पाया है।
  • साइकोलॉजिस्ट यह कर सकते हैं कि वे मरीज की काउंसलिंग करें और उसे किसी अच्छे साइकियाट्रिस्ट से दवा लेने का परामर्श दे दें।
  • वैसे स्टूडेंट्स जो क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं, उनके लिए सबसे बड़ी अनिवार्यता रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया में पंजीकरण करवाने की होती है।

साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिस्ट की भूमिकाएं

वैसे तो दोनों की ही भूमिकाएं बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, मगर आज की तारीख में देखा जाए तो साइकोलॉजिस्ट की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। वह इसलिए कि पहले के वर्षों में केवल मानसिक बीमारियों तक ही इनकी भूमिका सीमित मान ली गई थी, किंतु वर्तमान समय में लोग जिस तरह से मन से बीमार होते जा रहे हैं और इसके कारण जिस प्रकार से उनका शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है, वैसे में Psychology careers का क्षेत्र अब पहले से कहीं व्यापक हो गया है।

स्टूडेंट्स से लेकर पेशेवरों तक को साइकोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ रही है। स्टूडेंट्स जहां परीक्षा के वक्त बढ़े हुए तनाव के कारण साइकोलॉजिस्ट की शरण में पहुंच रहे हैं, तो वहीं पेशेवर काम के अत्यधिक दबाव की वजह से पैदा हुए तनाव के कारण।

वास्तव में साइकोलॉजी भी एक तरह का विज्ञान ही है, जिसमें बिना दवाई दिए ही किसी की सोच को दिशा प्रदान कर दी जाती है। साइकोलॉजिस्ट दरअसल काउंसलिंग करके लोगों को थेरेपी उपलब्ध कराते हैं।

वहीं, बात करें साइकियाट्रिस्ट की, तो ये वास्तव में विशेषज्ञ एमबीबीएस डॉक्टर के रूप में होते हैं, जो न केवल थेरेपी मुहैया कराते हैं, अपितु साथ में दवाइयां भी लिखते हैं।

साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिस्ट बनने का तरीका

Psychology careers यदि आपको लुभाता है तो आपको उन संस्थानों के बारे में जानकारी हासिल कर लेना चाहिए, जो मनोविज्ञान में स्नातक के साथ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराते हैं। यदि आप एक साइकोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं, तो इसके लिए यह जरूरी है कि आपके पास स्नातक की डिग्री हो। जब आप साइकोलॉजी में बीए कर लेते हैं, तो इसके बाद एमए और पीएचडी भी साइकोलॉजी में कर सकते हैं। यहां आपके पास अपनी रुचि के मुताबिक स्पेशलाइजेशन चुनने का भी विकल्प मौजूद होता है।

साइकोलॉजी कोर्स में यदि आप दाखिला लेना चाह रहे हैं, तो इसके लिए आपका 12वीं उत्तीर्ण होना जरूरी है। सायकोलॉजी की पढ़ाई के दौरान आपको सैद्धांतिक (theory) के साथ व्यवहारिक नॉलेज भी मिलती है। यानी कि आप प्रैक्टिकल भी करते हैं और इंटर्नशिप भी। साइकोलॉजी में जो कोर्सेज उपलब्ध हैं, वे निम्नवत हैं:

  • बीए इन साइकोलॉजी
  • बीए इन साइकोलॉजी (ऑनर्स)
  • बीएससी इन अप्लाइड साइकोलॉजी
  • पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड साइकोलॉजी केयर एंड मैनेजमेंट
  • पीजी डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग
  • पीजी डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी
  • पीजी डिप्लोमा इन क्लिनिकल साइकोलॉजी

वहीं, बात करें Psychiatry careers की तो इससे संबंधित कोर्स करने के लिए आपको मेडिकल से संबंधित परीक्षा में पास होना पड़ता है। आप इस परीक्षा में 12वीं के बाद शामिल हो सकते हैं। इस कोर्स को कर लेने के बाद आपको एमबीबीएस की डिग्री मिल जाती है।

Psychiatry और Psychology की पढ़ाई कराने वाले संस्थान

  • जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
  • क्राइस्ट विश्वविद्यालय, बेंगलुरु
  • दिल्ली विश्वविद्यालय
  • लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन, नई दिल्ली
  • गौतम विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम
  • मणिपाल कॉलेज ऑफ़ हेल्थ प्रोफेशनल्स
  • कालीकट विश्वविद्यालय

साइकोलॉजी के स्पेशलाइजेशन

  • क्लिनिकल साइकोलॉजी
  • कंज्यूमर साइकोलॉजी
  • सोशल साइकोलॉजी
  • ऑर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजी
  • चाइल्ड साइकोलॉजी
  • इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी

Psychiatry और Psychology की पढ़ाई के बाद मिलने वाली नौकरी

  • Psychology careers के लिए संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। लेक्चरर, प्रोफ़ेसर, मैनेजर, काउंसलर और प्रोफेशनल हेड आदि बनकर इस क्षेत्र में करियर संवारा जा सकता है।
  • इसके अलावा एजुकेशनल साइकोलॉजी, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी, पेशेवर क्लिनिकल साइकोलॉजी, हेल्थ साइकोलॉजी, टीचिंग एंड रिसर्च साइकोलॉजी, काउंसलिंग साइकोलॉजी, स्कूल साइकोलॉजी और कम्युनिटी साइकोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी करियर बनाने के अवसर मौजूद हैं।
  • वहीं Psychiatry careers के लिए अस्पतालों में तो संभावनाएं होती ही हैं, साथ में इनके पास अपना क्लीनिक शुरू करने का भी विकल्प मौजूद होता है।

सैलरी पैकेज एक नजर में

अनुभवी साइकोलॉजिस्ट को एक सेशन के लिए 2 से 3 हजार रुपये तक आराम से मिल जाते हैं। वहीं, साइकियाट्रिस्ट की सैलरी इंटर्नशिप के दौरान जहां 40 से 50 हजार रुपये प्रति माह होती है, जबकि सीनियर रेजिडेंशियल डॉक्टर एवं साइकोलॉजिस्ट की कमाई हर महीने 50 से 80 हजार रुपये तक हो जाती है। अनुभव और योग्यता रहे, तो पैसे इस क्षेत्र में भरे हुए हैं।

और अंत में

Psychiatry vs. Psychology के बारे में इस लेख को पढ़ने के बाद आप सब यह समझ चुके होंगे कि ये दोनों ही अलग-अलग करियर हैं। ऐसे में आप अपनी रुचि के मुताबिक इन दोनों में से किसी एक के लिए तैयारी करके इस क्षेत्र में अपने लिए एक सुनहरा करियर बना सकते हैं।

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