हमारे अर्धसैनिक बल

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Paramilitary Forces India

नमस्कार दोस्तों। आज हम जिस विषय पर बात करने वाले हैं वह हमारी सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इन लोगों को हम अक्सर अपने आस-पास किसी न किसी रूप में देखते हैं। ये लोग दिन-रात बिना रुके बिना थके निरंतर सुरक्षा करते हैं। दोस्तों हम बात कर रहे हैं – भारतीय अर्धसैनिक बल (Indian Para-Military Force) की। ये देश की अति महत्वपूर्ण सुरक्षा इकाई है और इसका नियंत्रण केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास होता है।

अर्धसैनिक बल – दायित्व

अर्धसैनिक बलों को शांति काल (युद्ध-विराम की स्तिथि) के समय देश की सीमाओं और आंतरिक शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गयी है। जब कोई युद्ध ना हो उस समय देश के बॉर्डर वाले इलाकों में अर्धसैनिक  बल ही तैनात होते हैं या फिर देश के भीतर कही भी कोई आतंकी घटना हो, या वो नक्सल क्षेत्र हो सभी स्थानों पर अर्धसैनिक  बल ही तैनात रहता है।

अर्ध-सैन्यीकरण बल के अंतर्गत आने वाले बल निम्न हैं – केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत- तिब्बत बॉर्डर पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और असम रायफल्स।

असम रायफल्स (AR)

  • असम रायफल्स हमारी सबसे पुरानी सुरक्षा बल है, इसका गठन अंग्रेज़ों ने 1835 में “कछार लेवी” नाम से किया था। उस समय इसके गठन का उद्देश्य ब्रिटिश चाय बागान की रक्षा करना था।
  • अपने विभिन्न नामों (असम फ्रंटियर पुलिस (1883), असम मिलिट्री पुलिस(1891), ईस्टर्न बंगाल एंड  असम मिलिट्री पुलिस (1913)) से  पहचाने जाने के बाद अंततः 1917 में इसे असम रायफल्स नाम प्राप्त हुआ
  • स्वतंत्र भारत में इसके प्रथम महानिदेशक श्री एच जी बार्टले (1947) तथा वर्तमान में इसके महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल सुखदीप सांगवान, एसएम हैं।
  • इसका दायित्व देश की पूर्वोत्तर सीमा (भारत-म्यांमार सीमा) की रक्षा करना तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र की आंतरिक शांति बनाये रखना है। इसका मुख्यालय शिलांग (मेघालय) में है।
  • इनकी अपनी 46 बटालियन तथा कुल बल संख्या 63,747  हैं।
  • इस बल को प्यार से ‘पर्वतीय लोगों का मित्र” और ‘पूर्वोत्तर का प्रहरी’ कहा जाता है।
  • इसका प्रशासकीय नियंत्रण केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा संचालन नियंत्रण (वेतन, भत्ता)  रक्षा मंत्रालय के अंतगर्त है।

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF)

  • देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल माने जाने वाले  केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की स्थापना 27  जुलाई 1939 को मध्यप्रदेश में “ताज प्रतिनिधि  पुलिस” के रूप में हुई थी। 28 दिसम्बर 1949 में  सीआरपीएफ अधिनियम के तहत इसका नाम केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल कर दिया गया था।
  • इसका दायित्व देश को आंतरिक सुरक्षा प्रदान करना, नक्सल/आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा, संघ/राज्य पुलिस की सहायता, भारतीय संसद की सुरक्षा तथा सयुंक्त राष्ट्र शांति अभियान में प्रतिभाग करना है।
  • इनके पास 230 बटालियनों  सहित 313,634 बल संख्या है।
  • केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल आदर्श वाक्य “सेवा और निष्ठा” है, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के प्रथम महानिदेश श्री वीजी कानेटकर थे  तथा वर्तमान महानिदेशक श्री राजीव राय भटनागर हैं।
  • आजकल केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल जम्मू-कश्मीर में “ऑपरेशन आल-आउट” तथा छत्तीसगढ़ में “एंटी-नक्सल ऑपरेशन” में सक्रीय है।
  • इसका प्रशासकीय तथा संचालन नियंत्रण केंद्रीय गृह मंत्रालय करता है।
  • केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के 2 विशेषज्ञ यूनिट भी है जिनका कार्य दंगा प्रभावित क्षेत्र और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में तुरंत कार्यवाही करना है।

त्वरित कार्यवाही बल (RAF)

इसका गठन अक्टूबर 1992 में 10 बटालियन को मिलाकर किया गया था। अभी इसमें 10 बटालियन तथा 4 कंपनी है। इसका कार्य सांप्रदायिक दंगो तथा अन्य किसी तनाव वाली स्थितियों में तुरंत कार्यवाही करना है।

दृढ़ कार्यवाही कमांडो बल (COBRA)

इसका गठन 2008 में नक्सल गतिविधियों से निपटने के लिए किया गया था। ये कमांडो गोरिल्ला युद्ध एवं जंगल युद्ध में निपुण होते है। यह देश की सबसे कुशल एवं तेज सशस्त्र पुलिस बल है। इस बल के पास 4 शौर्य चक्र तथा 1 कीर्ति चक्र है।  

भारत- तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP)

  • भारत-चीन युद्ध 1962 के बाद भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस अस्तित्व में आयी। इसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1962 में हुई थी। भारत-चीन बॉर्डर के बर्फीले क्षेत्रों  में कार्यरत होने के कारण इसे “हिमवीर” नाम से भी जाना जाता है।
  • भारत- तिब्बत बॉर्डर पुलिस का दायित्व भारत की चीन से लगी सीमा की रक्षा के साथ-साथ सीमा पर अवैध तस्करी को रोकना, आपदा प्रबंधन करना तथा सयुंक्त राष्ट्र संघ के शांति मिशनों लिए कार्य करना है।
  • इसका आदर्श वाक्य “शौर्य -दृंढता-कर्म -निष्ठा” है, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • यह भारत की चीन से लगी 3488 किलोमीटर लम्बी सीमा (लेह-लद्दाख के काराकोरम से लेकर अरुणांचल प्रदेश के दिफू-ला ) की रक्षा करती है, इसकी तैनाती बेहद ऊचाई (9000-19000 फुट) वाले तथा प्राकृतिक रूप से बेहद विषम परिस्तिथियों वाले स्थानों में होती है।
  • वर्तमान में भारत- तिब्बत बॉर्डर पुलिस महानिदेशक श्री एस एस देसवाल है तथा इसमें 89,432 जवान है।
  • भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस जवानों की तैनाती अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास तथा भारतीय महावाणिज्य दूतावास की रक्षा करने के लिए भी की गयी है।
  • 2015 में फियादीन हमले में भारतीय महावाणिज्य दूतावास की रक्षा के लिए इसे राष्ट्रपति द्वारा शौर्य पदक दिया गया था।
  • इसके संचालन एवं नियंत्रण की कमान केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास में है।

सशस्त्र सीमा बल (SSB)

  • सशस्त्र सीमा बल का गठन 20 दिसंबर 1963 में विशेष सेवा ब्यूरो के नाम से हुआ था। 2001 में इसको गृह मंत्रालय के अंतगर्त लाया गया और इसका नाम विशेष सेवा ब्यूरो से बदल कर सशस्त्र सीमा बल रखा दिया गया।
  • इसका दायित्व भारत-नेपाल तथा भारत-भूटान की सीमा की पहरेदारी करना तथा अवैध तस्करी को रोकना है।
  • सशस्त्र सीमा बल 1715 किलोमीटर लम्बी भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमा की रक्षा करता है।
  • सशस्त्र सीमा बल मुख्यालय नई दिल्ली में है तथा इसके वर्तमान महानिदेशक श्री कुमार राजेश चंद्रा है।
  • सशस्त्र सीमा बल का आदर्श वाक्य “सेवा, सुरक्षा और भाईचारा” है।
  • सशस्त्र सीमा बल की संख्या बल 76,337 है।।

सीमा सुरक्षा बल (BSF)

  • भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965  के बाद सीमा सुरक्षा बल अस्तित्व में आई, इसका गठन 1 दिसम्बर 1965 को हुआ था।
  • इसके गठन का उद्देश्य भारत की पाकिस्तान से लगी सीमा की पहरेदारी करना था। 1971 में  बांग्लादेश के अस्तित्व में आने से भारत-बांग्लादेश सीमा की जिम्मेदारी भी सीमा सुरक्षा बल को दे दी गयी।
  • सीमा सुरक्षा बल 6,385.36 किलोमीटर लम्बी अंतराष्ट्रीय सीमा की रखवाली करती है, सीमा सुरक्षा के साथ-साथ घुसपैठ एवं अवैध तस्करी रोकना भी इसी का कार्य है।
  • इसके प्रथम महानिदेशक श्री के एफ रुस्तम थे तथा वर्तमान में इसके महानिदेशक रजनीकांत मिश्रा है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • सीमा सुरक्षा बल ने अब महिला जवानों को भी सीमा सुरक्षा का जिम्मा देना प्रारम्भ कर दिया है। जिसके फलस्वरूप सीमा सुरक्षा बल ने 100 महिला जवानों की भारत-पाकिस्तान सीमा पर तथा 60  महिला जवानों  की भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनाती की है।
  • इसका आदर्श वाक्य “जीवन पर्यन्त कर्तव्य” है। सीमा सुरक्षा बल के पास 186 बटालियन तथा कुल बल संख्या 257,363 है।
  • सीमा सुरक्षा बल देश के दुर्गम रेगिस्तानों, नदी-घाटियों और हिमाच्छादित क्षेत्रों तक फैले हुई अति-संवेदनशील सीमाओं की रक्षा करता है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)

  • 10 मार्च 1969 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का गठन किया गया था।
  • इसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, परमाणु ऊर्जा चलित उद्यमों, मुद्रण प्रेसों, हवाई अड्डों, सामरिक महत्व की इमारतों, अंतरिक्ष केंद्रों, अति महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों, बंदरगाहों तथा विदेशो में भारतीय दूतावासों की रक्षा करना है।
  • इसके अतिरिक्त इसको दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, वी.वी.आई.पी सुरक्षा तथा हैती में यू.एन की “फार्म्ड पुलिस यूनिट” की जिम्मेदारी भी प्रदान की गयी है।
  • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल देश की सबसे बड़ी आग सुरक्षा प्रदाता भी है, ये देश के 102 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को आग से सुरक्षा प्रदान करती है।
  • इसके महानिदेशक श्री राजेश रंजन है, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का आदर्श वाक्य “संरक्षण एवं सुरक्षा” है, इसमें 1,44,418 जवान शामिल हैं।
  • इसका प्रशासकीय एवं संचालन नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास है।  

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)

  • 1984 में इंदिरा गांघी की मृत्यु के पश्चात् आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए एक संघीय आकस्मिक तैनाती बल के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की स्थापना 1986 में  की गयी थी। इसका गठन भारतीय संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अधिनियम के तहत कैबिनेट सचिवालय द्वारा किया गया था।
  • यह एक प्रतिनियुक्ति बल है, इसमें सभी कर्मियों की नियुक्ति भारतीय सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तथा राज्य पुलिस बल से प्रतिनियुक्ति द्वारा होती है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के सभी सदस्यों को कठिन कमांडो प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। इसके कमांडो को “ब्लैक कैट” कहा जाता है क्यूंकि किसी भी कार्यवाही के समय काली पोशाक का प्रयोग किया जाता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड मुख्यालय नई दिल्ली में है ,इसकी बल संख्या 7,350  है तथा इसका आदर्श वाक्य “सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा” है। श्री सुदीप लखटकिया इसके महानिदेशक है।

आइये एक नज़र डालते हैं राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के उन ऑपरेशन्स जो उन्होंने सफतलता पूर्वक कार्यान्वयन किया हैं:

ऑपरेशन ब्लैक थंडर यह ऑपरेशन 30 अप्रैल 1986 में गोल्डन टेम्पल को खलिस्तान समर्थक उग्रवादियों से मुक्त करवाने के लिए चलाया गया था।

ऑपरेशन अश्वमेध – यह ऑपरेशन 23-24 अप्रैल 1993 को इंडियन एयरलाइन्स फ्लाइट IC427 को आतंकियों से मुक्त करवाने हेतु चलाया गया था, इस ऑपरेशन में  राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड ने 141 बंधकों को आतंकियों  के कब्ज़े से छुड़ाया और एक आतंकी को मार गिराया था।

ऑपरेशन वज्र शक्ति 24 सितम्बर 2002 में गुजरात अक्षरधाम मंदिर को आतंकियों से छुड़ाने हेतु यह ऑपरेशन चलाया गया था। वहां आतंकियों ने 30 नागरिकों की जान ली थी, तथा 80 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड ने केवल 1 दिन में ऑपरेशन पूर्ण कर मंदिर को आतंक मुक्त किया था तथा आतंकियों को गुजरात पुलिस के हवाले किया था।

ऑपरेशन ब्लैक टोर्नेडो26/11 2008 के आतंकी हमले में होटल ताज पैलेस, ओबेरॉय होटल और नरीमन हाउस को आतंकियों से मुक्त करवाने हेतु इस ऑपरेशन को चलाया गया था। इस हमले में 150 से अधिक लोगो की जान गयी थी तथा 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।

दोस्तों ये एक छोटी सी पेशकश हमारे उन जवानों के नाम थी, जिन्हें  हम अनजाने में इंडियन आर्मी के जवान समझते थे। इंडियन आर्मी केवल युद्ध के समय सीमा पर रहती है अन्य स्थितियो में अर्धसैनिक बल सीमा के प्रहरी होते हैं। इनकी इस अतुल्य देश सेवा और समर्पण भाव के बाद भी इनकी शहादत को “शहीद” का दर्जा न मिलना एक गंभीर विचारणीय विषय है।

चलते चलते

दोस्तों 2016 के आंकड़ों के अनुसार लगभग २०,००० महिला कर्मी हमारे अर्धसैनिक बलों की शान बढ़ा रही हैं, यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। आखिरकार हमारे देश की महिलाएं अब जीवन की लगभग हर चुनौती में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही हैं।

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