जानिए इंडियन आर्मी में होते हैं कौन- कौन से रैंक

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Indian Army

दुनियाभर के सबसे ताकतवर सेना में भारतीय सेना का स्थान चौथा है। सैनिक क्षमता के हिसाब से इंडियन आर्मी में एक्टिव पर्सनल की संख्या 1,325,000 और रिजर्व पसर्नल की संख्‍या 2,143,000 है। भारतीय सेना हमेशा देश की रक्षा के लिए तैयार रहती है। किसी कंपनी या संस्थान में जिस प्रकार अलग- अलग रैंक के अधिकारी और कर्मचारी होते हैं, ठीक उसी प्रकार भारतीय आर्मी में भी सैन्यकर्मियों के अलग- अलग पद होते हैं। तो आइए विस्तार से जानते हैं भारतीय आर्मी के रैंक के बारे में।

भारतीय सेना के रैंक

  • फील्ड मार्शल

भारतीय थल सेना में फील्ड मार्शल एक फाइव स्टार रैंक होती है। आर्मी में फील्ड मार्शल सबसे ऊंचा स्थान होता था, लेकिन फिलहाल इसे खत्म कर दिया गया है। ये अधिकारी नियमित नहीं होते और आमतौर पर यह रैंक सेना के जनरल को सेरिमोनियल रूप में दिया जाता है। युद्ध में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए भी सेना के जनरल को ये रैंक दिया जाता है। भारत के करीब सात दशक के इतिहास में सिर्फ दो ही सैन्य अधिकारियों के एम करियप्पा और सैम मानेकशॉ को फील्ड मार्शल बनाया गया है।

  • जनरल

आधिकारिक तौर पर जनरल भारतीय सेना का सबसे ऊंचा रैंक है। इसे कमांडर-इन-चीफ और सेनाध्यक्ष भी कहा जाता है। वर्तमान में जनरल बिपिन रावत इस पद पर कार्यरत हैं। जनरल का रैंक 4-स्टार रैंक होता है और उनकी वर्दी की कॉलर पर भी 4-स्टार लगे होते हैं। जनरल का कार्यकाल तीन साल का होता है और उनका पद कैबिनेट सेक्रेटरी के बराबर होता है।

  • लेफ्टिनेंट जनरल

लेफ्टिनेंट जनरल भारतीय आर्मी में दूसरा सर्वोच्च पद होता है। जनरल के बाद का रैंक लेफ्टिनेंट जनरल का होता है, जो 3-स्टार ऑफिसर होता है। इस रैंक के लिए ऑफिसर के पास 36 साल की कमीशंड सर्विस की योग्‍यता होना जरूरी है। इंडियन आर्मी में अलग-अलग कमांड के कमांडिग ऑफिसर भी इसी रैंक में आते हैं। साथ ही आर्मी के डिप्टी चीफ का रैंक भी इसी के अंतर्गत ही आता है।

  • मेजर जनरल

इंडियन आर्मी में मेजर जनरल 2- स्टार अधिकारी होते हैं। इस पद पर प्रमोशन या चयन 32 साल तक सेना में सेवा देने के बाद ही मिलता है। भारतीय सेना मे मेजर जनरल का पद भारतीय जल सेना के रियर एड्मिरल और भारतीय वायु सेना के एयर वाइस मार्शल की रैंक के बराबर होता है।

  • ब्रिगेडियर

इंडियन आर्मी में बिग्रेडियर का रैंक काफी लोकप्रिय होता है, क्योंकि पूरे एक बिग्रेड को संभालने की जिम्मेदारी एक ब्रिगेडियर की ही होती बै। ब्रिगेडियर 1-स्टार रैंक अधिकारी होते हैं। ब्रिगेडियर के रैंक में प्रमोशन सेलेक्शन के आधार पर होता है। इसके लिए ऑफिसर के पास 25 वर्षों की कमीशंड सर्विस की योग्‍यता होना जरूरी होती है।

  • कर्नल

इंडियन आर्मी में कर्नल की वर्दी के कंधों पर एक अशोक चिन्ह और 2 स्टार होते हैं। सेना में सीधे कमीशन प्राप्त करने वाले अधिकारी अगर पर्मनेंट कमीशन प्राप्त करते हैं, तो वो कर्नल के रैंक तक प्रमोशन के जरिए पहुंचते हैं। .कर्नल रैंक में सेलेक्‍शन के लिए 15 वर्षों की कमीशंड सर्विस की योग्‍यता जरूरी होती है। इस रैंक के प्रमोशन के लिए ऑफिसर का 26 वर्षों का इंतजार भी करना पड़ता है।

  • लेफ्टिनेंट कर्नल

भारतीय सेना मे लेफ्टिनेंट कर्नल की वर्दी में एक  5 सितारा के बीच अशोक चिन्ह बना होता है। इंडियन आर्मी में  लेफ्टिनेंट कर्नल के पद को ऑफिसर के लिए उसके सीनियर होने की पहली सीढ़ी के रुप में देखा जाता है। इस रैंक को पाने के लिए 13 साल की सेवा करना अनिवार्य होता है।

  • मेजर

इंडियन आर्मी में मेजर एक महत्वपूर्ण स्थान हैं, क्योंकि किसी भी ऑफिसर को छह सालों की सर्विस के बाद यह रैंक हासिल होता है। इस रैंक के अधिकारी के कंधे पर अशोक चिन्ह होता है।

  • कैप्टन

आर्मी में दो साल कमीशन्ड अधिकारी के रुप में काम करने के बाद कैप्टन के रैंक पर प्रमोशन मिलता है। कैप्टन के कंधे पर 3 स्टार होते हैं।

  • लेफ्टिनेंट

यह भारतीय सेना में शुरुआती कमीशन्ड रैंक होता है। सेना में ऑफिसर के तौर पर सैनिक जीवन की शुरुआत इसी रैंक से होती है। ट्रेनिंग के बाद जब युवा अधिकारी पास आउट होते हैं तो वो लेफ्टिनेंट ही बनते हैं।

  • सूबेदार मेजर

सूबेदार मेजर, जूनियर कमीशंड ऑफिसर(जेसीओ) मं सबसे बड़ा होता है। करीब 34 वर्षों की सर्विस के बाद वह रिटायर हो जाते हैं।

जेसीओ रैंक के अधिकारियों के कंधे पर रिबन के साथ ही 2 स्टार भी होते हैं।

  • सूबेदार

हर बटालियन मे कई सूबेदार होते हैं। आमतौर पर नॉन कमीशंड ऑफिसर प्रमोशन लेते हुए इस रैंक पर पहुंचते हैं। इनके कंधे पर 2 स्टार के और लाल पट्टी के बीच एक पीली पट्टी होती है। 30 सालों की नौकरी के बाद सूबेदार की रैंक संभालने वाला सैनिक रिटायर हो जाता है।

  • नायब सूबेदार

आर्मी में जेसीओ की पहली सीढ़ी नायब सूबेदार की होती है। ये अपनी सर्विस के 28 वर्ष पूरे होने पर रिटायर हो जाते हैं। नायब सूबेदार के कंधे पर एक स्टार के बीच अशोक चिन्ह होता है और साथ में 2 लाल पट्टियों के बीच मे एक पीली पट्टी होती है|

  • नॉन कमीशंड ऑफिसर

नॉन कमीशंड ऑफिसर की श्रेणी में हवलदार, नायक और लांस नायक आते हैं। इनके रिटायरमेंट की अधिकतम उम्रसीमा 26 वर्ष और न्‍यूनतम 22 वर्ष है।

निष्कर्ष

जब बात होती है देश की रक्षा और सुव्यवस्था की तो सबसे पहले देश की थल सेना ही इसका जिम्मा उठाती है। अगर आप भी सपना देख रहे हैं इंडियन आर्मी में शामिल हो कर देश की रक्षा करने का तो बहुत सारे ऐसे मौके आते हैं, जब आप लिखित परीक्षा या साक्षात्कार के जरिए अपना ये सपना पूरा कर सकते हैं।

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