उबड़-खाबड़ रास्तों पर डगमगाती हुई आगे बढ़ रही Indo-China Relationship की गाड़ी

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Indo-China relationship

समूची दुनिया इस वक्त कोरोनावायरस की वजह से वैश्विक महामारी COVID-19 की चपेट में है। ऐसे समय में जब देशों के बीच आपसी सहयोग, आपसी समन्वय और आपसी सहयोग की बड़ी जरूरत है तो ऐसे में इस दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत और चीन सीमा विवाद के कारण एक-दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक विवाद का केंद्र है अक्साई चीन में स्थित गालवन घाटी, जिसकी वजह से कई मौकों पर इन दोनों देशों की सेनाओं का बीते कुछ समय में आमना-सामना भी हो चुका है। ऐसे में Indo-China Relationship की राहें एक बार फिर से कठिन रास्ते पर चल पड़ी हैं। इस लेख में हम आपको भारत और चीन के संबंधों के बारे में इतिहास को कुरेदते हुए वर्तमान की समसामयिक जानकारी को समेटते हुए भविष्य की संभावनाओं के साथ हर वह जरूरी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं जो न केवल आपके लिए जाननी जरूरी हैं, बल्कि UPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी आपके बहुत काम आने वाली है।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • Relationship of China and India वर्तमान परिदृश्य में
  • कैसे विकसित हुआ Indo-China Relationship?
  • कैसे हो विवादों का समाधान?

Relationship of China and India – वर्तमान परिदृश्य में

  • भारत की ओर से चीन पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि गालवन घाटी के किनारे उसने अवैध रूप से टेंट लगा दिया है और यहां चीन अपनी सेना को लगातार बढ़ाता ही जा रहा है। वहीं, चीन ने भारत पर यह आरोप लगाया है कि रक्षा से जुड़ा अवैध निर्माण भारत गालवन घाटी के पास कर रहा है।
  • उत्तरी सिक्किम के नाथूला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कुछ समय पहले इस मुद्दे पर झड़प भी हो चुकी है। हाल-फिलहाल जो घटनाएं घटी हैं, वे भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का प्रत्यक्ष उदाहरण कही जा सकती हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा व सुरक्षा संबंध कितने जटिल हो गए हैं, इन घटनाओं से इसका पता साफ-साफ चल रहा है।
  • व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए China and India के बीच के संबंधों को समझने की जरूरत है। साम्राज्यवादी शासन से आजादी भारत और चीन को लगभग एक साथ ही मिली थी। लोकतंत्र के मूल्यों को भारत ने तो सच्चे अर्थों में खुद में समाहित कर लिया, लेकिन चीन को देखें तो उसने छद्म लोकतंत्र को अपनाया।
  • कई स्याह मोड़ भारत और चीन के संबंधों की इस कहानी में अब तक आ चुके हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि सबसे पहले तो हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा देखने को मिला, लेकिन उसके बाद 1962 का भारत और चीन के बीच युद्ध भी देखने को मिला। तब से लेकर आज तक दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव लगातार देखने को मिल ही रहे हैं। अलग-अलग मंचों पर भी भारत और चीन को एक दूसरे की मुखालफत करते हुए देखा गया है।

कैसे विकसित हुआ Indo-China Relationship?

  • भौगोलिक रूप से भारत और चीन हजारों वर्षों तक एक-दूसरे से अलग-अलग एवं शांत रहें, क्योंकि तिब्बती इन दोनों के बीच स्थित था। विकिपीडिया के अनुसार फिर जब चीन ने 1950 में तिब्बत पर धावा बोलकर यहां अपना आधिपत्य जमा लिया तो इसके बाद भारत और चीन की सीमाएं मिल गईं। इस तरीके से China and India पड़ोसी मुल्क बन गए।
  • भारत और चीन के बीच संबंधों को देखा जाए तो बीसवीं सदी के मध्य तक ये बहुत ही कम थे। कुछ व्यापारिक गतिविधियां बस दोनों देशों के बीच होती थीं। तीर्थयात्री आया-जाया करते थे और विद्वानों का आवागमन हुआ करता था।
  • फिर आया 1954, जब हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के नारे के साथ भारत की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और चीन की ओर से झोउ एनलाई द्वारा पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य था कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित किए जाने के लिए कार्ययोजना को तैयार किया जा सके।
  • तिब्बती लोगों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा 1959 में तिब्बत के कई शरणार्थियों के साथ भारत आ गए थे और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में ये बस गए। इसके बाद चीन की ओर से भारत पर यह आरोप लगाया गया कि तिब्बत के साथ पूरे हिमालय क्षेत्र में भारत विस्तारवाद और साम्राज्यवाद को फैलाने में लगा हुआ है।
  • भारत और चीन के बीच जब 1962 में सीमा विवाद को लेकर युद्ध हुआ तो दोनों पक्षों के बीच जो संबंध विकसित हुए थे, उन्हें गंभीर झटका लगा। भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंध एक बार फिर से 1976 में बहाल हुए थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार देखने को मिलने लगा।
  • बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1988 में चीन का दौरा किया। इस तरीके से द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की प्रक्रिया का उन्होंने आगाज कर दिया। सीमा विवाद के सवाल पर दोनों ही देश आपसी सहयोग के साथ इसका समाधान निकालने के लिए सहमत हो गए। इसके अलावा दोनों देशों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि अन्य क्षेत्रों में भी दोनों देश सक्रिय तौर पर द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देंगे।
  • भारत के राष्ट्रपति आर वेंकटरमन ने जब 1992 में चीन का दौरा किया तो देश की आजादी के बाद चीन का दौरा करने वाले वे पहले भारतीय राष्ट्रपति भी बन गए।
  • चीन का दौरा भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी 2003 में किया था। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार इस दौरान दोनों देशों के बीच The Declaration on the Principles and Comprehensive Cooperation in China-India Relations पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • Relationship of China and India को तब मजबूती मिलती हुई नजर आई जब चीन-भारत विनिमय वर्ष के रूप में 2011 को दोनों देशों ने मनाया, जबकि चीन-भारत मैत्री एवं सहयोग वर्ष के रूप में 2012 को मनाया गया।
  • द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में चीन का दौरा किया। इस दौरे के दौरान नाथू ला दर्रा भारत के आधिकारिक तीर्थयात्रियों के लिए चीन की ओर से खोले जाने की घोषणा कर दी गई।
  • चीन के वुहान में चीन के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री के बीच ‘भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन’ का 2018 में आयोजन भी हुआ था। वैश्विक एवं द्विपक्षीय रणनीतिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तब गहन विचार-विमर्श तो हुआ ही था, साथ में घरेलू व विदेशी नीतियों पर विभिन्न दृष्टिकोण से दोनों देशों के बीच व्यापक सहमति भी बनी थी।
  • इसके ठीक एक साल के बाद ‘दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन’ भारत के प्रधानमंत्री एवं चीन के राष्ट्रपति के बीच तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में वर्ष 2019 में आयोजित किया गया। पहले अनौपचारिक सम्मेलन में जो आम सहमति China and India के बीच बनी थी, इसमें इसे और दृढ़ करने का निर्णय लिया गया। द हिन्दू में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक भारत एवं चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ भी वर्ष 2020 में मनाई जा रही है।

कैसे हो विवादों का समाधान?

  • रणनीतिक मार्गदर्शन का पालन करते हुए दोनों देशों के नेता मैत्रीपूर्ण सहयोग को आपस में बढ़ावा दें।
  • साथ ही अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मामलों पर China and India समन्वय को बढ़ाएं।
  • आपसी मतभेदों का भी दोनों देशों को उचित प्रबंधन करने की जरूरत है।
  • लाभकारी सहयोग की गति को भी दोनों देशों को पारस्परिक रूप से बढ़ाना होगा।

चलते-चलते

Indo-China Relationship इस वक्त बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है, लेकिन दोनों देशों को शांतिपूर्ण तरीके से इसका हल इसलिए निकालना चाहिए, क्योंकि दोनों देशों की एक बड़ी आबादी का हित इसी में छिपा हुआ है। पहले से ही दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर कोरोना संकट का बड़ा ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे में युद्ध इस समस्या का समाधान नहीं दिखता। बेहतर होगा कि दोनों देश शांति के पथ पर अग्रसर होते हुए खुशहाली का रास्ता तलाश लें।

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