May 11 – National Technology Day (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस)

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National Technology Day

आज 11 मई हैं , और आज का दिन भारत के लिए कोई साधारण दिन नहीं है , बल्कि राष्ट्र पर गर्व करने के विषय का दिन है। आज के दिवस को सम्पूर्ण देश में “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस”(National Technology Day) के रूप में मनाया जाता है। दोस्तों आज के ही दिन लगभग 23 वर्ष पहले भारत ने पोखरण में परमाणु विस्फोट करके दुनिया को अपने परमाणु सम्पन्न राष्ट्र होने का प्रमाण दिया था। तो दोस्तों पोखरण परमाणु परीक्षण से “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” का क्या सम्बन्ध है और क्यों मनाया जाता है, “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस”? इन सभी प्रश्नो का उत्तर हम आज के इस अंक में आपको देने वाले हैं , तो दोस्त बने रहिये आज के इस अंक में हमारे साथ।

इस लेख में हम आपके लिए लाये हैं –

  • क्यों मनाया जाता है “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस”?
  • कैसे शुरुवात हुई “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” मनाने की?
  • “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” का महत्व?
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

क्यों मनाया जाता है “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस”?

• “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय”, भारत सरकार के द्वारा प्रतिवर्ष 11 मई को “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

• “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” विज्ञान और प्रौद्योगिकी में देश की प्रगति एवं उसमे अतुलनीय योगदान देने वाले लोगो के सम्मान में मनाया जाता है।

• “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” को तकनीकी रचनात्मकता, वैज्ञानिक जांच, उद्योग और विज्ञान के एकीकरण में किये गये प्रयास के प्रतीक माना जाता है।

• “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” के दिन देश के तकनीकी एवं प्रोद्योगिकी संस्थानों में प्रस्तुतियां, क्विज, व्याख्यान, विज्ञान प्रदर्शनियों और प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है

• “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” विज्ञान और प्रौद्योगिकी में हमारी ताकत, कमज़ोरियों, लक्ष्य के विचार मंथन के लिये मनाया जाता है, जिससे प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमें देश की दशा और दिशा का सही ज्ञान हो सके।

• सम्पूर्ण देश के तकनीकी संस्थान तथा इंजीनियरिंग संस्थानों में “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” भारत की प्रौद्योगीकीय क्षमता के विकास को बढ़ावा देने के लिये मनाया जाता हैं।

• हर वर्ष “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” के लिए एक थीम रखी जाती है, इस वर्ष की थीम है ‘एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ (Science and Technology for a Sustainable Future) है। समय समय पर इस विषय की मॉनिटरिंग की जाती है तथा प्रगति का आंकलन किया जाता है।

• “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” साल 2020 की थीम ‘रीबूटिंग द इकोनॉमी विद साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च ट्रांसलेशन’ (Rebooting the Economy through Science, Technology and Research Translations’ ‘RESTART’) रखी गई थी।

• “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कार” भी प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम करने के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को दिया जाता है।

कैसे शुरुवात हुई “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” मनाने की?

• मई 1998 को भारतीय सेना ने राजस्थान के पोखरण में 11-13 मई को लगातार 5 परमाणु परीक्षण किये थे। जिसमे से 3 परीक्षण 11 मई को तथा 2 परीक्षण 13 मई को किये गए थे।

• परमणु परीक्षण से धरती में 5 रिक्टर स्केल का भूकंप आँका गया था। इन परीक्षणों के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी की भारत सरकार ने यह परीक्षण उस समय किये थे जब भारत के ऊपर अनेक प्रकार के अंतराष्ट्रीय परमाणु प्रतिबंध लगाये गए थे।

• पोखरण परमाणु परीक्षण किन हालातो में किये गए थे और क्यों किये गए थे इसके बारे में अधिक जानकरी के लिए “परमाणु” फीचर फिल्म अवश्य देखे और देश के लिए गर्व से सर उठाने का मौका जाने न दे।

• 11 मई 1998 को भारत द्वारा किये गए परमाणु परीक्षण ने भारत को परमाणु शक्ति में आत्मनिर्भर तथा परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बना दिया था । भारत उन 6 देशो की पंक्ति में खड़ा हो गया था जो परमाणु शक्ति से सम्पन्न थे।

• पोखरण परमाणु परीक्षण की सफलता से प्रेरणा लेते हुए , 11 मई 1999 को पहला राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” मनाये जाने की घोषणा भारत सरकार ने की थी।

• पोखरण परमाणु परीक्षण 1998 भारतीय सेना द्वारा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), परमाणु खनिज निदेशालय अन्वेषण और अनुसंधान (AMDER) के वैज्ञानिकों के सहयोग से किया गया था।

• पोखरण परमाणु परीक्षण 1998 को सही से क्रियान्वित करने की कमान पूर्व दिवंगत राष्ट्रपति और हमारा गौरव डॉ एपीजे अब्दुल कलम सर के हाथों में थी।

“राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” का महत्व?

• “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” राष्ट्र की “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी” में प्रगति का प्रतीक है।

• 11 मई 1998 वो दिन था , जब हमने अंतराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका और यूरोपीय देशो के बढ़ते रौब को सीधे चुनौती दी थी। इसी का परिणाम था की अमेरिका सहित अनेक यूरोपीय देशो ने भारत के ऊपर तमाम आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिए थे।

• पोखरण परीक्षण की खीस को भुनाने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया तथा “कारगिल युद्ध” में भारत को अपनी जीपीएस प्रणाली इस्तेमाल के लिए नहीं दी थी।

• 11 मई भारत के लिए असीम गौरव का दिन है , इसी दिन ने हमें अहसास कराया की हम यदि अपनी प्रौद्योगिकी एवं तकनीक का विकास करे तो विदेशो पर हमारी निर्भरता कम होती चली जाएगी। हम इस दिशा में बेहतरीन काम करते जा रहे हैं।

• 11 मई की घटना से प्रेरणा लेकर अब भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बन गया है , धीरे -धीरे हम अन्य क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भरता हासिल कर रहे हैं।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

• 11 मई को स्वदेश निर्मित एयरक्राफ्ट ‘हंस-3’ ने अपनी पहली परीक्षण उड़ान सफलता पूर्वक भरी थी।

• हंस -3 सीएसआईआर -NAL द्वारा डिजाइन और विकसित भारत का पहला पूर्ण-समग्र हल्‍का वायुयान है जो प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण, खेल और शौक उड़ान के लिए उपयुक्त है।

• 11 मई के दिन भारत ने त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।

• त्रिशूल एक कम दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली समन्वित मार्गदर्शित मिसाइल विकास कार्यक्रम में (DRDO) रक्षा अनुसंधान विकास संगठन ओर(BDL) भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित मिसाइल है।

• त्रिशूल तीन मीटर लंबी और दो मीटर चौड़ी ये मिसाइल धरती से आसमान में नौ किलोमीटर तक मार कर सकती है।

• त्रिशूल को नौसेना, थल सेना और वायु सेना में शामिल कर लिया गया है। त्रिशूल के नौसेना संस्करण का नाम ‘टारपीडो एम के 2’ है।

• 14 नवंबर 2008 को भारत ने चंद्रयान -1 मिशन के तहत ऑर्बिटर का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) को चन्द्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा था , ऐसा करने वाला भारत चौथा देश बना था। इससे पूर्व यह कारनामा पूर्व सोवियत संघ , अमेरिका तथा चीन कर चुके थे।

• 5 नवम्बर 2013 को भारत ने Mars Orbiter Mission के तहत आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मंगलयान मिशन को लांच किया था।

• 24 सितंबर 2014 को मंगल ग्रह पर पहुंचने के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशो की लिस्ट में शामिल हो गया , जिसने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचने में सफलता पायी हो।

• भारत ने 23 मई 2016 को अपने पहले स्वदेशी दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले अंतरिक्ष यान (आरएलवी) को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।

• 22 जुलाई 2019 को भारत ने स्वदेशी चंद्रयान -2 मिशन को श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लांच किया था। इस मिशन का उद्देश्य चंदमा की सतह पर स्वदेशी रोवर को उतारना था , किन्तु तकनीकी खामियों के चलते यह मिशन चन्द्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतर नहीं पाया था।

• गगनयान मिशन के तहत इसरो की अंतरिक्ष में भारत के मानव मिशन भेजने की तैयारी है , जिसके लिए अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रैंनिंग रूस में चल रही है। इस मिशन को जल्द ही निकट भविष्य में लांच करने की योजना है।

अंत में

दोस्तों इस बार कोरोना संक्रमण के चलते शायद “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” सांकेतिक रूप से मनाया जाये , लेकिन हमारे देश के वैज्ञानिको तथा इंजीनियरों के प्रति सम्मान एवं गर्व का भाव सदैव हमारे जेहन में रहेगा। साथ में मैं इस लेख के माध्यम से धन्यवाद देना चाहूंगा भारतीय सेना, पोखरण परमाणु परीक्षण से जुड़े सभी संस्थान, हमारे मिसाइल मैन दिवंगत डॉ एपीजे अब्दुल कलाम और सशक्त एवं निडर प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी जी का जिनके निर्भीक एवं ऐतिहासिक प्रयास के कारण आज हमें गर्व का अनुभव हो रहा है , जिनकी प्रेरणा से आज देश आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे ही आगे बढ़ रहा है, धन्यवाद।

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