Green Tax क्या है और इसका क्या होगा आप पर असर

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Green Tax

What is Green Tax? यह सवाल हम में से अधिकांश लोगों के मन में तब से आ रहा है, जब से केंद्र सरकार की तरफ से पुराने वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने का फैसला किया गया है। ग्रीन टैक्स लगाने की जरूरत आखिरकार सरकार को क्यों पड़ी? क्या ग्रीन टैक्स के लगाए जाने से हम पर कोई असर पड़ेगा? ग्रीन टैक्स लगाने से सरकार को ही केवल फायदा होगा या फिर इससे हम भी लाभान्वित होंगे? इन सभी सवालों के जवाब इस लेख में हम आपको दे रहे हैं।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • ग्रीन टैक्स क्या है?
  • क्यों लगाया जा रहा ग्रीन टैक्स?
  • किस तरह से वाहनों पर लगेगा Green Tax?

ग्रीन टैक्स क्या है?

ग्रीन टैक्स वह टैक्स है, जो केंद्र सरकार ने 8 साल पुराने वाहनों पर लगाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय परिवहन और सड़क मंत्री नितिन गडकरी की तरफ से इसे मंजूरी भी प्रदान कर दी गई है। इस तरह से वे सभी वाहन, जो 8 साल पुराने हो चुके हैं, अब उन्हें ग्रीन टैक्स चुकाना पड़ेगा। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से परिवहन मंत्रालय के इस प्रस्ताव को ही अभी सिर्फ मंजूरी प्रदान की गई है, जिसे अलग-अलग राज्यों को अब उनकी राय प्राप्त करने के लिए भेजा जाएगा।

प्रस्ताव में कहा गया है कि वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट के रिन्यूअल के दौरान अब ग्रीन टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा। फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। राज्यों के साथ इस पर विचार-विमर्श किये जाने के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि सरकार इसे अधिसूचित कर दे। ऐसे में पुरानी गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स लगाए जाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो जाएगा।

क्यों लगाया जा रहा ग्रीन टैक्स?

  • ग्रीन टैक्स लगाए जाने के पीछे सरकार की तरफ से यह तर्क दिया गया है कि पुराने वाहनों के सड़कों पर दौड़ने की वजह से प्रदूषण अधिक मात्रा में उत्पन्न होता है। ऐसे में इस प्रदूषण को कम करने के लिए जो खर्च किया जा रहा है, उसके कुछ हिस्से को पुराने वाहनों से ग्रीन टैक्स के रूप में ही वसूलने का फैसला किया गया है। इसी टैक्स को केंद्र सरकार की तरफ से ग्रीन टैक्स का नाम दे दिया गया है।
  • इस तरह से प्रदूषण को कम करने के लिए चल रहे प्रयासों पर जो खर्च आ रहा है, उस खर्च की पूर्ति के लिए जो टैक्स की वसूली की जाने वाली है, वही ग्रीन टैक्स के नाम से जानी जा रही है। वास्तव में पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन टैक्स से प्राप्त होने वाले राजस्व का इस्तेमाल होने वाला है। इस तरह से ग्रीन टैक्स को प्रदूषण कर या फिर पर्यावरण कर भी कहना गलत नहीं होगा।
  • ऐसा नहीं है कि सभी राज्यों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा ही है। अलग-अलग राज्यों में इसका स्तर भी अलग-अलग देखने के लिए मिलता है। जिस राज्य में प्रदूषण का स्तर जैसा रहता है, उसी के मुताबिक ग्रीन टैक्स की वसूली भी होने वाली है। इस तरीके से ग्रीन टैक्स से जो लाभ प्राप्त होने वाला है, उसे राज्यों के साथ भी बांटा जाएगा।
  • प्रदूषण से निपटने के लिए अलग-अलग राज्यों में नई तकनीकें भी स्थापित की जानी हैं। ऐसे में ग्रीन टैक्स से जो पैसे आएंगे, उसका इस्तेमाल इस काम में किया जाएगा।
  • सरकार की तरफ से प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कई तरह के कदम पहले से ही उठाए जाते रहे हैं। इथेनॉल के प्रयोग को सरकार इसी वजह से बढ़ावा दे रही है। ऐसा करने से पेट्रोल और डीजल आयात करने पर जो खर्च आ रहा है, उसमें कमी लाई जा सकेगी। यही नहीं, ई-वाहनों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित करने का काम सरकार कर रही है।

किस तरह से वाहनों पर लगेगा Green Tax?

  • Green Tax in India को कोई नया कांसेप्ट नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि कई राज्यों में पहले से ही ग्रीन टैक्स वसूला जा रहा है। परिवहन मंत्रालय की तरफ से जो प्रस्ताव दिया गया है, उसमें ट्रांसपोर्ट वाली गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स लगाने की बात कही गई है। रोड टैक्स के 10 से 15 फ़ीसदी की दर से ग्रीन टैक्स लगाया जा सकता है। जिन शहरों की गिनती सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में होती है, वहां जो गाड़ियां पंजीकृत हैं, उन्हें सबसे ज्यादा ग्रीन टैक्स चुकाना पड़ेगा। यह ग्रीन टैक्स का 50 फ़ीसदी तक हो सकता है।
  • यही नहीं, ग्रीन टैक्स का स्लैब भी डीजल और पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियों के लिए अलग-अलग निर्धारित किया जाएगा। इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों, एलपीजी और सीएनजी से चलने वाले वाहनों एवं इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर किसी भी तरह का ग्रीन टैक्स नहीं लगाया जा रहा है। साथ ही हार्वेस्टर, टिलर और ट्रैक्टर जैसे वाहन, जो खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं, उन्हें भी ग्रीन टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • एक सरकारी अनुमान बताता है कि वाहनों से जो प्रदूषण हो रहा है, उसमें 65 से 70 फीसदी योगदान व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल में आ रही गाड़ियों का है। जितने भी वाहन देश में सड़कों पर दौड़ रहे हैं, कुल वाहनों में उनकी तादाद लगभग 5 फीसदी है।
  • जहां तक निजी वाहनों का सवाल है, तो 15 वर्षों के बाद रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को रिन्यू करने के दौरान उन पर ग्रीन टैक्स लगाया जाएगा। इसके अलावा सिटी बस जैसे सार्वजनिक परिवहन के वाहनों पर ग्रीन टैक्स कम लगेगा।
  • जो राजस्व की प्राप्ति ग्रीन टैक्स से होगी, उसे एक अलग खाते में रखने का प्रस्ताव है। ग्रीनटेक को लगाए जाने का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि इसकी वजह से लोग नए और कम प्रदूषण करने वाले वाहनों को इस्तेमाल में लाना शुरू कर देंगे।
  • संभव है कि आने वाले वक्त में केंद्र और राज्य सरकारें गाड़ियों पर स्क्रेपिंग पॉलिसी को भी लागू कर दें। ग्रीन टैक्स के अधिसूचित होने के बाद 1 अप्रैल, 2022 से अमल में आने की संभावना है।

चलते-चलते

इस लेख में सवाल What is Green Tax का जवाब हमने आपको विस्तार से दिया है। इसे पढ़ने के बाद आपको यह समझ आ गया होगा कि ग्रीन टैक्स लागू करने के पीछे सरकार का सबसे बड़ा मकसद प्रदूषण को नियंत्रण में लाना है। ऐसे में ग्रीन टैक्स से केवल सरकार का ही नहीं, बल्कि हम सभी का फायदा होने वाला है, क्योंकि इससे लोग कम प्रदूषण करने वाले और नए वाहन प्रयोग में लाना शुरू कर देंगे।

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