आयकर को सरल शब्दों में ऐसे समझें

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Income Tax

आयकर के नाम से आप परिचित तो होंगे ही, मगर हो सकता है कि आपको आयकर से जुड़ी हर वो जानकारी नहीं हो, जो आयकर चुकाने की स्थिति में आपके काम आती है। यहां हम आपको आयकर की आधारभूत जानकारी से लेकर हर वो जानकारी दे रहे हैं, जो आपके लिए जरूरी है।

इसे कहते हैं आयकर (Income Tax)

  • हम अपनी आमदनी का एक हिस्सा सरकार को देते हैं।
  • हमारी आय के अनुसार इसका हिस्सा निर्धारित होता है।
  • सरकार को दिये जाने वाले इसी हिस्से को आयकर या इनकम टैक्स के नाम से जाना जाता है।

इसलिए देते हैं आयकर

  • सरकार जो हमें सुरक्षा से लेकर नागरिकीय और प्रशासनिक सुविधाएं तक उपलब्ध कराती हैं, उन पर सरकार को बहुत खर्च करना पड़ता है।
  • ऐसे में सरकार अलग-अलग प्रकार के कर के रूप में हमसे पैसे लेती है, जिनमें से एक आयकर भी है।

दो प्रकार के कर

  • एक तो हमारी आमदनी में से जो सरकार कुछ हिस्सा लेती है, वह प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) के रूप में जाता है।
  • कुछ सेवा जो हम लेते हैं या फिर वस्तुओं का उपभोग करते हैं, सरकार उस पर भी कर लगाती है, इसे परोक्ष कर (Indirect Tax) कहते हैं।

प्रत्यक्ष कर

  • प्रत्यक्ष कर में सबसे बड़ा आयकर ही होता है।
  • हर साल इसका नियम तय होते हैं और इसी के अनुसार हम नागरिकों और संस्थाओं से सरकार आयकर वसूलती है।
  • कोई व्यक्ति, संयुक्त परिवार, कंपनी, संगठन, प्रतिष्ठान, संस्था आदि इसमें आते हैं और आय के अनुसार आयकर वसूला जाता है।

इनके पास है आयकर वसूलने का अधिकार

  • भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में यह प्रावधान है कि खेती से आय से अलग आमदनी वाले लोगों से केंद्र सरकार कर वसूल सकती है।
  • जिन शर्तों के अनुसार कर वसूले जाएंगे, इसका उल्लेख आयकर अधिनियम, 1961 और आयकर नियमावली, 1962 में है।
  • साथ ही केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से समय-समय पर इससे संबंधित नियम और निर्देश जारी किये जाते हैं।

कर की गणना में ये होते हैं शामिल

  • कृषि के अलावा अन्य सभी आय।
  • वेतन से आय।
  • प्रॉपर्टी से आय जैसे कि किराये या लीज से मिलने वाली आय।
  • पूंजी से आय जैसे कि प्रॉपर्टी की बिक्री से हुई आय।
  • नौकरी के अतिरिक्त किसी पार्ट टाईम या अन्य व्यवसाय से आय। इसमें फ्रीलांसिंग भी शामिल है।
  • बचत खाता, एफडी व बॉन्ड आदि के ब्याज से होने वाली आय।

इतनी आमदनी पर इतना कर (वर्ष 2018-19)

  • 2.5 लाख रुपये से कम की आय पर कोई कर नहीं।
  • 2.5 से 5 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत कर।
  • 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत कर।
  • 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर।
  • नौकरी करने वाले स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी लाभ उठाते हैं, जिसके तहत वे अपनी आय में से 40 हजार रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाकर कर की गणना करते हैं।
  • आमदनी 50 लाख से एक करोड़ रुपये की हो तो आयकर का 10 प्रतिशत सरचार्ज भी लगता है।
  • उसी तरह से आय एक करोड़ रुपये से अधिक होने पर आयकर का 15 प्रतिशत सरचार्ज लगता है।
  • आयकर सामान्य नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों (60 से 80 वर्ष), अत्यधिक वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष से अधिक), व्यापारिक प्रतिष्ठान, देशी व विदेशी कंपनियों आदि के लिए अलग-अलग होते हैं।

एजुकेशनल सेस

  • यह सभी करदाताओं को देना पड़ता है।
  • आयकर और सरचार्ज के कुल योग पर तीन प्रतिशत एजुकेशनल सेस के तौर पर जाता है।

आयकर में छूट और कटौतियां

  • सेक्शन 10 (13A) के तहत आवास भत्ते के तहत आयकर में छूट मिलती है।
  • ट्रांसपोर्ट अलाउंस से भी 1600 रुपये प्रति माह या 19,200 रुपये सालाना तक आयकर में छूट मिलती है।
  • सेक्शन 80 के तहत कटौतियों जैसे कि एम्प्लॉय प्रोविडेंट फंड (EPF), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना, राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र आदि पर आयकर में छूट मिलती है।
  • जीवन बीमा, नेशनल पेंशन स्कीम (NPS), म्यूचुअल फंड आदि में भी जमा 1.5 लाख रुपये तक की रकम छूट दिलाती है।
  • दो बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन की किस्त में मूलधन आदि से भी कर में छूट मिलती है।
  • पहली बार घर खरीद रहे हैं तो आपको सेक्शन 24B के अंतर्गत दो लाख रुपये तक के ब्याज पर छूट मिल जाती है।
  • स्वास्थ्य बीमा भी कर में छूट दिलाता है।
  • कोई विकलांगता की वजह से आश्रित हो, उस पर भी खर्च रकम पर छूट का प्रावधान है।
  • कोई गंभीर बीमारी के कारण आश्रित हो, उसके उपचार पर आने वाले खर्च को लेकर भी कर भुगतान में छूट मिल जाती है।
  • शिक्षा ऋण लेने की स्थिति में भी कर अदायगी में छूट का प्रावधान है।

ऐसे जमा करते हैं आयकर

  • TDS यानी कि टैक्स डिडक्शन एट सोर्स के जरिये आपका आयकर तब कटता है, जब आप वेतन पाने वाले कर्मचारी हैं।
  • वेतन के अलावा अन्य स्रोतों से प्राप्त आय पर एडवांस टैक्स भी चुकाना पड़ता है।
  • टीडीएस और एडवांस टैक्स जमा करने के बाद भी यदि आपको लगता है कि कुछ आमदनी कर के रूप में बच रही है, तो सेल्फ असेसमेंट टैक्स भी आपको देना पड़ता है।

आयकर रिटर्न

  • आपने जो कर दिया है, उसकी सूचना सरकार को देने के लिए आप हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में आयकर रिटर्न फाइल कर देते हैं।
  • जहां, आम नागरिकों को 31 जुलाई तक, वहीं व्यावसायियों को 31 सितंबर तक इसे दाखिल करना पड़ता है।

आयकर से संबंधित कुछ प्रमुख फॉर्म

  • फॉर्म 26A में अलग-अलग वक्त पर आपके द्वारा जमा किये गये कर का पूरा ब्योरा दर्ज रहता है।
  • फॉर्म 16 में टीडीएस आदि के जरिये कर कटौती का विवरण होता है।

निष्कर्ष

आर्थिक तौर पर देश सबल रहे और विकास का चक्का पूरी गति से घूमता रहे, इसके लिए पूरी ईमानदारी से और समय रहते आयकर जमा करना हम सभी का फर्ज है। बताएं, क्या आप या आपके परिवार के लोग आयकर जमा करते हैं?

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