The Liberation of Paris: आज़ादी के 76 साल और ‘हिटलर’ की सनक

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Liberation of Paris

अगर आपसे सवाल किया जाए कि क्या किसी ऐसे शख्स का नाम बता सकते हो, जिसकी सनक ने 6 करोड़ से भी ज्यादा लोगों की जान ले ली थी? तो आपके मन में सवाल आएगा कि क्या विश्व के इतिहास में ऐसा भी कोई था? तो आपको बता दें कि आधिकारिक तौर पर तो नहीं लेकिन इन डायरेक्ट तौर पर तो था। जिसका नाम था ‘हिटलर’ और वो संग्राम था द्वितीय विश्व युद्ध (second world war), जी हां ये विनाशकारी युद्ध पौने छह साल चला था, और छह करोड़ से भी ज्यादा लोगों में 24 हजार भारतीय भी शामिल थे, जिनके खून ने इस युद्ध को सींचा था।

आज इस लेख में बात होगी पेरिस की आजादी (liberation of Paris) की, जानेंगे ऍडोल्फ़ हिटलर के चंगुल से कैसे पेरिस ने अपने आजादी की कहानी लिखी थी।

इस लेख के मुख्य बिंदु-

  • एक नजर बैकग्राउंड पर
  • 25 August 1944 – The Liberation of Paris
  • तारीख-दर-तारीख जानिये The Liberation of Paris के फैक्ट्स
  • सरांश

एक नजर बैकग्राउंड पर

दूसरे विश्व युद्ध के बीज को पहले विश्व युद्ध के बाद ही बो दिया गया था, जर्मनी का एक हिस्सा जिसे प्रशिया कहते हैं, उसे उससे अलग कर दिया गया था। Adolf Hitler ने कई बार आवाज बुलंद की थी कि देन्जिंग नगर जर्मनी को लौटा दिया जाए, लेकिन हर बार ब्रिटेन ने उसकी इस मांग को मानने से इंकार कर दिया था।

  • म्युनिक समझौते के बाद हिटलर को ऐसा लगने लगा था कि उसकी धमक अब पूरे विश्व में फ़ैल चुकी है, इसलिए 1 सितंबर 1939 को जर्मन सेना ने पोलैंड पर हमला कर दिया, याद रखियेगा यहीं से शुरू हुआ था सेकंड वर्ल्ड वॉर (World War II)
  • History.com के अनुसार इसके बाद 3 सितंबर को ब्रिटेन और फ्रांस ने भी जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी थी। किसी भी एग्जाम में पूछा जाए कि तत्कालिक कारण क्या था द्वितीय विश्व युद्ध का तो जवाब देना है कि पोलैंड हमला ही तत्कालिक कारण था।
  • 3 सितंबर को ब्रिटेन और फ़्रांस ने युद्ध का ऐलान तो कर दिया था, लेकिन कई महीनो तक कोई लड़ाई नही हुई थी, इसलिए सितंबर 1939 से अप्रैल 1940 तक को ‘फोनी वॉर’ भी कहा जाता है यानी नकली युद्ध।
  • BBC के अनुसार 9 अप्रैल 1940 में जर्मनी ने नोर्वे और डेनमार्क पर हमला करके उनको भी जीत लिया था। इसके बाद फ्रांस पर बहुत तेजी से हमला करते हुए 14 अप्रैल 1940 में जर्मनी ने पेरिस को अपना गुलाम बना लिया था।
  • हिटलर का स्टाइल ही युद्ध लड़ने का ये था कि हमले में इतनी तेजी होनी चाहिए कि सामने वाले को सम्भलने का मौका भी ना मिले, उसे पूरे यूरोप पर कब्जा करना था।
  • 22 जून 1940 को फ्रांस सरकार ने आत्म समर्पण कर दिया था। अब आधा फ्रांस हिटलर के हाथों में जा चुका था।

25 अगस्त 1944 The Liberation of Paris

14 अप्रैल 1940 के बाद से ही पेरिस के लोगों का आजादी के लिए संघर्ष शुरू हो चुका था, ये संघर्ष 4 साल बाद खत्म हुआ जब 25 अगस्त 1944 के दोपहर में आइफ़िल टावर पर नाजी झंडे को नीचे उतारने के बाद फ्रांस का झंडा लहराया गया था।

तारीख-दर-तारीख जानिये The Liberation of Paris के फैक्ट्स

  • साल 1940 के अगस्त महीने में फ़्रांस के पेरिस में एक क्रान्ति सी चल रही थी, उनकी सियासत में विरोधी बैठा था, लेकिन मजदूर से लेकर पादरियों तक का समर्थन क्रान्ति के लिए था, सभी के लब पर आज़ादी का ही नारा गूंज रहा था, यही वो महीना था जब 4 साल से राज करने वाले नाजी शासन को उखाड़ने की आवाज अपने चरम पर थी, 12 दिनों के संघर्ष के बाद पेरिस आज़ाद हो गया।
  • History website के अनुसार 6 जून 1944 ही वो तारीख थी जब ब्रिटिश और
    अमरीकी सेना, उस दौर में जिसकी संख्या दस हजार थी, वो नॉरमांडी के समुद्र तटों पर पहुंच चुकी थी। इसी दिन से अमरीकी और ब्रिटिश सेना ने नाजी सेना के खिलाफ युद्ध का आगाज किया था।
  • 10 जून 1944 को कनाडाई सैनिक भी इन दोनों सेना के साथ जुड़ चुके थे। कई हफ़्तों तक नॉरमांडी का संघर्ष जारी रहा, इसके बाद सेना ने आगे बढ़ने का फैसला लिया।
  • 17 अगस्त 1944 – कई इतिहासकारों ने उल्लेख किया है ऑर्लियांस और चार्ट्रेस पर कब्जा करते हुए सेना पेरिस के दक्षिणी हिस्से पर पहुंच चुकी थी।
  • अब सेना के सामने चुनौती थी कि बिना राजधानी में enter किये हुए हिटलर की सेना तक कैसे पहुंचे, क्योंकि अगर गठबंधन सेना राजधानी में घुसती तो वहां भारी तबाही होती।
  • उस दौर के अमरीकी जनरल रहे ओमर ब्रैडली ने अपने जर्नल में लिखा था कि पेरिस ‘हमारे नक्शे में एक काली स्याही था, जिसे पार कर हमें राइन नदी की ओर जाना था।’
  • इस बीच आम लोगों ने भी आवाज़ उठाना शुरू कर दिया था, जब हर तरफ संघर्ष चल रहा हो तो पेरिस के अंदर भी विरोधाभाषी स्वर सुनाई देने लगे थे, लेकिन गॉल के नेत्रत्व में फ़्रांसीसी सरकार लगातार उनसे धैर्य बनाए रखने की अपील कर रही थी।
  •  18 अगस्त 1944 – इस दिन फ्रांस फोर्सेज ऑफ द इंटीरियर (एफएफआई) हरकत में आई, और इसके सबसे प्रमुख अधिकारी रॉल टांगुए ने एक ऐसे विद्रोह का आदेश दे दिया, जिसके बाद कुछ बड़ा होने ही वाला था।
  • 19 अगस्त 1944 – जब फ्रांस फोर्सेज ऑफ द इंटीरियर (एफएफआई) ने आम विद्रोह के आदेश दे दिए थे, उसके ठीक एक दिन बाद गॉल के नेत्रत्व की पार्टी ने भी विद्रोह के आदेश को पास कर दिया, इसी के बाद से वहां आराजकता के हफ्ते की शुरुआत भी हो चुकी थी।
  •  19 अगस्त 1944 – हिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार यही वो दिन था जब मेट्रो और रेल सेवाओं को भी बंद कर दिया गया था। आम हड़ताल की शुरुआत भी हो चुकी थी, न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि करीब 3000 पुलिस कर्मियों ने हड़ताल में जाकर, अपने-अपने थानों में फ्रांसीसी झंडा लहरा दिया था। इसके बाद आन्दोलन हुए, और उन आंदोलनों में करीब 170 पुलिस कर्मियों की जान भी गई थी।
  • हिस्ट्री की रिपोर्ट ये भी बताती है कि इस संघर्ष में 16000 जर्मन सैनिक ने हिस्सा लिया था, इसी के साथ करीब 80 टैंक भी मौजूद थे, इन सबकी जिम्मेदारी जनरल डीट्रिश फॉन कॉल्तित्स के कंधो पर थी।
  • 24 अगस्त 1944 – इस दिन की शाम को पहला फ्रेंच बख्तरबंद टैंक शहर में आया, शहर में आने के बाद ये करीब 9 बजे सिटी हॉल के सामने पहुंच गया, लोग देखकर आश्चर्यचकित भी थे और खुश भी, हर तरफ नारे लग रहे थे कि ‘फ्रेंच आ रहे हैं, वो आ रहे हैं।’
  • 25 अगस्त 1944 ही वो ऐतिहासिक दिन था पेरिस के लिए जिस दिन वो आधिकारिक तौर पर आज़ाद हुआ था, इसी दिन को लिबरेशन ऑफ़ पेरिस (Liberation of Paris) के नाम से भी जाना जाता है, इसी दिन सिटी हॉल के बाहर जनरल चार्ल्स दे गॉल ने आज़ादी के स्वर में ऐलान किया था कि ‘पेरिस शहीद भी हुआ, नाराज भी हुआ,पेरिस तो टूट भी गया था, बिखर भी गया था, लेकिन आज वो दिन है जब पेरिस आज़ाद हो गया है।’
  • आपको बता दें पेरिस के आज़ाद होने के बाद दूसरे विश्व युद्ध की खूनी दास्तान खत्म नहीं हुई थी बल्कि ये जंग इसके बाद 9 महीने और चली थी, फिर जाकर साल 1945 में जर्मनी ने आत्म समर्पण किया था।

सरांश

साल 1914 से लेकर 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध के अंत में 1919 की वर्साई संधि में ही वोर्ल्ड वॉर २ के बीज बो दिए गये थे। क्योंकि इस संधि की कुछ ऐसी बातें थीं, जिनको लेकर हिटलर ने जनता के अंदर आक्रोश भरा दिया था, युद्ध को शुरू करने के लिए ये संधि हिटलर के काफी काम आई थी, अगर आप ये आर्टिकल पढ़ रहे हैं तो हमें बताएं कि ‘हिटलर’ ने आत्महत्या किस सन में की थी?

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