अपने काम से दुनिया की सूरत बदलने वाले 7 Indian Scientists

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The Great 7 Indian Scientists Who Changed the World

विज्ञान के क्षेत्र में दुनियाभर में जो प्रगति आज हम देख रहे हैं, उनमें कई भारतीय वैज्ञानिकों की भी बेहद अहम भूमिका रही है। इन वैज्ञानिकों के आविष्कारों और विज्ञान के क्षेत्र में इनके योगदान की वजह से भारत के प्रति दुनिया का नजरिया ही पूरी तरह से बदल गया है। यहां हम आपको 7 ऐसे Indian scientists के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने दुनिया ही बदल दी।

1. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

बात जब उन Indian scientists की होती है, जिन्होंने दुनिया बदल दी तो उसमें निश्चित रूप से सबसे पहले नंबर पर डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम का ही नाम आता है, जिन्हें हम मिसाइल मैन के नाम से भी जानते हैं। भारतीय अनुसंधान संगठन (ISRO) में 1962 में शामिल होने वाले कलाम ने भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह SLV-III प्रक्षेपास्त्र को बनाने का गौरव तो हासिल किया ही, साथ ही रोहिणी उपग्रह को 1980 में पृथ्वी की कक्षा के नजदीक स्थापित करने में भी सफलता पाई थी। स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन करने का श्रेय और स्वदेशी तकनीकों से अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों को बनाने का भी श्रेय जाता है। उनकी मेहनत का ही यह नतीजा रहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब में शामिल हो गया।

2. विक्रम साराभाई

विक्रम अंबालाल साराभाई भी great Indian scientists में से एक रहे हैं, क्योंकि भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखने का श्रेय इन्हीं को जाता है। शायद इसलिए इन्हें भारत के अंतरिक्ष इतिहास का जनक भी कहा जाता है। nuclear energy के साथ electronics व अन्य क्षेत्रों में योगदान देने के साथ विक्रम साराभाई ने अंतरिक्ष और शोध से जुड़े करीब 40 संस्थान शुरू करवाये थे। ये मूल रूप से गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले थे। बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थाान में इन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ सीवी रमन के साथ भी काम किया था। 30 दिसंबर, 1971 को केवल 52 वर्ष की उम्र में ही इनका निधन हो गया, मगर अपने जीवनकाल में इन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान सहित कई क्षेत्रों में भारत के विकास का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

3. डॉ जगदीश चंद्र बोस

जो Indian scientists अपनी discoveries की वजह से दुनियाभर में छा गये, उनमें डॉ जगदीश चंद्र बोस का नाम बेहद प्रमुखता से लिया जाता है, क्योंकि पहली बार दुनिया को इन्होंने ही बताया था कि सभी सजीव जीवों की तरह पेड़-पौधों को भी दर्द होता है। सर बोस जगदीश चंद्र बसु के तौर पर भी जाने जानेवाले इस वैज्ञानिक को रेडियो विज्ञान का पिता भी कहा गया है। इन्होंने दुनिया को छोटे तरंगें पैदा करने का तरीका तो बताया ही, साथ ही Heinrich Hertz को उन्होंने एक नया और विकसित रूप भी दे दिया। बोस ने पौधों पर विद्युतीय संकेतों का क्या प्रभाव पड़ता है, इसका अध्ययन किया। पौधों की वृद्धि एवं अन्य जैविक क्रियाओं पर समय के असर के अध्ययन की बुनियाद इसी वैज्ञानिक ने रखी थी, जो बाद में विज्ञान की शाखा क्रोनोबायोलॉजी के नाम से मशहूर हुई।

4. डॉ होमी जहांगीर भाभा

भारत में परमाण ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना भी डॉ होमी जहांगीर भाभा के योगदान के बिना नहीं की जा सकती थी और यही वजह है कि इनकी गिनती उन Indian scientists में होती है, जिन्होंने दुनिया को बदलकर रख दिया। भारत यदि 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण कर पाया तो यह इन्हीं की वजह से संभव हो पाया था और यही कारण है कि इन्हें Architect of Indian Atomic Energy Program भी कहा जाता है। जब किसी को nuclear science को लेकर कोई खास जानकारी नहीं थी, तब भाभा ने इस पर काम करना शुरू कर दिया था। यही नहीं, जब उन्होंने nuclear energy से बिजली पैदा किये जाने की बात कही थी तो कोई इसे मान ही नहीं रहा था।

5. सुब्रमण्यम चंद्रशेखर

भौतिकी शास्त्र के लिए 1983 में नोबेल पुरस्कार पाने वाले सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर भी great Indian scientist रहे हैं, जिन्होंने श्वेत बौने नाम (White Dwarf) के नक्षत्रों को ढूंढ़ा था। इन्होंने नक्षत्र खोज निकाले थे, इनकी सीमा को चंद्रशेखर सीमा के नाम से जाना गया। दुनिया की उत्पत्ति कैसे हुई, इस रहस्य को सुलझाने में चंद्रशेखर की इस खोज का उल्लेखनीय योगदान रहा है। खगोल भौतिक शास्त्र और सौरमंडल से संबंधित विभिन्न विषयों पर कई किताबें लिखने वाले चंद्रशेखर महान भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन के भतीजे भी थे। तारे के गिरने और इनके लुप्त हो जाने की अपनी जिज्ञासा को चंद्रशेखर ने 1934 में ही सुलझा लिया था।

6. डॉ हरगोविंद खुराना

डॉ हरगोविंद खुराना उन Indian scientists में से हैं जो अपनी discoveries के लिए दुनियाभर में पहचाने गये। DNA की व्याख्या करके और इस पर शोध करके इन्होंने 1968 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार भी हासिल किया। निरेनबर्ग, रोबेर्ट और होल्ले मार्शल के साथ मिलकर इन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उनके शोधे से यह पता चल पाया कि न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लिओटाइड्स, जो कोशिका के आनुवंशिक कूट को ले जाते हैं, वे प्रोटीन संश्लेषण को वे कोशिका में किस तरह से नियंत्रित करते हैं।

7. सर सीवी रमन

वर्ष 1930 में भौतिक शास्त्र का नोबेल पुरस्कार पाकर विज्ञान का नोबेल पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक बनने वाले इस वैज्ञानिक का पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकटरमन था। प्रकाश प्रकीर्णन के क्षेत्र में सीवी रमन का योगदान अविस्मरणीय रहा है। वाद्य यंत्रों की ध्वनियों पर भी इन्होंने अनुसंधान किया था। इन्होंने 28 फरवरी, 1928 को रमन प्रभाव की खोज की थी। Indian Association for the Cultivation Of Science और कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में इन्होंने अपने शोध कार्य को अंजाम दिया था। प्रकाश के क्षेत्र में अपने कार्य के लिए ही इन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था, जबकि 1954 में भारत रत्न से उन्हें रमन प्रभाव के लिए सम्मानित किया गया था।

चलते-चलते

ये वे 7 Indian scientist रहे हैं, जिन्होंने दुनिया को बदल डाला। इनकी खोज ने न केवल दुनिया को कई क्षेत्रों में नया नजरिया प्रदान किया, बल्कि दुनिया को आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखा दिया। इनकी बदौलत ही भारत मे भी विज्ञान की महत्ता पहचानी गई व इससे प्रेरणा ली गई और दुनिया में विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत का दबदबा धीरे-धीरे कायम होता चला गया।

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