भारत एक कृषि प्रधान देश है लेकिन यहाँ के किसान गरीब हैं

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भारत उन विकासशील देशों में से है जिनकी जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है। इसी कारण दुनिया के नक्शे पर भारत को कृषि प्रधान देश माना जाता है। प्राकर्तिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है, इसी कारण तकनीकी युग में भी खेती-बाड़ी कुछ लोगों का मुख्य व्यवसाय है। बल्कि अब तो हालात यहाँ तक हैं की एमबीए करके भी कुछ युवा अपने ज्ञान का उपयोग भारत के छोटे-छोटे गांवों में जाकर कर रहे हैं। यह तो आप भी जानते हैं की भारत को औधोयोगिक और तकनीकी क्रांति का पूरा फायदा हुआ है। फिर भी क्या कारण है की आज भी हमारा किसान गरीब है। आइये कुछ कारणों की जांच करते हैं:

भारतीय किसान क्यूँ हैं गरीब:

हर मौसम से बेपरवाह, ज़मीन से सोना निकालने में जुटा भारतीय किसान आजादी के 70 वर्ष बाद और इतनी परियोजनाओं की सफलता के बाद भी गरीब ही है। आइये देखते है की क्या कारण है :

  1. कृषि शिक्षा का अभाव:

इसे आप क्या कहेंगे की कृषि प्रधान देश में कृषि शिक्षा का ही अभाव है। 1947 से लेकर इस सदी के आरंभ तक नाम मात्र के कृषि विश्वविध्यालय खोले गए हैं। जो कृषि शिक्षा के नाम पर संस्थान हैं उनमें विश्व स्तर की सुविधाओं का अभाव है। शिक्षा के स्तर में भी गुणवत्ता का अभाव है। ऐसे में किसान का बेटा नौकरी करने शहर आ जाता है, क्योंकि उसे अपना भविष्य किसानी में नहीं नौकरी में दिखाई देता है।

  1. भूमि प्रबंधन:

कहते हैं न की एयर कंडीशनर दफ्तरों में बैठने वाले तपी हुए और सुखी ज़मीन के लिए नीतियों का निर्माण करते हैं। इस प्रकार वो जिस ज़मीन के लिए योजना बना रहे हैं उसी की जमीनी हकीकत से अंजान होते हैं। आज़ादी के इतने साल बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर भूमि और फसल प्रबंधन का काम नहीं होता है। फसल के लिए बीज बोने से लेकर पकी हुई फसल के सही संग्रहण और विक्रय तक की सही नीति और नियम न होने के कारण आज भी आलू बोने वाला किसान आत्महत्या कर रहा है और उसी आलू के चिप्स बनाने वाली कंपनियाँ चांदी पीट रहीं हैं।

  1. भूमि अधिगृहण नीति:

अगर कृषि को वास्तव में बढ़ावा देना है तो सरकार को भूमि अधिग्रहण नीति में बदलाव करना चाहिए । केवल उसी नीति का सरकारी रूप से अधिग्रहण किया जाना चाहिए जो बिलकुल भी कृषि योग्य नहीं है। जबकि वास्तविकता बिलकुल इसके विपरीत है। कंक्रीट के जंगलों के खेती लायक भूमि ही नहीं छोड़ि है।

  1. साख प्रबंधन:

किसानों और उनकी फसल के देखभाल के लिए किसान केंद्र अगर बनाए जाएँ जहां पर कर्मचारी हर समय उपलब्ध हों तो इससे किसान को बहुत बड़ी मदद मिलती है। किसी प्रकर की दुर्घटना होने पर किसान और उसके परिवार को समय पर सहायता न मिलने पर किसान की मेहनत बेकार हो जाती है और उसका परिवार सड़क पर आ जाता है।

  1. ऋण योजनाएँ:

प्रेमचंद का किसान आज भी ऋण लेकर ही अपनी फसल को बोने से लेकर उसको बेचने तक का काम करता है। लेकिन सरकार द्वारा बनाई गईं ऋण योजनाएँ अनपढ़ किसानों तक पहुँचती नहीं हैं और उसका फायदा अनजाने लोगों में बंट जाता है।

इसके अलावा भी बहुत कारण हैं जो आज तक किसान की गरीबी को दूर नहीं कर पाये हैं। अगर सचमुच किसान को उसका सही फायदा पहुंचाना है तो किसान की सोच के साथ ही सोचना होगा।

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