USA का Apollo 11 Mission, चांद पर जब मानव ने रखा पहला कदम

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Apollo 11 mission

Neil Armstrong का पहला कदम पड़ा और इतिहास बन गया। Apollo 11 Mission कामयाब हुआ। यह हुआ आज से 51 साल पहले। तारीख थी 21 जुलाई। साल था 1969। समय था रात के 8 बजकर 17 मिनट और 39 सेकेंड। जगह थी चंदा मामा की। वही चंदा मामा, जिसकी कविताएं सुनकर हम बड़े हुए हैं। जिसके बारे में भूगोल ओर खगोलशास्त्र में हम पढ़ते आये हैं।

इस लेख में आप जानेंगे

  • क्या हुआ था 1961 में?
  • 5 लाख वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत
  • ईगल लूनर माॅड्यूल
  • प्रोजेक्ट जेमिनी ने खोले कामयाबी के दरवाजे
  • दुर्घटना का शिकार हुए थे 3 अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री
  • दुर्घटना का शिकार हुए थे 3 अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री
  • Neil Armstrong एवं दो साथियों का चयन
  • Launch हुआ Apollo 11

बज आल्ड्रिन और माइक काॅलिंस भी first man to Moon नील आर्मस्ट्रांग के साथ USA के इस Lunar Mission पर गये थे। अपोलो 11 मिशन को लांच किया गया था 16 जुलाई, 1969 को। हालांकि, शुरुआत तो इस मिशन की 1961 में ही हो गई थी।

क्या हुआ था 1961 में?

अंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति बनने का श्रेय रुसी अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन को हासिल हुआ है। पृथ्वी की कक्षा में यूरी गगारिन 1961 में वोस्टोक अंतरिक्ष यान में बैठकर गये थे। इसे तत्कालीन सोवियत संघ द्वारा लांच किया गया था। जब गगारिन सुरक्षित धरती पर लौट आये तो सोवियत संघ की इस कामयाबी ने अमेरिका को भी कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित कर दिया। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जाॅन एफ केनेडी की ओर से 10 वर्षों के अंदर चांद पर इंसानों को सुरक्षित पहुंचाने और सुरक्षित वापस लाने की भी घोषणा कर दी गई।

5 लाख वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत

नासा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की गई इस घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध था। दिन-रात एक कर दिये 5 लाख वैज्ञानिकों ने चांद पर इंसानों को उतारने वाले इस अपोलो 11 मिशन को जीवंत रूप देने के लिए।

ईगल लूनर माॅड्यूल

  • नासा का लक्ष्य एक इतना मजबूत और ताकतवर अंतरिक्ष यान एवं राॅकेट को तैयार करना था, जिसमें कि न केवल किसी मानव को अंतरिक्ष में सकुशल भेजा जा सके, बल्कि सुरक्षित तरीके से उसे धरती पर वापस भी लाया जा सके।
  • इसके लिए नासा ने ईगल नामक लूनर माॅड्यूल तैयार किया। इसे तैयार करने में नासा को 6 वर्षों का समय लगा।
  • चंद्रमा की कक्षा में दाखिल होने के बाद राॅकेट के माध्यम से यहां पहुंचे इस लूनर माॅड्यूल को चंद्रमा की सतह पर लैंड हो जाना था।
  • एक बहुत ही मजबूत एवं शक्तिशाली राॅकेट इंजन तैयार करने में नासा कामयाब रहा, जो कि चांद तक सुरक्षित जाने और लौट कर आने में सक्षम था।

प्रोजेक्ट जेमिनी ने खोले कामयाबी के दरवाजे

  • प्रोजेक्ट जेमिनी को नासा ने 1961 में शुरू कर दिया था, ताकि मानव चांद मिशन को मूर्त रूप दिया जा सके। यह प्रोजेक्ट 1966 तक चलता रहा।
  • इस दौरान पृथ्वी की कक्षा में इंसानों को 10 बार भेजा गया और वापस लाया गया।
  • ऐसा करके यह समझने की कोशिश की गई कि अंतरिक्ष में जाने वालों इंसानों के शरीर के साथ उसकी सेहत पर अंतरिक्ष का असर किस तरह से होता है। साथ ही ढेर सारी तकनीकी चीजों का भी पता लगाया गया।

दुर्घटना का शिकार हुए थे 3 अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री

  • नासा चांद पर मानवों पर भेजने से पहले एक परीक्षण मिशन करना चाह रहा था। उसने अपोलो 1 नाम से यह मिशन शुरू किया और इसके तहत वर्जिल आई गस ग्रिसम, एड व्हाइट और रोजर बी चैफी नाम तीन अंतरिक्षयात्रियों को पहली बार पृथ्वी की कक्षा में भेजा।
  • इसका उद्देश्य तीनों को वहां भेजकर सुरक्षित वापस भी लाना था। मगर दुर्भाग्य से अपने इस चंद्र मिशन के रिहर्सल के दौरान 27 जनवरी, 1967 को लांच करने के साथ ही अपोलो 1 का केबिन आग की चपेट में आ गया, जिससे कि तीनों अंतरिक्षयात्रियों की मौत हो गई।
  • झटका तो नासा को इससे बहुत बड़ा लगा, लेकिन नासा ने बिना हिम्मत हारे अपने मिशन पर आगे बढ़ना जारी रखा।

Neil Armstrong एवं दो साथियों का चयन

मिशन में लोगों को शामिल करने को लेकर नासा बड़ी उधेड़बुन में था। उसने वायुसेना के साथ कई विभागों में काम कर रहे पायलटों व विशेषज्ञों के बारे में जानकारी जुटाते हुए एवं नये विमानों का परीक्षण करने वाले पायलटों पर भी गौर फरमाते हुए 15 टेस्ट पायलटों को छांट लिया। कई तरह के परीक्षण के बाद नासा की ओर से Lunar Mission के लिए नील आर्मस्ट्रांग, बज आल्ड्रिन और माइक कॉलिंस का चुनाव किया गया।

Launch हुआ Apollo 11

  • सैटर्न 5 राॅकेट से केनेडी स्पेस सेंटर से अंतराष्ट्रीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर नासा ने 16 जुलाई, 1969 को अपोलो 11 मिशन को लांच किया। आसपास की कई इमारतें तक इसके ताकतवर इंजन की वजह से हिल गई थीं।
  • चांद की सतह समतल न होकर यहां ऊंची-ऊंची पहाड़ियां और गड्ढे तक थे, जिसके कारण सुरक्षित उतरना आसान नहीं था। हालांकि, 6 वर्षों तक मेहनत करके नासा ने बहुतों सेटेलाइटों की मदद से निकाली हुईं तस्वीरें देखकर चांद पर उतरने वाली जगह चिह्न्ति कर ली और 19 जुलाई, 1969 को चांद की कक्षा में दाखिल हुआ अपोलो 11 चांद पर 20 जुलाई, 1969 को रात आठ बजे लैंड कर गया।
  • फिर 21 जुलाई को रात दो बजकर 56 मिनट पर नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहला कदम रखा और इस तरह से वे फस्र्ट मैन टू मैन बन गये। इसके थोड़ी देर बाद आल्ड्रिन भी चांद पर उतरे थे।
  • चांद पर उतरने से पहले आपोलो 11 के हिस्से कोलंबिया से ईगल को पृथक करना था और उसे ही चांद पर लैंड कराना था। नील आर्मस्ट्रांग और बज आल्ड्रिन ईगल पर सवार हो गये थे, जबकि चंद्रमा की कक्षा में कोलंबिया पर ही माइक काॅलिंस रुक गये थे।

चलते-चलते

USA के Apollo 11 Mission की कामयाबी को मानव सभ्यता की सबसे महान तकनीकी उपलब्धि माना गया है। चांद पर पहला कदम रखने वाले इंसान Neil Armstrong ने 82 वर्ष की उम्र में 25 अगस्त, 2012 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। इस सफल Lunar Mission के बाद से दुनियाभर के वैज्ञानिकों को इस दिशा में काम करने की प्रेरणा मिली।

तीनों अंतरिक्षयात्रियों की 24 जुलाई, 1969 को धरती पर सुरक्षित वापसी हो गई थी। चांद की सतह पर नील आर्मस्ट्रांग और आल्ड्रिन ने 21 घंटे 31 मिनट का वक्त बिताया था।

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