International Solar Alliance: Solar Awards एक नजर में

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International Solar Alliance यानी कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की एक बैठक हाल ही में वर्चुअल तरीके से संपन्न हुई है, जिसमें एक बार फिर से अध्यक्ष के तौर पर भारत का और उपाध्यक्ष के रूप में फ्रांस का चुनाव किया गया है। जब से ISA समझौता हुआ है, तब से यह पहला ऐसा मौका भी है जब सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले देशों के साथ उन संस्थानों को भी सौर पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है, जो सौर ऊर्जा को लेकर काम कर रहे हैं।

इस लेख में आपके लिए है:

  • International Solar Alliance को जानें
  • ISA के अब तक के सम्मेलन
  • ISA Solar Awards

International Solar Alliance को जानें

  • फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 नवंबर, 2015 को COP-21 के दौरान भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा ISA नाम से एक पहल की शुरुआत की गई थी। जो देश ISA के सदस्य हैं, उनके द्वारा सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करके मिलजुल कर बड़ी चुनौतियों का समाधान निकालना ही ISA का प्रमुख उद्देश्य है।
  • ISA का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि वित्तीय लागत के साथ प्रौद्योगिकी लागत को घटाने के लिए संयुक्त रूप से अवश्य प्रयास किये जायें और सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर जरूरी निवेश जुटाए जाएं।
  • इसके अलावा भविष्य की प्रौद्योगिकी के लिए सही मार्ग का निर्माण करना भी इसका उद्देश्य है।
  • वर्ष 2030 तक सतत विकास के जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और पेरिस समझौते में जलवायु परिवर्तन से जुड़े उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं, उन्हें हासिल करने की दिशा में काम करने वाले संगठनों में ISA को एक प्रमुख संगठन माना गया है।
  • वर्ष 2019 में ISA का दूसरा सम्मेलन हुआ तो इसके बाद से इसके सदस्य देशों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी।
  • विश्व बैंक और भारत सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर भी ISA ने हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य One Sun, One World, One Grid पहल का अच्छी तरीके से क्रियान्वयन करना है।
  • ISA सचिवालय ने इसी साल संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के साथ भी मिलकर काम करना शुरू किया है और आईएस सोलर टेक्नोलॉजी एंड एप्लीकेशन रिसर्च सेंटर नेटवर्क के संचालन पर विशेष रूप से इसके द्वारा ध्यान दिया जा रहा है।

ISA के अब तक के सम्मेलन

  • सबसे पहला सम्मेलन ISA का वर्ष 2018 में 2 से 5 अक्टूबर तक भारत के ग्रेटर नोएडा में हुआ था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसका उद्घाटन किया था।
  • ISA का दूसरा सम्मेलन भी भारत में ही राजधानी नई दिल्ली में 30 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2019 तक आयोजित किया गया था, जिसमें 78 देशों ने प्रतिभाग किया था।
  • तीसरा सम्मेलन ISA का वर्चुअल तरीके से बीते 14 से 16 अक्टूबर तक आयोजित हुआ है।

ISA Solar Awards

विश्वेश्वरैया पुरस्कार

  • हाल ही में ISA की जो बैठक संपन्न हुई है, उसमें विश्वेश्वरैया पुरस्कार वितरित किए गए हैं। ISA के तहत जो चार क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं, उसमें सबसे ज्यादा और सबसे तेजी से सौर क्षमता बढ़ाने वाले देशों को यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
  • जापान को जहां एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए यह पुरस्कार हासिल हुआ है, वहीं यूरोप एवं अन्य क्षेत्रों के लिए नीदरलैंड को यह पुरस्कार मिला है। भारत रत्न एम विश्वेश्वरैया के नाम पर पुरस्कार वितरण की घोषणा कर्नाटक सरकार की तरफ से की गई।
  • 12 हजार 330 अमेरिकी डॉलर की राशि के साथ एक शॉल और एक प्रमाण पत्र विश्वेश्वरैया पुरस्कार पाने वाले को प्रदान किया जाता है।

कल्पना चावला पुरस्कार

  • कल्पना चावला जो कि भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थीं, उन्हीं के नाम पर हरियाणा सरकार की ओर से कल्पना चावला पुरस्कार की घोषणा की गई है।
  • आईआईटी दिल्ली के भीम सिंह और दुबई बिजली एवं जल प्राधिकरण (संयुक्त अरब अमीरात) के डॉ शेषेष अल्नुआमी को कल्पना चावला पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
  • सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जो वैज्ञानिक और इंजीनियर काम कर रहे हैं, उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।

दिवाकर पुरस्कार

  • इस पुरस्कार की शुरुआत ISA द्वारा ही की गई है। पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी ने दिवाकर पुरस्कार से हरियाणा के अर्पण इंस्टिट्यूट और अरुशी सोसाइटी को सम्मानित किया है। साथ में रेलवे और वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भी पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी से 25 हजार अमेरिकी डॉलर की राशि प्राप्त हुई है।
  • ऐसे संगठन और संस्थान जो अलग-अलग तरह के लोगों के हितों के लिए काम कर रहे हैं और साथ में मेजबान देश में सौर ऊर्जा के अधिकाधिक इस्तेमाल को भी सुनिश्चित कर रहे हैं, उन्हें दिवाकर पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

निष्कर्ष

ISA Solar Awards दुनियाभर में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने से न केवल प्रदूषण का स्तर घटाया जा सकता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से भी आसानी से निपटा जा सकता है।

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