वायरोलॉजिस्ट के तौर पर बनाएं करियर, असीम हैं संभावनाएं

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career as virologist


जब से कोरोना महामारी ने दुनिया में अपने पांव पसारे हैं, तब से Virologist career के बारे में भी युवा सोचने लगे हैं। Career counselling के दौरान भी विशेषज्ञ अब इसके बारे में सलाह दे रहे हैं। कोरोना महामारी से निपटने के लिए भले ही अब दुनिया के कई देशों में टीकाकरण शुरू हो चुका है, लेकिन इसे लेकर आश्वस्त भी नहीं हुआ जा सकता कि जलवायु परिवर्तन की वजह से और मानवीय क्रियाकलापों के कारण भविष्य में इसी तरह की कोई और बीमारी दस्तक तक नहीं देगी। ऐसे में वायरोलॉजिस्ट की भूमिका काफी बढ़ जाती है, क्योंकि वे इसे लेकर रिसर्च करते हैं और इन वायरसों के खिलाफ संघर्ष करके दुनिया को महफूज रखने का काम करते हैं।

इस लेख में आप पढ़ेंगे:-

  • कौन हैं वायरोलॉजिस्ट?
  • वायरोलॉजिस्ट बनने के लिए आवश्यक योग्यता और कौशल
  • वायरोलॉजी पढ़ने के लिए प्रमुख शैक्षणिक संस्थान

क्या है वायरोलॉजी?

सबसे पहले यह समझते हैं कि वायरोलॉजी आखिर होता क्या है। इसे आप विज्ञान या फिर जीव विज्ञान की एक ऐसी शाखा कह सकते हैं, जो अलग-अलग वायरसों के बारे में विस्तार से अध्ययन करता है।

  • इबोला, जीका और सार्स जैसे कई वायरसों के बारे में दुनिया जान चुकी है। इस वक्त दुनिया नोवल कोरोना वायरस की गिरफ्त में है। इन सभी वायरसों की संरचना कैसी है, इनकी जेनेटिक्स कैसी है, इनके बीमारी फैलाने वाले लक्षण क्या हैं, इन सभी का विस्तार से अध्ययन वायरोलॉजी में किया जाता है।
  • माइक्रोबायोलॉजी से यह सीधे तौर पर संबंधित है। इंसानों के साथ बाकी सजीवों पर वायरस के क्या घातक प्रभाव पड़ते हैं, इन सभी का विश्लेषण वायरोलॉजी में किया जाता है।
  • वायरोलॉजी का महत्व वर्तमान परिदृश्य में इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि अब वायरस के नए-नए रूप सामने आ रहे हैं। ये वायरस इतने घातक साबित हो रहे हैं कि इनकी वजह से बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान हो रहा है। ऐसे में वायरोलॉजी का क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि इससे जुड़े शोधकर्ता इन वायरसों के प्रभाव का इलाज ढूंढने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

कौन हैं वायरोलॉजिस्ट?

  • वायरोलॉजिस्ट वे होते हैं, जो इस चीज का अध्ययन करते हैं कि वायरसों का इंसानों के साथ पक्षियों, जानवरों, पेड़-पौधों, कीट-पतंगों, बैक्टीरिया, फंगी और सरीसृप वर्ग पर किस तरह का घातक प्रभाव पड़ता है।
  • वायरोलॉजिस्ट न केवल रिसर्च लैबोरेट्री में काम करते हैं, बल्कि बे अध्यापन का भी काम करते हैं।
  • नई दवाइयों के निर्माण में भी ये मदद करते हैं। साथ ही शोध करके ये वायरस के बारे में पता लगाते रहते हैं।
  • माइक्रोबायोलॉजी या फिर वायरोलॉजी लेबोरेटरी में ये वक्त देते हैं और यह पता करते हैं कि वायरसों का स्वरूप किस तरीके से बदल रहा है। साथ ही इंसानों और जानवरों में वायरसों का संक्रमण किस तरह से फैलता है, वे इसके बारे में भी पता करके जानकारी देते हैं।
  • मेडिकल कर्मचारियों के साथ मिलकर ये काम करते हैं। डॉक्टरों को भी ये फोन पर या फिर मीटिंग आदि में सलाह देते हैं। इसके अलावा ये वार्ड का भी विजिट करते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय तौर पर ये एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करते हैं। उदाहरण के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं को ये अपनी जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे कि दुनिया भर में इसका इस्तेमाल शोध कार्यों में और वायरसों के घातक प्रभाव से लड़ने में किया जा सके।

वायरोलॉजिस्ट बनने के लिए आवश्यक योग्यता और कौशल

यदि आप अपना career as virologist बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए आप में निम्नलिखित योग्यता और कौशल होने चाहिए:-

  • वायरोलॉजिस्ट बनने के लिए सबसे पहली योग्यता यह है कि किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक बोर्ड से विज्ञान (बायोलॉजी सहित) में आप अच्छे नंबरों के साथ 12वीं उत्तीर्ण होने चाहिए।
  • वायरोलॉजी, वायरल ऑंकोलॉजी, मॉलिक्यूलर वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कर लेने के बाद भी इस क्षेत्र में नौकरी करने के अच्छे अवसर उपलब्ध होते हैं। हालांकि, यदि आप वायरोलॉजी में पीएचडी या एमडी की डिग्री हासिल कर लेते हैं, तो ऊंचे पदों पर आपको इस क्षेत्र में नौकरी मिल सकती है।
  • वायरोलॉजिस्ट बनने के लिए आपका दिमाग विश्लेषण करने में पूरी तरह से सक्षम होना चाहिए। साथ ही आपके दिमाग में किसी भी चीज को जांचने की इच्छा हमेशा होनी चाहिए। परिस्थितियां कितनी भी विषम क्यों ना हो जाएं या फिर दबाव कितना भी क्यों न हावी हो जाए, इस दौरान आप में शांत रहने की प्रवृत्ति होनी चाहिए।
  • Virologist career को अपनाने के लिए आपके पास अच्छी कम्युनिकेशन स्किल भी होनी बहुत ही जरूरी होती है, क्योंकि एक वायरोलॉजिस्ट के रूप में आपको हॉस्पिटल और पब्लिक हेल्थ के साथ कई अन्य क्षेत्रों में भी अपने ज्ञान को शेयर करना पड़ता है।
  • वायरोलॉजिस्ट बनने के लिए आपको सेल कल्चर के साथ पीसीआर में काम करने का अनुभव होना चाहिए। साथ ही लेबोरेटरी में मौजूद उपकरणों और अन्य टूल्स के भी इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए।
  • वायरोलॉजी को करियर के रूप में अपनाने के लिए आपको आईटी और सॉफ्टवेयर की भी कुछ हद तक जानकारी होनी बहुत ही जरूरी होती है। बहुत से काम इस क्षेत्र में आपको कंप्यूटर पर ही अंजाम देने होते हैं। इसलिए इसकी जानकारी बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है।

वायरोलॉजी पढ़ने के लिए प्रमुख शैक्षणिक संस्थान

वायरोलॉजी की पढ़ाई करने के लिए अपने देश में कई कॉलेज और विश्वविद्यालय मौजूद है, जिनकी जानकारी निम्नवत है:-

  • श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, तिरुपति
  • मणिपाल विश्वविद्यालय, कर्नाटक
  • राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान, पुणे
  • कर्पगम एकेडमी, कोयंबटूर
  • आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी, नोएडा
  • सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र

वायरोलॉजी की पढ़ाई दुनिया के कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी होती है, जिनकी जानकारी निम्नवत है:-

  • ग्लासगो विश्वविद्यालय
  • इंपीरियल कॉलेज, लंदन
  • कैंब्रिज विश्वविद्यालय
  • मैनचेस्टर विश्वविद्यालय
  • एडिनबर्ग विश्वविद्यालय
  • वारविक विश्वविद्यालय
  • नॉटिंघम विश्वविद्यालय
  • मैकगिल विश्वविद्यालय
  • अल्बर्टा विश्वविद्यालय
  • ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय
  • मेलबर्न विश्वविद्यालय
  • क्वींसलैंड विश्वविद्यालय
  • फ्रीबर्ग विश्वविद्यालय
  • क्यूबेक विश्वविद्यालय
  • लीड्स विश्वविद्यालय
  • लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन
  • टोरंटो विश्वविद्यालय

वायरोलॉजिस्ट के लिए संभावनाएं

वायरोलॉजिस्ट के लिए केवल अपने देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में भी संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। खासकर एंटीवायरल ड्रग की खोज करने से जुड़े शोध में इनकी आवश्यकता लगातार बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में जो लोग वायरोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं, उन्हें अपनी इस सोच को अंजाम तक जरूर पहुंचाना चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र में एक सुनहरा करियर बनाने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।

वायरोलॉजिस्ट को मिलने वाली सैलरी

जो लोग वायरोलॉजिस्ट बनकर काम करते हैं, उन्हें हमारे देश में सैलरी भी अच्छी मिलती है। जब वे काम करना शुरू करते हैं, तो शुरुआत में ही उन्हें लगभग 4 से 5 लाख रुपये सालाना मिल जाते हैं। वहीं, सीनियर लेवल पर पहुंचने के बाद हर साल वायरोलॉजिस्ट को 8 से 9 लाख रुपये मिल जाते हैं। अपने देश में वायरोलॉजिस्ट औसतन 7 से 8 लाख रुपये सालाना कमा लेते हैं।

चलते-चलते

दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के दस्तक देने के बाद career as virologist की मांग पहले से काफी बढ़ने वाली है। कोरोनावायरस ने जिस तरीके से दुनिया भर में लोगों को परेशान किया है और जिस तरह से इससे बड़े पैमाने पर लोगों की जान गई है, इसकी वजह से आज वायरोलॉजिस्ट के सामने बहुत बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। करियर के रूप में यदि वायरोलॉजी को अपनाया जाए, तो इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की भरपूर संभावना इसलिए है, क्योंकि नए-नए वायरसों के आगमन और उनके पड़ने वाले घातक प्रभावों की पहचान करने के लिए वायरोलॉजिस्ट की मांग में भी इजाफा होने वाला है।

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