Rafale Aircraft ने यूं बढ़ा दी है भारतीय सेना की ताकत

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भारतीय वायुसेना कितनी ताकतवर है, यह किसी से छुपा नहीं है। चाहे कारगिल युद्ध हो या फिर उरी और पुलवामा में शहीद हुए हमारे जवानों की शहादत का बदला लेने की बात हो, हर मिशन को, हर लक्ष्य को दुनिया की इस चौथी सबसे शक्तिशाली वायुसेना ने पूरी बहादुरी और सटीकता से अंजाम दिया है। भारतीय वायुसेना की ताकत को तकनीकी रूप से और बढ़ाने के लिए फ्रांस की डेसॉल्ट एविएशन कंपनी के साथ भारत सरकार ने वर्ष 2012 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की डील की थी, जिसका पहला Dassault Rafale विमान तमाम बाधाओं के बाद आखिरकार बीते 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर India को मिल चुका है। आखिर क्या है ये राफेल विमान? क्यों पड़ी है India को Rafale की जरूरत? कितने यत्नों से India ने की है Rafale deal और India को कैसे मिल पाया पाया है Rafale aircraft? इन सभी सवालों का जवाब आपको उपलब्ध करा रहे हैं।

Dassault Rafale की तकनीकी खासियत

  • हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने में राफेल सक्षम है। यही नहीं, यह परमाणु हमला भी कर सकता है और यदि India को जरूरत पड़ी तो Rafale Jet हवा से हवा में ही बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए मिसाइल भी दाग सकता है।
  • Rafale fighter प्लेन, जो इंडिया को मिल रहा है, इसमें द्रव ऑक्सीजन भरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम से युक्त है।
  • इंडिया को Dassault Rafale से यह लाभ मिलेगा कि दुश्मनों पर हमले के दौरान यह रियल टाइम में अपने इलेक्ट्रॅनिक स्कैनिंग रडार से थ्रीडी मैपिंग करके दुश्मनों की पोजीश का भी आसानी से पता लेगा।
  • Rafale मौसम के मुताबिक लंबी दूरी में खतरों को भी पहचान लेता है और कई लक्ष्यों पर इसकी एक साथ नजर रहती है।
  • Indian Rafale की एक विशेष तकनीकी खासियत ये भी है कि केवल जमीनी सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि विमानवाहक पोतों से भी राफेल उड़ान भर पाने में सक्षम है।
  • – लगभग 740 करोड़ रुपये की price वाला Dassault Rafale 5 लाख 50 हजार फीट की ऊंचाई से भी पूरी सटीकता से दुश्मनों के ठिकानों पर बम बरसा सकता है।
  • भारत फ्रांस और मिश्र के बाद राफेल लड़ाकू विमान की ताकत रखने वाला तीसरा देश बन गया है।

Rafale aircraft की महत्वपूर्ण विशेषताएं

  • फ्रांस की Dassault एविएशन कंपनी की ओर से इस मल्टीरोल फाइटर विमान का निर्माण किया जाता है और वर्ष 1986 से 2018 तक Rafale की 160 यूनिट बनकर तैयार हो चुकी है। A, B, C और M श्रेण्यिों में राफेल सिंगल व डबल सीट में उपलब्ध है। साथ ही डबल इंजन में भी इसकी उपलब्धता है।
  • Rafale 36 हजार से 50 हजार फीट तक उड़ान तो भर ही सकता है, साथ ही मात्र एक मिनट में 50 हजार फीट की ऊंचाई तक भी पहुंच जाता है।
  • इसकी क्षमता 3700 किलोमीटर तक के इलाके को कवर करने की है।
  • Rafale aircraft 1920 किमी प्रति घंटे की गति से उड़ान भरता है।
  • राफेल 1312 फीट के बेहद छोटे रनवे से भी आसानी से उड़ान भर लेता है।
  • अपने साथ Rafale 15 हजार 590 गैलन ईंधन ले जाने में भी सक्षम है।
  • Rafale की खासियत है कि यह वैसी मिसाइलों को अपने साथ ले जा सकता है, जो हवा से हवा में ही प्रहार करती हैं।
  • यही नहीं राफेल लड़ाकू विमान 2,000 समुद्री मील तक की उड़ान एक ही बार में भर सकता है।
  • अमेरिका के F-16 लड़ाकू विमान से इसकी तुलना करें तो इसकी ऊंचाई उससे 0.82 फीट अधिक है। यही नहीं F-16 की तुलना में राफेल की लंबाई भी 0.79 फीट अधिक है।

अन्य विशेषताएं

  • Rafale की चैड़ाई 35.4 फीट की है।
  • पंखों साथ इसकी कुल चैड़ाई की बात करें तो यह 492 वर्गफीट है।
  • लंबाई राफेल की 15.30 मीटर, जबकि ऊंचाई 5.30 मीटर है।
  • राफेल के wings की लंबाई 10.90 मीटर है।
  • इसकी अधिकतम भार उठाकर ले जाने की क्षमता 24 हजार 500 किग्रा है।
  • जरूरत के हिसाब से Indian Rafale में जरूरी बदलाव भी किये गये हैं।

कैसे आया राफेल?

  • भारतीय वायुसेना की मांग के बाद वर्ष 2007 में इसकी खरीद की वास्तविक प्रक्रिया शुरू हुई, जब तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता वाली अधिग्रहण परिषद ने 126 Rafale aircrafts को खरीदने की मंजूरी अगस्त, 2007 में दे दी। बाद में कुछ कारणवश यह सौदा रुक गया और फिर इसके कुछ वर्षों के बाद खरीदे जाने वाले विमानों की संख्या घटाकर 36 कर दी गई।
  • वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेरिस यात्रा के दौरान 36 राफेल विमान खरीदने का निर्णय लिया गया। केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में सौदे पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांकोइस होलैंड के भारत दौरे के दौरान 7.8 अरब डॉलर के राफेल विमानों की खरीद के सौदे पर हस्ताक्षर हुए।

क्यों पड़ी Rafale की जरूरत?

  • भारत को Rafale की जरूरत इसलिए पड़ी कि आज के समय में दुनिया के अधिकतर देशों के पास बेहद उन्नत किस्म के लड़ाकू विमान मौजूद हैं। बाकी को तो छोड़िए, पड़ोसी पाकिस्तान भी चीन से अत्याधुनिक पीढ़ी के JF-17 और अमेरिका से F-16 जैसे लड़ाकू विमानों की खरीद कर चुका है।
  • भारत के लिए यह चिंता का विषय है कि अंतिम बार इसने 23 साल पहले वर्ष 1996 में कोई लड़ाकू खरीदा था, जिसका नाम सुखोई-30 था। बाकी देशों की बढ़ती सैन्य क्षमता को देखते हुए भारत के लिए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद बहुत ही जरूरी थी।
  • आंकड़ों से यह साबित होता है कि Rafale deal के तहत India को सभी राफेल मिल जाने के बाद भारत को दक्षिण एशिया में शक्ति का संतुलन बनाये रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते बर्चस्व को देखते हुए शक्ति संतुलन स्थापित करने के लिए भारतीय वायुसेना का आधुनिक तकनीकों से युक्त राफेल जैसे लड़ाकू विमान से लैस होना बहुत ही जरूरी है। तभी तो Rafale वक्त की मांग है।

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