कुछ ऐसे देश का पहला single-use-plastic free airport बना इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

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सिंगल-यूज-प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इससे निजात पाने के लिए बृहद स्तर पर अभियान चलाये जा रहे हैं। Single-use-plastic के इस्तेमाल को reduce करने के लिए जो अभियान चलाये जा रहे हैं, उन्हें हाल ही में उस वक्त एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी, जब भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित Delhi International Airport Limited (DIAL) के सिंगल-यूज-प्लास्टिक से पूरी तरह से मुक्त होने की घोषणा की गई। Plastic use को reduce करने के जो प्रयास बीते काफी समय से इंदिरा गांधी हवाई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किये जा रहे थे, यह उपलब्धि उसी का नतीजा है।

हासिल हुआ प्रमाणपत्र

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करते हुए दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड के सिंगल-यूज-प्लास्टिक के इस्तेमाल से पूरी तरह से मुक्त होने का प्रमाण-पत्र हाल ही में एक कार्यक्रम में DIAL को प्रदान किया गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त सचिव अरविंद के नौटियाल के साथ भारतीय उद्योग परिसंघ यानी कि CII की डीडीजी सीमा अरोड़ा की ओर से डीआईएएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विदेह कुमार जयपुरियार को सिंगल-यूज-प्लास्टिक से एयरपोर्ट के पूरी तरह से मुक्त होेने का प्रमाण-पत्र सौंपा गया।

महत्व

भारत सरकार ने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2022 तक भारत को हर हाल में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से आजाद करा लेना है। इसका मतलब यह हुआ कि इस वर्ष तक देश में कोई भी सिंगल-यूज-प्लास्टिक का इस्तेमाल करता हुआ नजर नहीं आएगा। मुख्य रूप से छः प्रकार के Single-use-plastic के इस्तेमाल को reduce करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें प्लास्टिक की बोतलें, बैग, प्लास्टिक के कप, प्लास्टिक के प्लेट, पाउच और पुआल शामिल हैं। स्वच्छ भारत मिशन में देश को प्लास्टिक से मुक्त बनाना भी इसके सबसे प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है। एयरपोर्ट पर भी इनका इस्तेमाल बड़ी मात्रा में होता है। ऐसे में Delhi International Airport Limited (DIAL) के सिंगल-यूज-प्लास्टिक से पूरी तरह से मुक्त होना बड़े महत्व का है और बाकी एयरपोर्ट को भी यह ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

क्यों पड़ी जरूरत?

लगभग 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा रोजाना देशभर में पैदा होता है। इस कचरे का अधिकांश हिस्सा या तो लैंडफिल में भरा गया है या फिर यह सड़कों और पानी के स्रोतों में मिलता है। इसके कारण जमीन से लेकर पीने योग्य पानी तक प्रदूषित हो रहा है, जिसके कारण स्वास्थ्य को लेकर गंभीर परेशानियां लगातार सामने आ रही हैं। जितना प्लास्टिक देशभर में हर दिन निकलता है, उसमें लगभग 40 फीसदी हिस्सा सिंगल-यूज-प्लास्टिक का ही होता है। इसलिए plastic use को reduce किया जाना बहुत ही जरूरी है। अन्यथा इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

कैसे चला अभियान?

प्लास्टिक के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए DIAL की ओर से ऐसे विकल्पों को प्रयोग में लाया गया है, जो पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हों। कुछ ऐसे प्लास्टिक के उत्पाद हैं, जिनके एयरपोर्ट पर इस्तेमाल की छूट DIAL की ओर से दी गयी है। इन उत्पादों में सिक्योरिटी टेम्पर-एक्सीडेंट बैग्स, सीलबंद पीईटी बोतलें, कंपोस्टेबल प्लास्टिक बैग्स और निर्माताओं की ओर से पहले से पैक की सामग्री शामिल हैं। DIAL पर इस तरह का कदम उठाने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि हर वर्ष यहां से 68.5 मिलियन यात्री यात्रा करते हैं और वार्षिक यातायात के मामले में यह देश का अग्रणी हवाई अड्डा बना हुआ है।

दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सिंगल-यूज-प्लास्टिक से मुक्त कराने के अभियान की शुरुआत वर्ष 2019 में ही विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तब हो गयी थी जब प्लास्टिक प्रदूषण को हराने का संकल्प लिया गया था और आईजीआई एयरपोर्ट परिसर को सिंगल-यूज-प्लास्टिक मुक्त बनाने के अभियान को हरी झंडी दिखाई गई थी।

ऐसे मिली कामयाबी?

सुपामैन नाम से यहां एक अभियान चलाया गया। सुपा का मतलब है सिंगल-यूज-प्लास्टिक से मुक्त हवाई अड्डा। इस अभियान के दौरान प्लास्टिक की थैलियों के साथ व पीने की पाइप के साथ 45 अलग-अलग तरह के प्लास्टिक उत्पादों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया। पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों का इस्तेमाल इस हवाई अड्डे पर किया गया। यात्रियों के विमान चालक दल के सदस्यों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें सिंगल-यूज़-प्लास्टिक के खतरों के प्रति चेताया गया।

सामान रखने के लिए जो प्लास्टिक थैलियां दुकान में दी जा रही थीं, खाने की पैकिंग में इस्तेमाल में आ रहे प्लास्टिक, बोतल और कंटेनर आदि के साथ प्लास्टिक के अन्य सामान धीरे-धीरे मिलने पूरी तरह से यहां बंद ही हो गए। खाद्य उत्पादों एवं पेय पदार्थों की पैकिंग के लिए स्मार्ट व अनुकूल पैकेजिंग को इस्तेमाल में लाया जाने लगा, जिसमें कागज या फिर पर्यावरण के अनुकूल मानी जाने वाली थैलियां शामिल थीं।

निष्कर्ष

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा single-use-plastic के खिलाफ अभियान चलाकर इससे मुक्त होने वाला देश का पहला एयरपोर्ट यदि बना है तो देश के बाकी एयरपोर्ट्स को भी इससे सीख लेनी चाहिए।

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