United Kingdom’s Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 क्या है और क्यों हो रहा है इसका विरोध?

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United Kingdom's Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021

इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर United Kingdom’s Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 खूब सुर्खियां बटोर रहा है। इसकी वजह यह है कि यूके में संसद की ओर से एक नया कानून बनाया गया है‚ जिसका बृहद पैमाने पर देश में विरोध हो रहा है। इसकी वजह से ब्रिस्टल में हुए हिंसक झड़पों की गवाह यह दुनिया समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिये बनी है। ऐसे में आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर यह बिल है क्या और इसके विरोध के पीछे कौन–सी वजहें हैं।

इसे लेख में आप जानेंगेः

  • जानिए Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 के बारे में
  • पुलिस के पास मौजूद हैं फिलहाल ये शक्तियां
  • पुलिस की ताकत में Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 से यूं आयेगा बदलाव
  • United Kingdom’s Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 के प्रमुख प्रस्ताव
  • मानवाधिकार बनाम नया विधेयक

जानिए Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 के बारे में

दरअसल यूनाइटेड किंगडम में हुआ यह है कि यहां पुलिस, अपराध, सजा और न्यायालय विधेयक 2021 को लाया गया है‚ जो कानून का ही एक ऐसा भाग है‚ जिसमें इंग्लैंड और वेल्स में अपराध एवं न्याय को लेकर कई तरह के प्रमुख सरकारी प्रस्ताव शामिल किये गये हैं। इसका एक हिस्सा ऐसे में‚ जिसमें विरोध–प्रदर्शन को लेकर बदलावों की भी बात की गई है। यही कारण है कि देश में इसके खिलाफ काफी संख्या में लोग आवाज बुलंद करने लगे हैं और विरोध–प्रदर्शन का सिलसिला अब भी जारी है।

पुलिस के पास मौजूद हैं फिलहाल ये शक्तियां

  • United Kingdom’s Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 के बारे में बीबीसी की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि वर्तमान में पुलिस यदि विरोध–प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाना चाह रही है‚ तो इसके लिए यह जरूरी है कि पुलिस यह दिखाए कि विरोध–प्रदर्शन की वजह से सार्वजनिक तौर पर अव्यवस्था किस तरह से फैल सकती है। इसकी वजह से सार्वजनिक या फिर निजी संपत्ति को किस तरह से नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही पुलिस को यह भी साफ करना होगा कि इसकी वजह से किसी समुदाय के जीवन के लिए भी किस प्रकार से गंभीर अवरोध पैदा हो सकता है।
  • जब विरोध–प्रदर्शन वाले जुलूस निकल रहे होंगे‚ तो पुलिस इसके मार्ग पर वह कई तरह के कदम उठाकर कई व्यवस्थाएं इसे रोकने या इसे नियंत्रित करने के लिए कर सकती है।
  • जब भी इस तरह का कोई प्रमुख आयोजन होता है‚ तो ऐसे में इस तरह के विवरण आमतौर पर आयोजकों से कई सप्ताह पहले ही प्राप्त किये जाते हैं।

पुलिस की ताकत में Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 से यूं आयेगा बदलाव

नये बिल के अस्तित्व में आ जाने से पुलिस प्रमुख के पास विरोध–प्रदर्शन पर कई तरह की पाबंदी लगाने का अधिकार आ जायेगा। पुलिस चाहे तो इसके बाद किसी भी विरोध–प्रदर्शन के लिए न केवल शुरुआत की‚ बल्कि इसके समाप्त होने की भी एक समय सीमा तय कर सकती है। कहने का तात्पर्य है कि इसका प्रस्ताव आयोजकों को पहले ही दे देना होगा। इतन ही नहीं‚ पुलिस की ओर से शोर–शराबे पर नियंत्रण करने के लिए इसकी अधिकतम सीमा भी निर्धारित की जा सकती है। यहां तक कि यदि एक व्यक्ति विरोध–प्रदर्शन करता है‚ तो उस पर भी ये सभी नियम लागू किये जाने का प्रस्ताव है।

अब इसे इस तरह से समझते हैं कि कोई व्यक्ति विरोध–प्रदर्शन करने के लिए निकला है। उसके हाथ में प्लेकार्ड है। वह अपने विचारों को बोलकर भी व्यक्त कर रहा है। उसे पुलिस के नियमों और शर्तों को इस दौरान पूरी तरह से मानना होगा। यदि वह व्यक्ति ऐसा नहीं करता है या फिर इसे मानने से इनकार कर देता है‚ तो फिर उस पर £ 2,500 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अब यह भी हो गया है कि किसी अधिकारी की तरफ से किसी तरह का दिशा–निर्देश मिला हो या नहीं मिला हो‚ सभी नागरिकों से नये विधेयक में यह उम्मीद की गई है कि विरोध–प्रदर्शन करने से संबंधित नये दिशा–निर्देशों की उन्हें पूरी जानकारी है और यदि वे बंदिशों का पालन नहीं करते हैं‚ तो ऐसे में इसे अपराध की श्रेणी में रखा जायेगा।

वर्तमान व्यवस्था की बात करें तो पुलिस को यह साबित करने की जरूरत होती है कि कानून तोड़ने से पहले उनकी ओर से प्रदर्शनकारियों को यह जानकारी थी कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए कहा गया था। नये प्रस्तावित कानून में जानबूझ कर या सार्वजनिक तरीके से उप्रदव के जरिये फैलाने वाले अपराध को भी शामिल कर लिया गया है। नये कानून को डिजाइन ही इस तरह से किया गया है कि लोग सार्वजनिक जगहों को नहीं हथिया सकें। साथ ही जो वे पुलों को बंद कर देते हैं‚ खिड़कियों से चिपक जाते हैं और साथ ही कई अन्य तरीके भी विरोध–प्रदर्शन के लिए निकालते हैं‚ इन सभी को रोकने का प्रस्ताव इसमें लाया गया है।

Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 में एक अंतिम व्यवस्था यह भी की गई है कि यदि किसी स्मारक को किसी के द्वारा भी नुकसान पहुंचाया जाता है‚ तो ऐसे में उसे 10 साल के कैद की सजा होगी। दरअसल ब्रिस्टल में एक गुलाम व्यापारी एडवर्ड कॉलस्टन की एक मूर्ति को नुकसान पहुंचाने वाली इसकी पृष्ठभूमि में शामिल है।

United Kingdom’s Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 के प्रमुख प्रस्ताव

  • सजा के नियमों में बदलाव लाना‚ ताकि गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों को जेल में ज्यादा समय तक रखा जा सके।
  • न्यायाधीशों को यह अधिकार होगा कि वे चाहें तो बच्चों के हत्यारों को ताउम्र जेल में बंद रखने की सजा सुना सकते हैं।
  • आपातकालीन सेवाओं में लगे श्रमिकों के खिलाफ निचले स्तर वाले शोषण या अपमान वाले अपराधों में सजा की अवधि को दोगुनी करके दो साल का करना।
  • आतंकवाद के मामले में जेल से रिहा हुए अपराधियों की और गंभीरता से निगरानी करना।

विधेयक के समर्थन में हैं ये लोग

विरोध–प्रदर्शन को लेकर आये इस विधेयक के प्रस्तावों पर मंत्रियों और पुलिस ने मिलकर काम किया है। साल 2019 में विलुप्त होने के विद्रोह प्रदर्शनों (Extinction Rebellion demonstrations) के प्रभाव को कम करने में नाकाम रहने की वजह से जो मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नर डेम क्रेसिडा डिक के साथ पुलिस के अन्य प्रमुख निराश थे‚ वे भी इसके समर्थन में हैं। लंदन में और भी बहुत सी सड़कों के साथ पुलों तक पुलिस के कब्जे को इसमें फैला दिया गया है।

मानवाधिकार बनाम नया विधेयक

मानवाधिकार अधिनियम में विरोध करने और खुद को अभिव्यक्त करने का अधिकार नागरिकों को मिला हुआ है। ऐसे में पुलिस प्रमुखों को यह दिखाना होगा कि इसका उन्होंने पूरा ख्याल रखा है। हालांकि ये अधिकार पूर्ण नहीं हैं‚ क्योंकि पुलिस को यदि यह प्रतीत होता है कि विरोध–प्रदर्शन को लोगों की सुरक्षा के लिए या फिर अपराध को रोकने के लिए जरूरी है‚ तो वह तुरंत इस पर कई तरह की बंदिशें लगा सकती है। वैसे गृह मंत्रालय की वजह से यह स्पष्ट किया गया है कि उनके प्रस्ताव मानवाधिकारों का पूरा ध्यान और सम्मान करने वाले हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर यदि यूनाइटेड किंगडम में विरोध–प्रदर्शन के इतिहास पर नजर डालें तो इसे लेकर कई तरह की जटिल और लंबी कानूनी लड़ाई न जाने कब से चलती आ रही है और यह भी विवाद का विषय रहा है कि पुलिस ने क्या अपनी शक्तियों का सही तरीके से इस्तेमाल किया है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण एक ऐसा मामला है‚ जिसमें पुलिस की शक्तियों के बारे में एक बहस तो 11 साल तक चलती रही थी और अंत में यह निष्कर्ष आया था कि पुलिस ने जो किया था‚ वह सही था। ऐसे में जो यहां मुख्य रूप से लेबर पार्टी की तरफ से Police, Crime, Sentencing and Courts Bill, 2021 का विरोध किया जा रहा है‚ उस कुछ वर्गों का भरपूर समर्थन भी मिल रहा है।

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