ओपन डाटा वीक’ क्या है? | What is ‘Open Data Week’?

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Open data week
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17 जनवरी 2022 को  आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने देशभर के शहरी इको –सिस्टम में ओपन डेटा (मुक्त आंकड़ों) को अपनाने तथा नवोन्मेष को प्रोत्साहन देने के लिये ‘Open Data Week’ (मुक्त सूचना-सामग्री सप्ताह) की शुरुवात की है। इस कार्यक्रम को देशभर के 100 स्मार्ट शहरों में आयोजित किया जा रहा है। ‘‘Open Data Week’ कार्यक्रम फ़रवरी 2022 में गुजरात के सूरत में आयोजित होने वाले आजादी का अमृत महोत्सव – स्मार्ट सिटीज़ः स्मार्ट अर्बनाइजेशन’ महोत्सव का हिस्सा है। आइये आज के इस लेख में हम ओपन डाटा वीक क्या है ? और इससे सम्बंधित अन्य बातों की जानकारी प्राप्त करते हैं।

ओपन डाटा वीक (Open Data Week)

  • केंद्र सरकार द्वारा शहरी पारिस्थितिकी तंत्र में खुले डेटा को अपनाने हेतु आजादी का अमृत महोत्सव – स्मार्ट सिटीज़ः स्मार्ट अर्बनाइजेशन’ के तहत 17 जनवरी, 2022 से 21 जनवरी, 2022 तक ओपन डाटा वीक(मुक्त सूचना-सामग्री सप्ताह) का आयोजन किया जा रहा है।
  • मंत्रालय के अनुसार यह एक विचार है जो एक ऐसा मंच प्रदान करता है जिसमे जटिल शहरी मुद्दों, जैसे कि चल रहे Covid ​​​​-19 महामारी को संबोधित करने वाले डेटा के उपयोग और प्रचार को जारी रखने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान किये जा सके।
  • इस ओपन डाटा वीक कार्यक्रम में देश के 100 स्मार्ट शहर भाग ले रहे हैं तथा उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़ों तथा डाटा ब्लॉग  प्रकाशन में भागीदारी कर रहे हैं।
  • ओपन डाटा वीक के आयोजन का उद्देश्य उपलब्ध ओपन डाटा के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, जिससे इन आंकड़ों की प्रभावकारिता, अधिक दक्षता, पारदर्शिता, विश्वसनीयता का उपयोग करके उससे वांछित उपयोगी परिणाम प्राप्त किये जा सके, जिससे ये डाटा आर्थिक विकास और नवाचार में वृद्धि के लिये उपयोगी साबित हो सके।
  • ओपन डाटा वीक, ओपन डाटा के इस्तेमाल से भारतीय शहरों को डाटा स्मार्ट बनाने की दिशा में एक समन्वित प्रयास है, जिससे मौजूदा कोविड-19 महामारी जैसे अनेक जटिल शहरी मुद्दों का समाधान हो सके।
  • इस आयोजन के पहले चरण में 17 जनवरी से 20 जनवरी तक शहरों द्वारा ओपन डेटा पोर्टल पर डेटासेट, विजुअलाइजेशन, एपीआई और डेटा ब्लॉग अपलोड किया जाएगा।
  • इस समय विभिन्न हितधारकों के लिये 3,800 से अधिक डाटासेट और 60 से अधिक डाटा विवरण उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से वे आंकड़ों का विश्लेषण कर सकें तथा उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई करने का रास्ता निकल सकें।

21 जनवरी को मनाया जायेगा पहलाडाटा दिवस

ओपन डाटा वीक के दूसरे चरण में 21 जनवरी को सभी स्मार्ट शहरों में पहला ‘डेटा दिवस’ मनाये जाने की योजना है। इस दिन सभी स्मार्ट शहरों में तय किए गए विभिन्न डेटा ट्रैक पर वार्ता, सेमिनार, हैकथॉन, प्रदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इस वार्ता में समाज के सभी निकायों को आमंत्रित किया जायेगा, जिसमे सरकारी एजेंसियां, निजी क्षेत्र के उद्यम, वैज्ञानिक और अकादमिक संस्थायें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्टार्ट-अप्स, सिविल सोसायटी आदि शामिल होंगे तथा ये अपने सुझाव इस सम्बन्ध में प्रस्तुत करेंगे। डाटा दिवस आयोजित करने का उद्देश्य एक मंच पर इस बात के लिए वार्ता करना है कि कैसे हम आंकड़ों के सृजन को कायम रख सकते है और उनके इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकते हैं।

ओपन डाटा क्या है?

खुला डेटा वह डेटा है जिसे विषय, अधिक से अधिक, विशेषता और साझा करने की आवश्यकता के लिए, किसी के द्वारा स्वतंत्र रूप से उपयोग, पुन: उपयोग और पुनर्वितरित किया जा सकता है। अर्थात  कॉपीराइट, पेटेंट या नियंत्रण के अन्य तंत्रों के प्रतिबंधों के बिना, डेटा हर किसी के लिए स्वतंत्र रूप से उपयोग और पुनर्प्रकाशित करने के लिए उपलब्ध रहता है।

आइये इसे निम्न प्रकार से समझते हैं।

  • उपलब्धता और पहुंच:-सम्पूर्ण डेटा एक सुविधाजनक और परिवर्तनीय रूप में न्यूनतम लागत के साथ उपलब्ध रहता है।
  • पुन: उपयोग और पुनर्वितरण:- यह डेटा पुन: उपयोग और पुनर्वितरण के उपयोग हेतु उपलब्ध रहता है। जिसमें अन्य डेटासेट के साथ इंटरमिक्सिंग भी शामिल है। आशय ये है कि ओपन डाटा का उपयोग हम बार-बार बिना किसी पाबन्दी के कर सकते हैं तथा इस डाटा को हम वितरित और किसी दूसरे डाटा के साथ जोड़कर भी उपयोग में ले सकते हैं।
  • सार्वभौम भागीदारी: ओपन डाटा के इस्तेमाल पर सबका बराबर का हक़ रहता है, कोई भी सरकारी, गैर सरकारी संस्था या व्यक्ति इसका उपयोग अपने व्यावसायिक और निजी हितों के लिये कर सकता है। ओपन डाटा के उपयोग पर किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

ओपन डाटा कहाँ से प्राप्त किया जा सकता है?

दोस्तों जब हम एक खुले और सबके लिये उपयोग वाले डाटा या जानकारी या सूचना-संग्रह की बात करते हैं, तो एक प्रश्न मन में उठना लाजमी है, कि ऐसा डाटा हम कहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। तो इसका उत्तर है, ऐसा डाटा हमारे आसपास हमारे सामाजिक सिस्टम में ही उपलब्ध है, ऐसा डाटा  कृषि, शिक्षा , स्वास्थ्य, पर्यावरण, सार्वजनिक बजट और वाणिज्य, जल प्रबंध, ऊर्जा आधारित इंडस्ट्रीज, सामाजिक दूर संचार जैसे अनेक क्षेत्रों से प्राप्त किया जा सकता है।

ओपन डाटा कैसे उपयोगी हो सकता है?

  • पर्यावरणीय गतिविधियों – ओपन डाटा के माध्यम से उपलब्ध पर्यावरण से सम्बंधित डाटा के इस्तेमाल से हम पानी संरक्षण, पानी बचाओ, पर्यावरण के बदलाव, बारिश से सम्बंधित जानकारी, मिट्टी, कृषि सम्बन्धी जानकारी का एक अच्छा अध्ययन करके उसके आधार पर आंकलन और पूर्वानुमान कर सकते हैं तथा इस डेटा को समाज के लिये उपयोग कर सकते हैं।
  • शिक्षा – सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य ये दोनों हर किसी व्यक्ति के लिये सुलभ होने चाहिए। ओपन डाटा से उपलब्ध जानकारी से सामूहिक शिक्षा के विकास में क्रांति आ सकती है, हम अपनी वार्षिक शिक्षा विकास की तुलना कर सकते हैं। हम ऐसे आंकड़े जुटा सकते है जो समाज में वर्तमान शिक्षा की प्रासंगिकता के प्रभाव का आंकलन कर सके। वर्तमान की जरूरतों के अनुसार शिक्षा में आवश्यक और अपेक्षित परिवर्तन और उसके प्रभावों की खुले मंच में चर्चा की जा सकती है।
  • स्वास्थ्य सम्बन्धी उपयोग वर्तमान में व्याप्त कोरोना संकट के बाद एक सार्वजनिक स्वास्थ्य डाटा की महत्वता बहुत बढ़ गयी है। हम अभी तक ICMR के डाटा के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सम्बन्धी आंकड़ों का अध्ययन करते हैं। एक ओपन डाटा उपलब्ध होने से इस रिपोर्ट्स का उपयोग कोई भी वांछित व्यक्ति अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिये कर सकेगा, जिससे समाज में नये नये स्वास्थ्य विश्लेषण उपलब्ध रहेंगे , जिससे सामाजिक स्वास्थ्य सम्बन्धी अभियानों को गति मिलेगी।
  • सामुदायिक बजट और खर्च का आंकलन ओपन डाटा के आधार पर हम प्रतिवर्ष अपने क्षेत्र के विकास में सरकार द्वारा खर्च किया गया बजट और उसके उपयोग का आंकलन कर सकते है। इसकी सहायता से हम सामाजिक कार्यों हेतु बजट का निर्धारण, आंकलन और योजना बनाने में सक्षम हो सकेंगे।
  • सामाजिक सुरक्षा समाजिक सुरक्षा से जुड़े डाटा की सहायता से हम अपने शहर या स्थान की सुरक्षा जरूरतों का आंकलन कर सकेंगे। सरकार इस डाटा का उपयोग अपने सुरक्षा कार्यक्रमों के लिये एक आधार जानकारी के रूप में कर सकती है।

इसी प्रकार से अनेक सामाजिक क्षेत्रों में ओपन डाटा का सफल इस्तेमाल किया जा सकता है। जब नए उत्पादों या सेवाओं के लिए ओपन डेटा का उपयोग किया जाता है, तो यह डेटा की मांग को बढ़ा सकता है -और अधिक डेटासेट जारी करने और डेटा गुणवत्ता में सुधार कर सकता है।

सारसंक्षेप

ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि, ओपन डाटा का विचार दुनिया में बिलकुल नया है, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कोस्टारिका जैसे अनेक देश ओपन डाटा के इस्तेमाल से समाज की भलाई का काम कर रहे हैं। यह पहला अवसर है जब इस विचार को भारत में लाया जा रहा है और स्मार्ट सिटी के नीति निर्माण में इसकी उपयोगिता को महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। भारत में मौजूद सरकारी , गैर सरकारी निकायों में ओपन डाटा का बहुत ही कुशलता से उपयोग की  क्षमता है, जिसके परिणाम हमें आने वाले समय में देखने को मिलेंगे। इसी उम्मीद के साथ कि हम सरकार की इस पहल का सदुपयोग करके अपने समाज को एक नयी दिशा दे पायेंगे। हम आज का अपना यह लेख यहीं समाप्त करते हैं। धन्यवाद।

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