रानी पद्मावती की कहानी

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भारत के इतिहास में राजपूतानी इतिहास का सदा से एक विशेष स्थान रहा है। राजस्थान के कण-कण में वीरों की गाथाओं का इतिहास बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर है। इनमें से कुछ गाथाओं को इतिहास के पृष्ठों में स्थान मिल गया तो कुछ केवल किवदंती ही बन कर रह गए। कहीं-कहीं कुछ घटनाओं के अप्रत्यक्ष प्रमाण हैं जिसके कारण यह घटनाएँ और उनसे संबन्धित चरित्र ऐतिहासिक होते हुए भी काल्पनिक मान लिए जाते हैं। ऐसा ही एक पात्र हैं रानी पद्मावती जो चितौर की महारानी थीं और रानी पद्मिनी के नाम से भी जानी जाती हैं।

पद्मावती कौन थीं:

इतिहास के झरोखों में देखने से पद्मावती या पद्मिनी के जन्मस्थली का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता है। कुछ कथाओं के अनुसार वो श्रीलंका के सिंहल देश की राजकुमारी थीं तो वहीं कुछ विधवान के अनुसार वह मध्यप्रदेश के सींगोली ग्राम की कन्या थीं। यह ग्राम कोटा, राजस्थान के निकट स्थित है। अगर वास्तविकता की कसौटी पर दोनों स्थानों की दूरी देखि जाये तो चित्तौड़ से सिंहल जाने में आठ दिन और सींगोली गांव में एक या दो दिन का वक्त लगता होगा। राजा रत्न सिंह केवल एक स्वयंवर के लिए आठ दिन का सफर तय करके गए होंगे, यह अधिक तर्कसंगत नहीं लगता है।

रानी पद्मिनी के माता-पिता का नाम क्रमशः चंपावती और गंधर्वसेन था। वो अपने समय की अनिध्य सुंदरी थीं जिनका विवाह एक स्वयंवर के द्वारा चित्तौड़ के राजा रत्नसिंह के साथ हुआ था।

रानी पद्मावती:

रानी पद्मावती अद्वितीय सुंदरी और पतिव्रता साहसी रानी थीं। उनके अंदर बुद्धिमत्ता भी बेजोड़ थी। जब उनके दरबार के एक तांत्रिक को राजा ने राजद्रोह के अपराध में राज्य से बाहर निकाल दिया तो वह अपने अपमान का बदला लेने के लिए उस समय राजपूतों का सबसे बड़ा विरोधी अलाउद्दीन खिलजी के पास चला गया। खिलजी को रतन सिंह पर आक्रमण करने के लिए उसने रानी पद्मावती की सुंदरता का बखान किया और उसे अपने हरम में शामिल करने के लिए उकसा दिया। पद्मावती को पाने के लिए खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण करने का फैसला लिया पर जब वो इसमें असफल रहा तो उसने राजा रतन सिंह को समझौते का न्योता दिया। रतन सिंह ने न्योता स्वीकार लिया और इसी का फ़ायदा उठा के खिलजी रतन सिंह को कैद कर दिल्ली ले गया। यह सब सुनकर रतन सिंह की सेना के दो सामंत गोरा और बदल ने उन्हें वापस लेन का फैसला किया। गोरा और बदल ने अल्लुद्दीन को पद्मावती का झांसा देके उसके राज्य में अपने कुछ साथियों के साथ प्रवेश किया और राजा रतन सिंह को बचा के वापस चित्तौड़ ले आये।

इसी बीच, कुम्भलनेर के राजा देवपाल को पद्मावती की सुंदरता का पता चला और उसने रानी पद्मावती से शादी करने का प्रस्ताव रखा, उस समय राजा रतन सिंह खिलजी की कैद में थे। जब रतन सिंह चित्तौड़ लौटे तो देवपाल का प्रस्ताव जानके उन्होंने देवपाल को उसके प्रस्ताव के लिए सजा देने का सोचा| देवपाल और रतन सिंह ने युद्ध करते हुए एक दूसरे को मार दिया| अलाउद्दीन को जैसे हे यह पता चला उसने पद्मावती को पाने के लिए चित्तौड़ पर भयानक आक्रमण कर दिया। जब राजपूतानी सेना मुगल फौज के आगे कमजोर पड़ती दिखाई दी, तो रानी ने जौहर का निर्णय लिया। उस समय जौहर प्रथा के अंतर्गत राजपूतानी रानियाँ अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जीवित ही अग्नि में प्रवेश कर लेतीं थीं। रानी पद्मावती ने भी 16000 राजपूतानी महिलाओं के साथ जौहर कुंड में प्रवेश करके अपने अदम्य साहस का परिचय दिया।

इस प्रकार एक अद्वितीय सुंदरी जो बुद्धिमत्ता और साहस में भी बेजोड़ थी, का अंत हो गया।

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