जानिये किस प्रकार काम करती हैं मोबाइल ऐप्स

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मोबाइल ऐप्स वो सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होते हैं जिन्हें मोबाइल, टैबलेट्स इतियादी में डाउनलोड किया जाता है। सभी मोबाइल ऐप्स हर मोबाइल पर नहीं चल सकते, क्योंकि हर मोबाइल का ऑपरेटिंग सिस्टम एक नहीं होता। इसलिए ऐप्स को डाउनलोड करने से पहले ये देख लें की वो आपके मोबाइल में चल पाएंगें या नहीं । गूगल प्ले से आप एंड्राइड (Android) ऐप्स और एप्पल ऐप्प स्टोर से आप आयओएस (iOS) ऐप्स डाउनलोड कर सकते हैं।

मोबाइल ऐप्स दो प्रकार के होते हैं, फ्री और पेड। कुछ ऐप्स फ्री में डाउनलोड हो जाते हैं वहीँ कुछ ऐप्स के लिए लोगों को पैसा देना होता है। फ्री ऐप्स में डिस्ट्रीब्यूटर्स बहुत से तरीकों से पैसे कमाते है, जैसे कि ऐड्स के जरिये या फिर बेसिक वर्ज़न को फ्री देकर अपग्रेडेड वर्ज़न को पेड कर के आदि। ऐप्स को डाउनलोड करने पर वे आपके मोबाइल की कुछ जानकारी का एक्सेस मांगते हैं जैसे इन्टरनेट कनेक्शन, फ़ोन आईडी, कैमरा आदि।

जानिए कि कौन सी एप्लीकेशन को किस जानकारी की आवश्यकता है

यह जानना काफी नहीं है कि कौन सी ऐप्स को किस जानकारी की आवश्यकता है। ये भी जानना ज़रूरी है कि उस जानकारी का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। ऐप्स डाउनलोड करने से पहले ये जानना ज़रूरी होता है कि उसे किस कंपनी ने डेवेलोप किया है। अगर ऐप्प के डेवलपर की आपको पर्याप्त जानकारी न मिले तो ये फ्रॉड भी हो सकता है। जब ऐप्स परमिशन मांगती हैं तो आप ये जान सकते हैं कि ऐप्स कौन सी जानकारी का किस प्रकार इस्तेमाल करेगी।

क्या आपको ऐप्स अपडेट करनी चाइये ?

ऐप्स डाउनलोड करने पर समय समय पर अपडेट आते रहते हैं । अपडेट करना जरुरी होता है क्योंकि यह करने से ऐप्प का वर्ज़न अपग्रेड होता है। कुछ ऐप्स ऐसे भी होते हैं जिन्हें यूजर के फ़ोन को इन्फेक्ट करने के लिए बनाया जाता है । ऐप्स डाउनलोड करते वक़्त सावधान रहने की ज़रूरत होती है और सिर्फ उस ऐप्प के रिव्यु देख के कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए।
अगर हम ऐप्स डाउनलोड करते वक्त थोड़े से सावधान रहें तो हम कई मुसीबतें टाल सकते हैं और मोबाइल ऐप्स का अपने जीवन में बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

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