Finance Bill 2021: पूरी हुई बजट की अंतिम प्रक्रिया

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Finance Bill 2021

Finance Bill 2021 को आखिरकार राज्यसभा ने भी ध्वनिमत से पारित कर लोकसभा को लौटा दिया है। राज्यसभा में इस पर चर्चा भी हुई थी, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि वित्त विधेयक में करों को अधिक सरल बनाने की कोशिश की गई है। साथ ही किसी तरह का बदलाव आयकर की दरों में नहीं हुआ है। इस लेख में हम आपको वित्त विधेयक 2021 के बारे में विस्तार से जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

इस लेख में आप पढ़ेंगे:

  • Union Budget of India को मिली मंजूरी
  • वित्त मंत्री ने Finance Bill 2021 को लेकर कहा
  • बजट में नई चीजें
  • आर्थिक संघर्ष को आसान बनाने की कोशिश
  • आर्थिक संघर्ष को आसान बनाने की कोशिश

Union Budget of India को मिली मंजूरी

केंद्र सरकार के जो भी वर्ष 2021-22 के वित्तीय प्रस्ताव हैं, इन सभी को स्वीकृति प्रदान करने के लिए ही इस विधेयक को लाया गया था। वित्त विधेयक 2021 अब जब पास हो गया है, तो ऐसे में पिछले महीने Union Budget of India में जो सुझाव और प्रस्ताव रखे गए थे, अब इन सभी को मंजूरी प्राप्त हो गई है। इस तरह से केंद्रीय बजट 2021 को जो मंजूरी दिए जाने की प्रक्रिया थी, उसे अब सदन में पूरा कर लिया गया है।

वित्त विधेयक के साथ विनियोग को धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इन्हें राज्य सभा की सहमति की जरूरत नहीं होती है। उच्च सदन सिर्फ इस पर चर्चा करता है और इसके बाद यह इसे लोकसभा को लौटा देता है। वित्त विधेयक पारित होने के बाद यह वित्त अधिनियम के रूप में कानून बन जाता है और इस तरह से अंतिम बजट मंजूर हो जाता है।

वित्त मंत्री ने Finance Bill 2021 को लेकर कहा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट प्रावधानों में कुछ संशोधन वाला वित्त विधेयक लोकसभा में पेश किया था और उस पर चर्चा का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि संशोधनों में विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों एवं भविष्य निधि वाले कर्मचारियों को कुछ राहत दी गई है। ई-कॉमर्स कंपनियों को अब 2 प्रतिशत की लेवी नहीं देनी होगी। साथ ही भविष्य निधि के ब्याज पर लगने वाली कर सीमा को भी बढ़ा दिया गया है।

साथ ही चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि लोगों पर बोझ बढ़ाकर खर्च पूरा करना सरकार की नीति नहीं है। निर्मला सीतारमन ने कहा कि कोरोनावायरस ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को बुरी तरीके से प्रभावित किया है और देश की अर्थव्यवस्था पर भी महामारी ने गंभीर असर डाला है। इसलिए करों का बोझ डालने के बदले इस सरकार ने विपरीत परिस्थितियों में लोगों का बोझ कम करने पर ध्यान दिया है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सामाजिक क्षेत्र, ऊर्जा, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र पर अधिक ध्यान दिया है और ये सर्वाधिक प्राथमिकता वाली सूची में रहे हैं। कोविड की चुनौतियों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र पर खास कर सरकार का ध्यान रहा है।

भारत सरकार के पूर्व वित्त सचिव अशोक कुमार झा ने बताया कि यह विधेयक दरअसल सरकार को उपलब्ध फंड में से खर्च करने की अनुमति प्रदान करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 114 में यह प्रावधान किया गया है कि सरकार को यदि पैसे खर्च करने हैं, तो सरकार अपने विनियोग विधेयक के माध्यम से ऐसा कर सकती है। यह जो विधेयक पारित हुआ है यह पूरी बजट की प्रक्रिया का अंतिम चरण है। अब जब यह पारित हो गया है, तो सरकार के जितने भी मांग या फिर अनुदान हैं, उन सभी के लिए अब सरकार को खर्च करने की मंजूरी मिल गई है।

इस बजट में ऐसे प्रस्तावों की संख्या लगभग 101 है। इस तरीके से जितने भी मंत्रालयों के या विभागों के मांग और अनुदान हैं, सभी अब स्पष्ट हो जाएंगे। खर्च करने के लिए उन्हें अब यह मंजूरी प्राप्त हो गई है।

बजट में नई चीजें

जहां तक बजट का सवाल है, तो इस बजट में काफी नई चीजें भी देखने के लिए मिली हैं। जैसा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बताया कि इस बजट में किसी तरह का नया टैक्स नहीं लगाया गया। जितने भी पैसे की सरकार को जरूरत थी, उसे इकट्ठा करने के लिए अन्य तरीके अपनाए गए। उदाहरण के लिए निजीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई। असेट मोनोटाइजेशन पर भी बल दिया गया है। निजीकरण की प्रक्रिया पहले भी हुई थी, लेकिन उसका स्वरूप ऐसा नहीं था। पहले एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम दूसरे सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ शेयर को खरीद लेता था और उसे ही निजी करण कह दिया जाता था।

यह पहला ऐसा मौका है, जब सरकार की तरफ से निजीकरण शब्द का इस्तेमाल किया गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि कम-से-कम सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंक निजी हो जाएंगे। इस तरह से सरकार का यह एक बड़ा ही महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस तरह का हिम्मत भरा कदम पहले किसी भी सरकार ने नहीं उठाया था।

आर्थिक संघर्ष को आसान बनाने की कोशिश

भारतीय वित्त संस्थान की प्रोफेसर डॉ यामिनी अग्रवाल ने राज्यसभा टीवी के साथ बातचीत में बताया कि कोरोना वायरस की वजह से जो देश आर्थिक संघर्ष कर रहा है, उसके रास्ते को देश के लिए Financial Bill 2021 सुगम बनाने का काम करेगा। इस बजट की यह खासियत है कि इसमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च को 137% तक बढ़ा कर एक खास तरह की गरीबी, जो कि महामारी की वजह से पैदा हुई है, उस पर करारा प्रहार करने की कोशिश की गई है। वित्त विधेयक 2021 के माध्यम से आधारभूत संरचनाओं को मजबूती प्रदान करने का कदम उठाया गया है। साथ ही लघु एवं मध्यम उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया गया है। देश की आर्थिक प्रगति के लिए हरसंभव कदम इस विधेयक में उठाए गए हैं।

वित्त विधेयक 2021 इस मायने में भी बहुत ही महत्वपूर्ण है कि इसमें सरकार ने 34 लाख 83 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च करने का प्रस्ताव रखा है, जो कि बहुत ही बड़ी राशि है। सवाल उठता है कि आखिर इसके लिए पैसे कहां से आप आएंगे। कर के जरिए पैसे जमा करने की बजाय जो इससे हटकर तरीके सरकार ने इस बार के बजट में सुझाए हैं, इन सभी के जरिए सरकार का लक्ष्य 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ना है।

जो लघु या मध्यम उद्योग हैं, वे कोरोना महामारी के दौरान बहुत हद तक प्रभावित हुए हैं। ऐसे में वित्त विधेयक 2021 में उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह के कदमों का जिक्र किया गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को वे झेल सकें, उसकी वजह से उन्हें किसी तरह की समस्या न आए, वे उसके साथ कदम से कदम मिला कर चल सकें और बेहतर प्रदर्शन कर सकें, इसके लिए प्रावधान इस विधेयक में किए गए हैं। पीएफ में जो 5 लाख रुपये तक की राशि है, उस पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगाने का प्रावधान किया गया है, यदि उसमें मालिक की तरफ से योगदान नहीं दिया जा रहा हो। माना जा रहा है कि सरकारी कर्मचारियों को इसका अधिक लाभ मिल सकता है।

और अंत में

Finance Bill 2021 वास्तव में बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से जो देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमराई है, वैसे में सर्वाधिक प्रभावित हुए क्षेत्रों को फिर से खड़ा करने के लिए बड़े पैमाने पर खर्च की आवश्यकता है। ऐसे में सरकार ने करदाताओं पर बोझ न लादते हुए जो अन्य तरीके इस बार के बजट में निकाले हैं, उसके हिसाब से यह विधेयक बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। संभव है कि सरकार को जो इसके जरिए खर्च की अनुमति मिली है, वह देश की अर्थव्यवस्था को एक बार फिर से पटरी पर लाने में मददगार साबित हो।

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