नोबेल पुरस्कार 2021 के विजेताओं की लिस्ट

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nobel prize 2021 winners
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नोबेल पुरस्कार को पूरी दुनिया में सबसे उत्कृष्ट पुरस्कारों में से एक माना जाता है इसीलिए इन पुरस्कारों की चर्चा दुनिया भर में की जाती है। खास बात है कि इन पुरस्कारों के लिए देशों की सीमाएं और दीवारें भी कोई मायने नहीं रखती इसलिए तो नोबेल पुरस्कारों के लिए विजेताओं का चयन दुनिया भर से किया जाता है। नोबेल पुरस्कार अलग-अलग क्षेत्रों में अमूल्य योगदान के लिए दिए जाते हैं जिसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, शांति, साहित्य और अर्थशास्त्र के क्षेत्र आते हैं। नोबेल पुरस्कार विजेताओं को 10 हज़ार डॉलर की राशि के साथ-साथ प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया जाता है। नोबेल विजेता अपने शोध अध्ययन के द्वारा उन विषयों पर समाज और दुनिया का ध्यान केंद्रित करते है… जो विषय कहीं ना कहीं समाज से अछूते रह गए हैं। नोबेल विजेताओं के शोध समाज को बेहतर बनाने में अपना पूरा योगदान देते हैं।

नोबेल पुरस्कारों की स्थापना 1895 में सर अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में नोबेल फाउंडेशन द्वारा की गई थी। नोबेल विजेताओं का चयन अलग-अलग समितियों के द्वारा किया जाता है। जैसे नोबेल फाउंडेशन द्वारा रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस… भौतिकी, रसायन और अर्थशास्त्र में विजेताओं का चयन करती हैं। वहीं कैरोलिन इंस्टिट्यूट स्टॉकहोम, स्वीडन… चिकित्सा विज्ञान में नोबेल पुरस्कार के विजेताओं का नाम का चयन करती हैं। ठीक इसी तरह साहित्य के क्षेत्र में स्वीडिश एकेडमी स्टॉकहोम स्वीडन के द्वारा विजेताओं के नाम की घोषणा की जाती है साथ ही शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता का नाम नार्वे की संसद के द्वारा चुना जाता है। नोबेल पुरस्कार विजेता के चयन में अलग-अलग समिति अपनी अपनी भूमिका निभाती हैं।

नोबेल पुरस्कार 2021 के विजेताओं की लिस्ट में नाम दर्ज कराने वालों में से हैं

  • विज्ञान या चिकित्सा में “डेविड जूलियस और अर्देम पटापाउटियन”
  • भौतिकी विज्ञान में“स्यूकुरो मानेबे, क्लॉस हैसलमैन और जियोर्जियो पेरिसिक”
  • रसायन शास्त्र में“बेंजामिन लिस्ट और डेविड डब्ल्यू.सी. मैकमिलन”
  • साहित्य के क्षेत्र में “अब्दुल रज़ाक गुर्नाह(तंज़ानिया के नॉवेलिस्ट)”
  • शांति के लिए“मारिया रेस्सा और दमित्री मुराटॉव”
  • आर्थिक विज्ञान में“डेविड कार्ड, जोशुआ एन्ग्रिस्ट और गुईडो इम्बेंस”

2021 के नोबेल पुरस्कारों में अपना नाम दर्ज कराने वालों में से सबसे पहले विजेता डेविड जूलियस और अर्देम पटापाउटियन हैं… यह दोनों चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं भौतिक विज्ञान में स्यूकुरो मानेबे, क्लॉस हैसलमैन और जियोर्जियो पेरिसिक को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रसायन शास्त्र में बेंजामिन लिस्ट और डेविड डब्लू सी मैकमिलन को नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। शांति के क्षेत्र में पत्रकार मारिया रेस्सा और दिमित्री मुराटॉव नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। तो वहीं साहित्य के क्षेत्र में तंजानिया के नॉवेलिस्ट अब्दुल रज्जाक गुरनाह को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।आखिर में आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में डेबिट कार्ड, जोशुआ एनीग्रस्ट और गुइडो इम्बेन्स को नोबल पुरस्कार विजेता घोषित किया गया है।

अब यहां ये चर्चा भी जरूरी हो जाती है कि आखिर इन विभूतियों ने अपने अपने क्षेत्र में ऐसे क्या योगदान दिये हैं जिसकी वजह से इन्हें नोबल जैसे प्रसिद्ध पुरस्कार से नवाजा गया है।

सबसे पहले चर्चा कर लेते हैं मेडिसिन के क्षेत्र में 2021 का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले डेविड जूलियस और अर्देम पटापाउटियन की। डेविड और अर्देम ने तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टर्स की विभिन्न खोज की जिसके लिए इन दोनों को संयुक्त रूप से नोबल पुरस्कार दिए गये । न्यूयार्क में जन्मे डेविड जूलियस सैन फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया में काम करते हैं। जूलियस ने उन सेंसर्स की पहचान की है, जिनसे त्वचा अलग-अलग तापमान का अनुभव करती है। इसके कारण हम अलग-अलग तापमान पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं। अब लेबनान में जन्मे अर्देम पटापाउटियन के बारे में भी जान लेते हैं। अर्देम कैलिफोर्निया के स्किरप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में कार्यरत हैं। पटापाउटियन ने प्रेशर यानी दाब का अनुभव कराने वाले सेंसर्स की पहचान की है। किसी भी तरह के दाब और ताप को हमारी त्वचा ही अनुभव करती है। साइंटिस्टों के लिए यह किसी रहस्य जैसा था कि त्वचा में स्पर्श को समझ लेने की यह खूबी आखिर आती कहां से है। इसी रहस्यमयी गुत्थी को सुलझाने के लिए दोनों अमेरिकी वैज्ञानिकों, डेविड जूलियस और अर्देम पटापाउटियन को 2021 का चिकित्सा क्षेत्र के नोबेल अवार्ड से नवाजा गया ।

मेडिसिन के बाद अब चर्चा करते हैं फिजिक्स यानी भौतिक विज्ञान में 2021 का नोबल पुरस्कार जीतने वाले स्यूकुरो मानेबे, क्लॉस हैसलमैन और जियोर्जियो पेरिसिक के बारे में। इस बार फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार जापान, जर्मनी और इटली के वैज्ञानिकों को दिया गया है। सुकुरो मनाबे, क्लॉस हेसलमैन को जलवायु संबंधी खोज में उल्लेखनीय योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। सुकुरो मनाबे, क्लॉस हेसलमैन ने पृथ्वी की जलवायु का फिजिकल मॉडल तैयार किया, जिससे इसमें होने वाले बदलाव पर सटीकता से नजर रखी जा सकती है। इसके साथ ही ग्लोबल वॉर्मिंग का भी अनुमान लगाया जा सकता है। वहीं जॉर्जियो पेरिसिक ने परमाणु से लेकर ग्रहों तक के फिजिकल सिस्टम में होने वाले तेज बदलाव, विकारों और उतार चढ़ाव के बीच की गतिविधियों को खोज निकाला है और नोबेल पुरस्कार जीतने का गौरव हासिल किया है।

केमिस्ट्री यानी रसायन विज्ञान में बेंजामिन लिस्ट और डेविड डब्लू सी मैकमिलन को क्यों मिला 2021 का नोबल पुरस्कार ?  इन दोनों ही वैज्ञानिकों को एसिमेट्रिक ऑर्गनोकैटलिसिस के विकास के लिए किए गए रिसर्च के लिए संयुक्त रूप ने नोबेल पुरस्कार दिए गये हैं। इनके शोध ने फार्मास्युटिकल रिसर्च पर बहुत प्रभाव डाला है और रसायन विज्ञान को हरा भरा बना दिया है। इन दोनों वैज्ञानिकों ने मॉलिक्यूलर कंस्ट्रक्शन के लिए एक नया और कारगर उपकरण विकसित किया है। जिसका फार्मास्युटिकल रिसर्च पर काफी बढ़िया प्रभाव पड़ा है। केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज, स्टॉकहोम, स्वीडन द्वारा प्रदान किया जाता है।

अब चर्चा लिटरेचर यानी साहित्य के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार पाने वाले अब्दुल रज्जाक गुरनाह की। अब्दुल रज्जाक गुरनाह तंजानिया के मशहूर नॉवेलिस्ट हैं। इन्हें उपनिवेशवाद के प्रभावों और संस्कृतियों और महाद्वीपों के बीच शरणार्थियों के भाग्य के बारे में अपनी अडिग और हृदयविदारक लेखनी के लिए नोबल पुरस्कार के नवाजा गया है। साहित्य का नोबेल पुरस्कार स्वीडिश अकादमी, स्टॉकहोम, स्वीडन द्वारा प्रदान किया जाता है। स्वीडिश अकादमी नोबल पुरस्कार में विजेता को एक करोड़ स्वीडिश क्राउन देती है, जो करीब 11 लाख चालीस हज़ार डॉलर के बराबर होते हैं। जांजीबार में पैदा हुए 73 वर्षीय गुरनाह ने दस नॉवेल लिखे हैं जिनमें ‘पेरेडाइज़’ और ‘डेज़र्शन’ भी शामिल है। गुनराह ने अपने नोबेल पुरस्कार को अफ़्रीकी लोगों, अफ़्रीका और अपने सभी पाठकों को समर्पित किया है। गुरनाह 1960 के दशक में एक शरणार्थी के तौर पर इंग्लैंड पहुंचे थे। हाल ही में रिटायर होने से पहले तक वो कैंटरबरी की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैंट में प्रोफ़ेसर थे। गुनराह से पहले 1986 में अफ्रीकी मूल के अश्वेत लेखक वूले सोयिंका ने नोबल पुरस्कार जीता था। उनके बाद से ये पुरस्कार जीतने वाले गुरनाह पहले अफ़्रीकी लेखक हैं। उन्हें उम्मीद है कि नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद शरणार्थी संकट और उपनिवेशवाद जैसे मुद्दों पर अब सारी दुनिया गंभीरता से चर्चा करेगी और फिर इससे शरणार्थियों के हालात सुधरने की उम्मीदों को बल मिलेगा।

पीस यानी शांति के लिए मारिया रेस्सा और दिमित्री मुराटॉव को साल 2021 का नोबल पुरस्कार मिला है। मारिया और दिमित्री पेशे से एक पत्रकार हैं। दोनों ने अभिव्यक्ति की आजादी की सुरक्षा के लिए कई अहम कार्य किए हैं। इनके इन्ही प्रयासों की वजह से इन्हें नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया गया। अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र और स्थायी शांति के लिए पहली शर्त होती है। अभिव्यक्ति की आजादी की सुरक्षा के लिए मारिया और दिमित्री ने जमीनी स्तर पर जी जान से काम किया।

इकोनॉमिक्स यानी अर्थशास्त्र का नोबल डेविड कार्ड, जोशुआ एन्ग्रिस्ट और गुईडो इम्बेंस को मिला। ये तीनों एक स्कॉलर हैं। इन्होंने प्राकृतिक प्रयोगों, वास्तविक जीवन में उत्पन्न होने वाले प्रयोगों का उपयोग किया है और ये साबित करने की कोशिश की है कि उनका समाज के केंद्रीय प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उपयोग किया जा सकता है। इन तीनों स्कॉलर्स के इकनोमिक साइंसेज में एम्पिरिकल रिसर्च में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की कोशिशों की भी सराहना की गई है।

नोबेल पुरस्कार से जुड़े कुछ ऐसे विवाद भी हुए जो खूब चर्चा में रहे। बराक ओबामा का विवाद… कई लोगों ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को नोबेल पुरस्कार दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। ओबामा ने 2020 में प्रकाशित अपनी जीवनी में लिखा कि पुरस्कार की घोषणा के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया थी, “किस लिए”। ओबामा नौ महीने पहले ही राष्ट्रपति बने थे और आलोचकों का कहना था कि ओबामा को नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला जल्दबाज़ी में लिया गया था। 2015 में नोबेल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर, गेर लुंडेस्टन ने बीबीसी को बताया था कि जिस कमेटी ने ये फ़ैसला लिया था, उन्हें बाद में इस पर अफ़सोस हुआ था।

दूसरा विवाद रहा… यासिर अराफ़ात के साथ। पूर्व फलस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को 1994 में नोबेल पुरस्कार इजराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री येत्‌ज़ाक रॉबिन और इसराइल के विदेश मंत्री शिमोन पेरेस के साथ ओस्लो शांति समझौते के लिए दिया गया था। समझौता इजराइल-फ़लस्तीनी विवाद को सुलझाने की एक उम्मीद लेकर आया था। इजराइल और दूसरे देशों में इसकी आलोचना हुई क्योंकि अराफ़ात पहले अर्धसैनिक गतिविधियों में शामिल थे। नोबेल कमेटी में इस फ़ैसले पर विवाद हुआ और फ़ैसले के विरोध में एक सदस्य केयर क्रिस्टेइन्सन ने इस्तीफ़ा दे दिया था।

आंग सान सू ची भी नोबेल पुरस्कार विवाद में घिर चुकी हैं। 1991 में सू ची को म्यांमार के सैन्य शासन के ख़िलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया था। लेकिन 20 साल बाद आंग सान सू ची पर सर्वोच्च नेता रहते हुए, रोहिंग्या मुसलमानों के मानवाधिकारों का हनन और उनकी हत्या के आरोप लगे। यूएन ने इसे ‘नरसंहार’ बताया। आंग सान सू ची से नोबेल पुरस्कार वापस लेने की भी मांग की गई लेकिन नोबेल पुरस्कारों के नियम इसकी इजाज़त नहीं देते।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नोबेल पुरस्कार क्यों नहीं मिला? नोबेल शांति पुरस्कार कई लोगों को नहीं दिए जाने के कारण भी चर्चा में रहा है। इन नामों में सबसे बड़ा नाम है महात्मा गांधी का। कई बार नॉमिनेट किए जाने के बावजूद भी गांधी जी को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया। 2006 में नार्वे के इतिहासकार और तब के शांति पुरस्कार कमेटी के अध्यक्ष गेर लुंडेस्टैड ने कहा था कि गांधी की उपलब्धियों को सम्मान नहीं देना नोबेल इतिहास की सबसे बड़ी चूक में से एक हैं।

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