क्या है महात्मा गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप कार्यक्रम (MGNF)?

1086
MGNF

Mahatma Gandhi National Fellowship Programme की शुरुआत हाल ही में आईआईएम बेंगलुरु के साथ मिलकर कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की ओर से की गई है, जिसका उद्देश्य जिला स्तर पर कौशल विकास को प्रोत्साहित करना है। कौशल विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर मानव संसाधन के उपलब्ध नहीं होने की वजह से जो चुनौतियां मौजूद हैं, इसके जरिये उनका सामना किया जाएगा। मुख्य रुप से जिला कौशल प्रशासन और जिला कौशल समितियों को मजबूती प्रदान करने के लिए इस कार्यक्रम को शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम का संचालन विश्व बैंक के ऋण सहायता कार्यक्रम SANKALP के अंतर्गत होने वाला है। इसमें आजीविका संवर्धन के लिए कौशल अधिग्रहण के साथ ज्ञान व जागरूकता फैलाने के प्रयास चल रहे हैं।

इस लेख में आप पढ़ेंगे:

  • MGNF Programme से मिलने वाले लाभ
  • समूचे देश में Mahatma Gandhi National Fellowship Programme का विस्तार
  • महिलाओं की भी बढ़ेगी भागीदारी
  • सशक्तिकरण सुनिश्चित करने का लक्ष्य

MGNF Programme से मिलने वाले लाभ

MGNF Programme एक शैक्षणिक कार्यक्रम है, जिसकी अवधि 2 वर्षों की है। जिला प्रशासन तो इसमें जुड़ा हुआ है ही, साथ में जमीनी स्तर पर जो व्यावहारिक अनुभव इसके पास मौजूद हैं, इसका इस्तेमाल इस कार्यक्रम में होने वाला है।

  • MGNF में जिन लोगों को फेलोशिप प्राप्त होगी, जिला कौशल समितियों के साथ उन्हें जुड़ने का मौका मिलेगा।
  • वे कौशल विकास से संबंधित वातावरण को ठीक तरीके से समझ पाएंगे।
  • शैक्षणिक विशेषज्ञता तो उन्हें हासिल होगी ही, साथ ही तकनीकी रूप से भी वे दक्ष होंगे।
  • जिला कौशल विकास योजनाओं के निर्माण के लिए जो एक व्यवस्था बनी हुई है, उसके जरिए जिला स्तर पर कौशल विकास योजना के प्रबंधन में भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप कार्यक्रम से मदद मिलेगी।

समूचे देश में Mahatma Gandhi National Fellowship Programme का विस्तार

पहले से ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप कार्यक्रम का संचालन हो रहा है। अभी तक पायलट प्रोजेक्ट को 69 जिलों में चलाया जा रहा था, जहां 69 फेलोज काम कर रहे थे। मंत्रालय अब इस योजना का देश के बाकी जिलों में भी विस्तार कर रहा है।

  • MGNF Programme में शैक्षणिक स्तर को ऊंचा बनाए रखना है। शैक्षणिक उत्कृष्टता भी बनाए रखनी है। साथ ही शैक्षणिक प्रतिष्ठा का स्तर भी ऊंचा बनाए रखना है। अपने इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मंत्रालय की तरफ से भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी कि आईआईएम के साथ ही एकेडमिक साझेदारी की गई है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर इस कार्यक्रम के संचालन के लिए मंत्रालय ने जिन आईआईएम के साथ साझेदारी की है, इनमें आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बेंगलुरु, आईआईएम कोझीकोड, आईआईएम लखनऊ, आईआईएम जम्मू, आईआईएम विशाखापत्तनम, आईआईएम रांची, आईआईएम उदयपुर और आईआईएम नागपुर शामिल हैं।
  • आईआईएम के अलावा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने केरल इंस्टिट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन (KILA) के साथ भी एक साझेदारी की है। यह साझेदारी केरल, तमिलनाडु, लक्षद्वीप और पुदुचेरी जिलों के लिए की गई है। कार्यक्रम को संचालित करने के लिए इन जिलों के अधिकारियों को सक्षम बनाना ही इसका उद्देश्य है।
  • KILA को यह जिम्मेवारी दी गई है कि कौशल विकास कार्यक्रम को पूरी तरह से प्रभावी बनाने के लिए इसके जो विषयगत क्षेत्र हैं, उन्हें लेकर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करे और इसे वितरित करें। इन जिलों में अधिकारियों की क्षमता इसके जरिए बढ़ानी है और उन्हें इस कार्यक्रम का ठीक तरीके से कार्यान्वयन करने के काबिल बनाना है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए KILA की तरफ से प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। साथ में जिन राज्यों में जिन चीजों की जरूरत होगी, उनका मूल्यांकन करते हुए उन सामग्री को यह या तो विकसित करेगा या फिर इनका इंतजाम करके उपलब्ध कराएगा।
  • पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी कि पीपीपी मोड में SANKALP प्रोग्राम ट्रेनर ऑफ ट्रेनर (ToT) सिस्टम को ट्रेनर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मदद प्रदान करेगा। MGNF programme के पायलट के तौर पर औरंगाबाद में आटोमोटिव क्लस्टर का चुनाव किया गया है।
  • कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के साथ इंडो-जर्मन प्रोग्राम फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, आटोमोटिव स्किल डेवलपमेंट काउंसिल और महाराष्ट्र राज्य कौशल विकास मिशन के जो प्रमुख हितधारक हैं, इन सभी के बीच एक रणनीतिक साझेदारी का भी गठन किया गया है। तकनीकी के साथ व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण की तैयारी पर बल देने के साथ शैक्षणिक कौशल और औद्योगिक अनुभव आदि पर भी इसमें ध्यान दिया जाएगा। साथ ही डोमेन संबंधी जानकारी पर भी फोकस रहेगा।

महिलाओं की भी बढ़ेगी भागीदारी

Mahatma Gandhi National Fellowship Programme के अंतर्गत जो अलग-अलग कौशल कार्यक्रम हैं, उनमें कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सचिव प्रवीण कुमार के मुताबिक महिलाओं की भी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। जमीनी स्तर पर संसाधनों की गुणवत्ता के साथ उपलब्धता को मजबूत करना कुमार के मुताबिक प्राथमिकताओं में से एक होगा।

आईआईएम और आईआईटी जैसे प्रमुख शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों की मदद से अलग-अलग कार्यक्रमों और प्रशिक्षण मानकों को बेहतर बनाने में भी पर्याप्त सहयोग मिलेगा। यही नहीं, प्रशिक्षकों की क्षमताओं को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सशक्तिकरण सुनिश्चित करने का लक्ष्य

MGNF Programme को लेकर केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री डॉ महेंद्रनाथ पांडे भी यह बता चुके हैं कि बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण के साथ देशभर में व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए आधारभूत संरचनाओं को विकसित किए जाने पर भारत ने पिछले 6 वर्षों में बहुत ध्यान दिया है। साझेदारी को हम इस कदर मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं कि कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता पहले से भी बेहतर हो जाए।

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और IIM, IIT, KILA और SANKALP जैसी योजनाओं के माध्यम से सभी जिलों में शैक्षणिक भागीदारी के साथ सशक्तिकरण भी सुनिश्चित किया जा रहा है।
  • महात्मा गांधी नेशनल फैलोशिप के अंतर्गत पहले साल में जहां फेलो को 50 हजार रुपये, वहीं दूसरे साल में 60 हजार रुपये मिल रहे हैं।
  • चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान SANKALP प्रोग्राम के अंतर्गत की गई है, जिनमें संस्थागत मजबूती, समावेश, गुणवत्ता आश्वासन और पीपीपी के जरिए कौशल का विस्तार शामिल हैं।

चलते-चलते

Mahatma Gandhi National Fellowship Programme के शुरुआती चरण की कामयाबी को देखते हुए देश के सभी जिलों में इसका विस्तार करने की योजना बड़ी प्रभावी साबित होने की उम्मीद है। इसके जरिए जिला कौशल प्रशासन और जिला कौशल समितियों को यदि मजबूती मिलती है, तो इससे कौशल विकास के क्षेत्र में देश में बड़ी प्रगति देखने को मिलेगी।

Content Protection by DMCA.com

Leave a Reply !!

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.