सिंधु घाटी सभ्यता

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“इंड्स वैली सिविलाइज़ेशन” या “सिंधु घाटी सभ्यता” कास्य युग मैं आज के उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान से लेकर, पाकिस्तान होते हुए उत्तरी-पश्चिमी भारत तक फैली हुई थी| प्राचीन इजिप्ट और मेसोपोटामिया के बाद यह पौराणिक काल की तीसरी शुरुवाती सभ्यता हैं, सिंधु घाटी सभ्यता अपने समय में सबसे ज्यादा फली-फूली सभ्यता थी | यह सभय्ता सिंधु नदी के किनारे मैं बसी हुई थी, इसीलिए इसे सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाता हैं | अपने स्वर्णिम काल में इस सभ्यता की आबादी 5 लाख थी, इस सभ्यता के निवासियों ने हस्तशिल्प और हस्तकला में कई तकनीके विकसित की थी, और कई धातुओं की भी खोज की और उनसे औजार और अन्य घरेलु सामान बनाने की तकनीक विकसित की| इस सभ्यता ने ताम्बा, कास्य, टिन और लीड जैसी धातुओं की खोज हुई, और इसे कास्य युग भी कहा जाता हैं |

इस सभ्यता की विशेषता थी शहरो का निर्माण, ईंट से बने हुए घर, जलनिकास की सटीक योजना, पानी की आपूर्ति के लिए नहरे, और सभ्यता में कई भवनों का निर्माण हुआ | सिंधु घाटी सभ्यता को हड्डप्पा सभ्यता भी कहते हैं, क्योंकि 1920 में ब्रिटिश राज के दौरान हड्डप्पा में खुदाई के दौरान इस सभ्यता के सबसे पहले अवशेष मिले, जो ब्रिटिश राज में पंजाब प्रान्त में आता था, जो अब पाकिस्तान में हैं | इस दौरान बनाई गयी कई वस्तुए खुदाई के दौरान प्राप्त हुई, जैसे मिटटी और कास्य के बर्तन, धातुओं से बने हुए औजार, उस समय उपयोग में लायी जाने वाली अन्य वस्तुए | खुदाई के दौरान बहुत सरे भवनों और घरो के अवशेष भी प्राप्त हुए | इस सभ्यता के दौरान लिखे हुए अवशेष भी मिले, यह लिखे हुए अवशेष मुख्यत: मिटटी के बर्तनों और कास्य के टुकड़ो पर पाए गए | लेकिन आज तक इतिहासकार उनके लेखन प्रणाली को नहीं समझ पाए हैं | अगर इतिहासकार इन लिखे हुए अवशेषों को पढ़ पाएंगे तो इस सभ्यता के बारे में और भी बहुत बहुमूल्य जानकारियां प्राप्त होगी |

1800 इसा पूर्व से इस सभ्यता का पतन होना शुरू हुआ, इस सभ्यता में पनपी हुई कई चीजो का चलन काम होने लगा और बाहरी आक्रमणों से भी इस सभय्ता का पतन होने लगा | पर आज तक इस सभ्यता के पतन का असली कारन इतिहासकार नहीं जान पाए हैं | कुछ इतिहासकार कहते हैं की नदियों में पानी की कमी से इस सभ्यता का पतन हुआ, तो कुछ विद्वान् मानते हैं की एक बहुत बाढ़ इस सभ्यता के पतन का कारन बनी |

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